कटिहार करंट हादसा: कटिहार नगर निगम क्षेत्र के तेजा टोला मोहल्ले में रविवार की सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। 32 वर्षीय राहुल कुमार की करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब शनिवार रात आई तेज आंधी और भारी बारिश के बाद खेत में टूटा हुआ बिजली का तार गिरा हुआ था और उसमें लगातार करंट प्रवाहित हो रहा था। इस लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार की दुनिया उजाड़ दी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, शनिवार रात आए तूफान के कारण कई जगह बिजली के खंभे और तार क्षतिग्रस्त हो गए थे। लेकिन समय रहते बिजली विभाग द्वारा न तो इन टूटे तारों को हटाया गया और न ही बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बंद की गई। इसी लापरवाही का नतीजा रविवार सुबह एक जानलेवा हादसे के रूप में सामने आया। खेत में फैले पानी और जमीन पर गिरे बिजली के तार ने पूरे क्षेत्र को खतरनाक बना दिया था।

रविवार सुबह राहुल कुमार रोज की तरह अपने काम में व्यस्त थे। वह ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे और साथ ही अपने घर में मौजूद गायों की देखभाल भी करते थे। बताया जा रहा है कि सुबह वह अपनी गाय को लेकर खेत की ओर गए थे। जैसे ही वह पानी से भरे खेत में उतरे, उनका पैर उस टूटे हुए बिजली के तार पर पड़ गया जिसमें करंट दौड़ रहा था। करंट लगते ही वह बुरी तरह झुलस गए और वहीं खेत में गिर पड़े।
हादसे को पास में खेल रहे कुछ बच्चों ने देखा। बच्चों ने तुरंत शोर मचाया और दौड़कर परिजनों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने तत्काल बिजली विभाग को फोन कर सप्लाई बंद करवाने की कोशिश की, जिसके बाद बिजली आपूर्ति रोकी गई। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों की मदद से राहुल कुमार को आनन-फानन में कटिहार मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जैसे ही राहुल की मौत की खबर घर पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। उनकी वृद्ध मां, चार छोटे बच्चे और एक भतीजी बेसहारा हो गए हैं। राहुल ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। ई-रिक्शा चलाकर वह किसी तरह परिवार का खर्च चलाते थे। उनकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। बच्चों के भविष्य को लेकर अब परिवार के सामने गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना के बाद पूरे तेजा टोला और आसपास के इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि अगर आंधी के तुरंत बाद टूटे हुए तारों की जांच कर ली जाती और बिजली आपूर्ति समय रहते बंद कर दी जाती, तो यह हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर विभाग की लापरवाही करार दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार तेज आंधी और बारिश के बाद बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है, लेकिन सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। कई बार शिकायतों के बावजूद टूटे तारों और गिरे हुए खंभों को हटाने में देरी की जाती है, जिससे इस तरह के हादसे होने की संभावना बनी रहती है। इस घटना ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे के बाद लोगों में गुस्सा साफ देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने मौके पर प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से मांग की है कि मृतक के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए, ताकि घर चलाने में मदद मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ मुआवजा ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में अक्सर जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आपदा के तुरंत बाद त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है। खासकर ग्रामीण और खेतिहर इलाकों में टूटे हुए तार और गिरे हुए खंभे बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। यदि बिजली विभाग समय पर फील्ड निरीक्षण करे और सप्लाई को नियंत्रित रखे, तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
राहुल कुमार की मौत ने न सिर्फ उनके परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। ग्रामीण अब यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कितनी और जानें जाने के बाद व्यवस्था सुधरेगी। एक मेहनतकश ई-रिक्शा चालक की इस तरह मौत ने प्रशासनिक व्यवस्था और बिजली विभाग की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल परिवार गहरे सदमे में है और पूरे गांव में मातम का माहौल है। बच्चे अपने पिता को याद कर रो रहे हैं और वृद्ध मां बेसुध हैं। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि विकास और व्यवस्था के दावों के बीच आम लोगों की सुरक्षा कितनी कमजोर है।
कटिहार की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी चूक का परिणाम मानी जा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या वास्तव में पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या नहीं।










