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बुढ़नई में आदिवासी परिवारों ने जमीन पर स्थायी अधिकार की मांग

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किशनगंज के पोठिया स्थित मौजा बुढ़नई में वर्षों से रह रहे भूमिहीन आदिवासी परिवारों ने अपनी जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर सरकारी भूमि की बंदोबस्ती (पर्मानेंट राइट) देने की गुहार लगाई है।

बुढ़नई में आदिवासी परिवारों ने जमीन पर स्थायी अधिकार की मांग
बुढ़नई में आदिवासी परिवारों ने जमीन पर स्थायी अधिकार की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले लगभग 40 से 45 वर्षों से बिहार सरकार की खाता संख्या 1136 की भूमि पर निवास कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें इस जमीन का कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके चलते वे लगातार बेदखली के डर में जीवन जीने को मजबूर हैं।

बुधवार को सुनील मुर्मू समेत करीब 43 से 44 ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से आवेदन देकर अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी। ये सभी परिवार झाड़बाड़ी और तैयबपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं और मजदूरी कर किसी तरह अपना जीवनयापन करते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने इसी जमीन पर अपने घर बनाए हैं और कुछ परिवारों को इंदिरा आवास योजना के तहत आवास भी मिला है। इसके बावजूद जमीन का मालिकाना अधिकार न मिलने से वे स्थायी रूप से सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

कई ग्रामीण परिवार इसी भूमि पर खेती कर अपनी आजीविका भी चला रहे हैं, लेकिन कानूनी दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

आदिवासी समाज के नेता बबलू बास्की ने बताया कि लंबे समय से बसने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, ग्रामीण सुनील, रूबीलाल और सुपौल सहित अन्य लोगों ने कहा कि वे कई बार अंचल कार्यालय पोठिया में आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कर सभी पात्र परिवारों को भूमि की बंदोबस्ती प्रदान की जाए, ताकि उन्हें स्थायी अधिकार मिल सके और वे बिना भय के अपना जीवन यापन कर सकें।

अधिक अपडेट के लिए पढ़ें Jeb News.

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