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सीमांचल बॉर्डर पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई

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बिहार-नेपाल सीमा पर अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah द्वारा एक महीने पहले किए गए ऐलान के बाद अब सीमांचल इलाके में इसका असर जमीन पर दिखने लगा है।

किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड में भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में प्रशासन ने व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। इस दौरान नो मेंस लैंड को पूरी तरह खाली कराया गया और सीमा से 500 मीटर के दायरे में बने 20 मकानों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इन घरों में रहने वाले परिवारों को अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया गया है।

सीमांचल बॉर्डर पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई
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10 किलोमीटर दायरे में अभियान की तैयारी

दरअसल, 26 फरवरी 2026 को अररिया के सिकटी में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने घोषणा की थी कि सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे। साथ ही, घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने का अभियान भी यहीं से शुरू करने की बात कही गई थी।

इस घोषणा के लगभग एक महीने बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है, जिसे सीमा सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

सीमांचल बॉर्डर पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई
सीमांचल बॉर्डर पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई

संयुक्त जांच में सामने आए अवैध कब्जे

प्रशासनिक अधिकारियों और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की संयुक्त जांच में सीमा से सटे छह स्थानों पर अवैध अतिक्रमण पाया गया। जांच में यह सामने आया कि करीब 20 परिवार लंबे समय से सरकारी जमीन पर रह रहे थे। कुछ लोगों ने पक्के मकान भी बना लिए थे।

इतना ही नहीं, नो मेंस लैंड के कुछ हिस्सों में खेती और चाय के बागान लगाए जाने की भी जानकारी मिली, जो नियमों का उल्लंघन है।

सीमांचल बॉर्डर पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई
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प्रभावित परिवारों का क्या कहना है

अभियान के दौरान जिन लोगों के घर तोड़े गए, उनमें दिघलबैंक निवासी आजम भी शामिल हैं। उनका कहना है कि वे पिछले 25 वर्षों से बॉर्डर क्षेत्र में रह रहे थे। प्रशासन ने उनका घर तोड़ दिया, हालांकि उन्हें पुनर्वास के लिए 4 कट्ठा जमीन और कुछ आर्थिक सहायता दी गई है।

वहीं, इशराउल हक ने बताया कि उनका जन्म भी उसी इलाके में हुआ था और वे वर्षों से वहीं रह रहे थे। उनके अनुसार, प्रशासन ने यह कहते हुए घर तोड़ दिया कि वह सरकारी जमीन पर बना हुआ था। उन्होंने यह भी बताया कि उनका चाय बागान भी उसी जमीन पर था।

प्रशासन का रुख सख्त

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सीमा से सटे अन्य इलाकों में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम न केवल सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जरूरी है, बल्कि सीमा सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

अधिक अपडेट के लिए पढ़ें Jeb News.

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