बेखौफ जुबां बे बाक अंदाज

ठाकुरगंज CHC में रिश्वत आरोपों पर घमासान

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किशनगंज जिले के ठाकुरगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में रिश्वतखोरी और कथित उत्पीड़न के आरोपों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। सोमवार को मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन की टीम केंद्र पहुंची, लेकिन वहां का माहौल तनावपूर्ण रहा और कर्मचारियों ने जांच प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए।

जांच टीम में डीडीसी प्रदीप कुमार झा और स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) डॉ. मुनाजीम शामिल थे। टीम के पहुंचते ही बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी एकत्र हो गए और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर विरोध दर्ज कराया।

ठाकुरगंज CHC में रिश्वत आरोपों पर घमासान
ठाकुरगंज CHC में रिश्वत आरोपों पर घमासान

दोहरे मापदंड का आरोप

स्वास्थ्यकर्मियों का आरोप है कि विभाग में कार्रवाई को लेकर दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। उनका कहना है कि हाल ही में एक एएनएम (सहायक नर्स मिडवाइफ) को मात्र 500 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में तुरंत बर्खास्त कर दिया गया, जबकि प्रखंड चिकित्सा प्रभारी डॉ. अखलाकुर रहमान पर लाखों रुपये की कथित रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कर्मचारियों के अनुसार, इस असमान कार्रवाई ने पूरे स्टाफ में असंतोष और आक्रोश को जन्म दिया है।

ठाकुरगंज CHC में रिश्वत आरोपों पर घमासान
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धमकी भरे संदेशों से बढ़ा डर

मामले को और गंभीर बनाते हुए स्वास्थ्यकर्मियों ने दावा किया है कि उन्हें “टाइगर जिंदा है” जैसे धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं। इन संदेशों के कारण कर्मचारियों, विशेषकर महिला स्वास्थ्यकर्मियों में भय का माहौल व्याप्त है। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा की मांग भी की है।

कार्य बहिष्कार और आत्मदाह की चेतावनी

न्याय की मांग को लेकर कर्मचारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए मंगलवार से कार्य बहिष्कार (वर्क बॉयकॉट) की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आत्मदाह जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।

यह चेतावनी प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

ठाकुरगंज CHC में रिश्वत आरोपों पर घमासान
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जांच जारी, प्रशासन ने दिया आश्वासन

इस पूरे मामले पर DPM डॉ. मुनाजीम ने बताया कि अब तक तीन लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक महिला पदाधिकारी की अनुपस्थिति के कारण उनका बयान दर्ज करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से जारी है और सभी पक्षों को सुना जाएगा।

महिला कर्मियों में खासा असंतोष

विशेष रूप से महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि जब तक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच नहीं होगी, वे आंदोलन जारी रखेंगी।

प्रशासन पर बढ़ा दबाव

मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और जिला प्रशासन पर निष्पक्ष जांच कर शीघ्र कार्रवाई करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह विवाद और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

अधिक अपडेट के लिए पढ़ें Jeb News.

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