किशनगंज विवाद: किशनगंज में ग्रामीण कार्य विभाग के कार्य प्रमंडल-1 कार्यालय में कंप्लीशन सर्टिफिकेट को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। निर्माण कार्य से जुड़े प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को लेकर कार्यपालक अभियंता और एक संवेदक के बीच तीखी बहस होने की बात सामने आई है। संवेदक ने कार्यपालक अभियंता पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और डंडा उठाकर मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों पर विभागीय अधिकारी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
मामला गुरुवार का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, संवेदक गुलाम सुब्हानी अपने निर्माण कार्य से जुड़े कंप्लीशन सर्टिफिकेट की स्थिति जानने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल-1 के कार्यालय पहुंचे थे। उनका कहना है कि उन्होंने वर्ष 2025 में संबंधित निर्माण कार्य पूरा कर लिया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद नियम के अनुसार कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए विभाग में आवेदन किया गया था।

संवेदक के मुताबिक, उन्होंने करीब दो महीने पहले कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन दिया था। उनका दावा है कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी की जा चुकी थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया था। इसी सिलसिले में वह कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार से मिलने पहुंचे थे।
संवेदक का आरोप है कि प्रमाण पत्र पर कार्यपालक अभियंता ने हस्ताक्षर तो कर दिए थे, लेकिन उस पर तारीख दर्ज नहीं की गई थी। उनका कहना है कि तारीख नहीं होने की वजह से प्रमाण पत्र की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। इसी स्थिति को लेकर उन्होंने अधिकारी से जानकारी लेने और समस्या का समाधान कराने की कोशिश की।
गुलाम सुब्हानी के अनुसार, जब उन्होंने कंप्लीशन सर्टिफिकेट में तारीख दर्ज किए जाने और प्रक्रिया आगे बढ़ाने को लेकर सवाल किया तो बातचीत के दौरान विवाद की स्थिति बन गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। संवेदक का आरोप है कि बातचीत के दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा गया।
संवेदक ने आरोप लगाया कि विवाद बढ़ने के बाद कार्यपालक अभियंता ने कथित तौर पर डंडा उठा लिया और उनकी तरफ बढ़े। इससे कार्यालय में मौजूद लोगों के बीच भी अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। हालांकि, कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने बीच-बचाव करते हुए दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को शांत कराने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि कर्मचारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला तत्काल शांत हुआ। इसके बाद संवेदक कार्यालय से बाहर चले गए। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संवेदक की ओर से लगाए गए आरोप चर्चा में हैं। वहीं, घटना को लेकर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

यह पूरा विवाद एक ऐसे दस्तावेज को लेकर सामने आया है, जो किसी निर्माण कार्य के पूरा होने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जाता है। कंप्लीशन सर्टिफिकेट निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा होता है। ऐसे में प्रमाण पत्र को लेकर किसी तरह की देरी या दस्तावेजी कमी होने पर संवेदक और विभाग के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है।
संवेदक गुलाम सुब्हानी का कहना है कि निर्माण कार्य वर्ष 2025 में ही पूरा हो चुका था और इसके बाद उन्होंने विभाग के समक्ष प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर उन्होंने कार्यालय पहुंचकर इसकी स्थिति जानने की कोशिश की। इसी दौरान कथित तौर पर विवाद बढ़ गया।
इस घटना में सबसे गंभीर आरोप डंडा उठाने को लेकर लगाया गया है। संवेदक का कहना है कि बहस के दौरान कार्यपालक अभियंता ने डंडा उठाकर उनकी तरफ बढ़ने की कोशिश की। हालांकि, मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने स्थिति को संभाल लिया और किसी तरह की बड़ी घटना होने से रोक दिया।
दूसरी ओर, इस मामले में कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच या संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मामला सामने आने के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि कंप्लीशन सर्टिफिकेट की प्रक्रिया में आखिर देरी क्यों हुई। क्या प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कोई औपचारिकता अभी बाकी थी, या फिर दस्तावेज में तारीख दर्ज नहीं होने की वजह से प्रक्रिया रुकी हुई थी? इन सवालों के जवाब विभागीय स्तर पर सामने आने बाकी हैं।
निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों में विभाग और संवेदक के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद संबंधित कागजात और प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी की जाती है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर देरी होती है तो संबंधित संवेदक को आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से संवेदक द्वारा प्रमाण पत्र की स्थिति जानने के लिए विभागीय अधिकारी से संपर्क किया गया था।
लेकिन प्रमाण पत्र से जुड़ा यह मामला बातचीत से निकलकर कथित विवाद तक पहुंच गया। संवेदक की ओर से लगाए गए आरोपों में अभद्रता और डंडा उठाने की बात कही गई है। फिलहाल इस मामले में किसी आधिकारिक कार्रवाई या जांच के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह देखता है। क्या कार्यालय में हुए विवाद की जांच कराई जाएगी? क्या दोनों पक्षों से घटना को लेकर जानकारी ली जाएगी? और कंप्लीशन सर्टिफिकेट को लेकर जो मूल विवाद था, उसका समाधान कब तक होता है? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आ सकते हैं।
फिलहाल किशनगंज के ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल-1 कार्यालय में हुआ यह विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ संवेदक ने अधिकारी पर अभद्रता और डंडा उठाकर मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ अधिकारी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के लिए विभागीय जांच और संबंधित पक्षों के बयान का इंतजार करना होगा।
कुल मिलाकर, निर्माण कार्य के कंप्लीशन सर्टिफिकेट से शुरू हुआ विवाद अब आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। संवेदक ने जहां प्रमाण पत्र में तारीख नहीं होने को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं इसी मुद्दे पर कार्यालय में कथित तौर पर तीखी बहस हुई। कर्मचारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई। अब इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और कंप्लीशन सर्टिफिकेट को लेकर लंबित प्रक्रिया कब पूरी होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।










