किशनगंज जाम: किशनगंज शहर में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या अब स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। शहर में आए दिन लगने वाले जाम को लेकर नगर परिषद अध्यक्ष इंद्रदेव पासवान ने जिला प्रशासन से ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने शहर में बढ़ते यातायात दबाव के पीछे टोटो और ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या को प्रमुख कारणों में से एक बताया है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल से किशनगंज में प्रवेश करने वाले टोटो को लेकर उन्होंने सीमा क्षेत्र में निगरानी और जांच की व्यवस्था करने की मांग की है।
इंद्रदेव पासवान का कहना है कि किशनगंज की भौगोलिक स्थिति दूसरे शहरों से अलग है। यह शहर पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है और बिहार को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। इस वजह से शहर से हर दिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। बाहरी वाहनों की आवाजाही और स्थानीय यातायात के कारण शहर की प्रमुख सड़कों पर पहले से ही काफी दबाव रहता है।

टोटो की बढ़ती संख्या से बढ़ी परेशानी
नगर परिषद अध्यक्ष के मुताबिक पिछले कुछ समय से किशनगंज शहर में टोटो और ई-रिक्शा की संख्या लगातार बढ़ी है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे टोटो की भी बताई जा रही है, जो पश्चिम बंगाल की ओर से किशनगंज में प्रवेश करते हैं।
उनका कहना है कि शहर की सड़कों और यातायात व्यवस्था की क्षमता सीमित है। ऐसे में जब बड़ी संख्या में अतिरिक्त वाहन शहर में प्रवेश करते हैं तो सड़कों पर दबाव बढ़ जाता है। इसका सीधा असर यातायात की रफ्तार पर पड़ता है और कई स्थानों पर जाम की स्थिति बन जाती है।
पासवान ने कहा कि जाम केवल वाहन चालकों की परेशानी नहीं है, बल्कि इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। बाजार, अस्पताल, स्कूल, कार्यालय और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में लोगों को अतिरिक्त समय लग सकता है। कई बार जाम की वजह से जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सीमा पर जांच की मांग
इंद्रदेव पासवान ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पश्चिम बंगाल से किशनगंज में प्रवेश करने वाले टोटो की सीमा क्षेत्र में ही निगरानी और जांच की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि बाहरी वाहनों के दस्तावेज, परमिट और अन्य जरूरी कागजात की जांच की जानी चाहिए।
नगर परिषद अध्यक्ष के मुताबिक यदि नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए बाहरी टोटो के प्रवेश और संचालन पर निगरानी रखी जाए तो शहर में अनावश्यक रूप से बढ़ रहे वाहनों के दबाव को कम किया जा सकता है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि इस मामले को केवल जाम की समस्या के तौर पर न देखा जाए, बल्कि शहर की भविष्य की यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जाए।

पहले भी प्रशासन को दी जा चुकी है जानकारी
पासवान ने बताया कि बंगाल से आने वाले टोटो को लेकर पहले भी तत्कालीन जिला पदाधिकारी को लिखित रूप से जानकारी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान पहले भी आकर्षित कराया गया था।
उनका कहना है कि समय बीतने के साथ शहर में टोटो की संख्या और बढ़ी है, इसलिए अब इस विषय पर गंभीरता से कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन से सीमा क्षेत्र में जांच व्यवस्था मजबूत करने के साथ शहर में भी टोटो के संचालन की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
किशनगंज की भौगोलिक स्थिति बनी चुनौती
किशनगंज की स्थिति ऐसी है कि यह बिहार के लिए पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। पश्चिम बंगाल की सीमा से नजदीकी के कारण दोनों राज्यों के बीच लोगों और वाहनों की आवाजाही भी होती रहती है।
नगर परिषद अध्यक्ष का कहना है कि इसी वजह से शहर में पहले से ही यातायात का दबाव अधिक है। बाहरी वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या इस दबाव को और बढ़ा सकती है। इसलिए यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर योजना बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि शहर के प्रमुख बाजार क्षेत्रों और व्यस्त सड़कों पर टोटो की अधिक संख्या होने से यातायात की गति प्रभावित होती है। यदि वाहनों की पार्किंग, संचालन और रूट को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए तो जाम की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
टोटो बिक्री केंद्रों की जांच का भी मुद्दा
इंद्रदेव पासवान ने केवल सड़क पर चलने वाले टोटो की संख्या पर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि शहर में तेजी से बढ़ रहे टोटो बिक्री केंद्रों की जांच की जरूरत पर भी जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि शहर में जगह-जगह बड़ी संख्या में टोटो बेचने वाली दुकानें और केंद्र खुल रहे हैं। संबंधित विभाग को इन प्रतिष्ठानों की जांच करनी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि वहां वाहनों की बिक्री किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
उनके अनुसार यह भी देखा जाना जरूरी है कि टोटो खरीदने और बेचने के लिए आवश्यक दस्तावेज और नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए।

नगर परिषद की भूमिका पर भी दिया स्पष्टीकरण
नगर परिषद अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि टोटो के दस्तावेज, परमिट और परिवहन संबंधी कार्रवाई नगर परिषद के सीधे अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। उन्होंने कहा कि इन मामलों की जिम्मेदारी परिवहन विभाग और संबंधित परिवहन अधिकारियों की है।
पासवान ने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर बिना पूरी जानकारी के नगर परिषद को टोटो से जुड़ी हर समस्या के लिए जिम्मेदार न ठहराया जाए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग सरकारी विभागों की जिम्मेदारियां निर्धारित हैं और उसी के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
समय रहते कदम उठाने की अपील
इंद्रदेव पासवान ने चेतावनी दी कि यदि शहर में टोटो की बढ़ती संख्या और बाहरी वाहनों की आवाजाही पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में यातायात की समस्या और गंभीर हो सकती है।
उन्होंने जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों से मिलकर कार्रवाई करने की अपील की। उनका कहना है कि केवल चालान या अस्थायी कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए वाहनों के दस्तावेज, परमिट, रूट, पार्किंग और प्रवेश व्यवस्था को लेकर स्पष्ट नीति की जरूरत है।
किशनगंज में बढ़ते जाम को लेकर अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। नगर परिषद अध्यक्ष की मांग के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाहरी टोटो की जांच, शहर में यातायात प्रबंधन और टोटो बिक्री केंद्रों की निगरानी को लेकर प्रशासन किस तरह के कदम उठाता है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभागों के समन्वय से शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिल सकेगी।










