कटिहार बिजली संकट: बिहार के कटिहार जिले में बिजली संकट अब केवल जनसुविधा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। जिले के बारसोई, बलरामपुर, कदवा, प्राणपुर और मनिहारी समेत कई प्रखंडों में लंबे समय से जारी लो-वोल्टेज, बार-बार बिजली कटौती और जर्जर बिजली व्यवस्था को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने कांग्रेस सांसद तारिक अनवर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।
AIMIM का कहना है कि कटिहार के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग वर्षों से बिजली की खराब व्यवस्था का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर घंटों तक बिजली नहीं रहती, जबकि जहां बिजली आती भी है, वहां लो-वोल्टेज के कारण घरेलू उपकरण सही ढंग से काम नहीं करते। गर्मी के मौसम में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे आम लोगों, विद्यार्थियों, किसानों और छोटे व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने आरोप लगाया कि सांसद तारिक अनवर ने जनता की शिकायतों के बावजूद केवल जिला प्रशासन को पत्र लिखकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली। उनके अनुसार, इतनी बड़ी समस्या का समाधान केवल पत्राचार से संभव नहीं है। यदि सांसद वास्तव में इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें राज्य सरकार, ऊर्जा विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर स्थायी समाधान निकालने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।
आदिल हसन ने कहा कि बिजली संकट केवल सुविधा का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से भी जुड़ा हुआ विषय है। लगातार बिजली कटौती के कारण छोटे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, जबकि छात्र पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। कई गांवों में किसानों को सिंचाई के लिए भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही, जिससे खेती पर असर पड़ रहा है।

AIMIM का दावा है कि स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों ने लगातार इस मुद्दे को उठाया, जिसके बाद यह मामला व्यापक चर्चा का विषय बना। पार्टी ने कहा कि जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है। लोगों की अपेक्षा है कि उनके जनप्रतिनिधि संबंधित विभागों पर दबाव बनाकर स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।
आदिल हसन ने बताया कि उन्होंने स्वयं बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता, एसडीओ और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की है। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने, पुराने और जर्जर बिजली तार बदलने तथा नए विद्युत उपकेंद्र (सब-पावर स्टेशन) स्थापित करने की मांग रखी। उनका कहना है कि जब तक बिजली व्यवस्था का ढांचा मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि कटिहार जैसे बड़े जिले में लगातार बढ़ती आबादी और बिजली की मांग को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। कई ट्रांसफार्मर क्षमता से अधिक लोड झेल रहे हैं, जिसके कारण वे बार-बार खराब हो जाते हैं। वहीं, पुराने तारों के कारण तकनीकी खराबियां बढ़ रही हैं और बिजली आपूर्ति बाधित होती रहती है।
AIMIM ने सांसद तारिक अनवर से अपील की है कि वे दिल्ली तक सीमित रहने के बजाय कटिहार आकर स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें। पार्टी का कहना है कि यदि सांसद जनता के बीच जाकर वास्तविक स्थिति देखेंगे, तो उन्हें समस्या की गंभीरता का बेहतर अंदाजा होगा। इसके बाद वे मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, बिजली विभाग के प्रबंध निदेशक और प्रधान सचिव से मिलकर जिले के लिए विशेष योजना की मांग कर सकते हैं।
आदिल हसन ने यह भी सुझाव दिया कि कटिहार के सभी जनप्रतिनिधियों को राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर संयुक्त प्रतिनिधिमंडल के रूप में सरकार के सामने यह मामला उठाएं, तो समाधान जल्दी निकल सकता है। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा पर राजनीति करने के बजाय सभी दलों को जनता के हित में साथ आना चाहिए।
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जिला अधिकारी को पत्र लिखकर कटिहार में लो-वोल्टेज, अपर्याप्त बिजली आपूर्ति और लगातार हो रही बिजली कटौती का संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने प्रशासन से कहा है कि बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द लोगों की समस्याओं का समाधान कराया जाए।

हालांकि AIMIM का कहना है कि केवल पत्र लिखना पर्याप्त नहीं है। पार्टी का मानना है कि सांसद को इस विषय को राज्य और केंद्र स्तर पर मजबूती से उठाना चाहिए ताकि कटिहार को अतिरिक्त संसाधन और नई बिजली परियोजनाओं का लाभ मिल सके।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि बिजली की समस्या नई नहीं है। वर्षों से लोग लो-वोल्टेज, ट्रांसफार्मर खराब होने और लंबे समय तक बिजली गुल रहने जैसी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई बार शिकायतों के बाद अस्थायी मरम्मत तो होती है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। लोगों का मानना है कि अब स्थायी समाधान के लिए व्यापक योजना की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जिले में नए सब-पावर स्टेशन बनाए जाएं, अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जाएं, पुराने तारों को बदला जाए और बिजली वितरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जाए, तो काफी हद तक इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है। साथ ही नियमित मॉनिटरिंग और समय पर रखरखाव भी बेहद जरूरी है।
फिलहाल कटिहार में बिजली संकट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। एक ओर AIMIM सांसद की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर सांसद प्रशासन के माध्यम से समस्या के समाधान की बात कर रहे हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा केवल राजनीतिक बहस तक सीमित रहता है या फिर जिले के लाखों लोगों को बिजली संकट से राहत दिलाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम भी उठाए जाते हैं।










