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कटिहार CO विवाद: कटिहार में CO पर कार्रवाई की तैयारी, जांच में पहली नजर में झड़प शुरू करने का आरोप; 24 घंटे में जवाब तलब

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कटिहार CO विवाद: कटिहार सदर अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी यानी CO और प्रधान सहायक के बीच हुई मारपीट के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की जांच के बाद अब अंचलाधिकारी सोनू भगत को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने CO से 24 घंटे के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है। प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई जांच रिपोर्ट और कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर की गई है।

मामला 28 अगस्त का है। कटिहार सदर अंचल कार्यालय में उस दिन करीब 11 बजकर 15 मिनट पर कार्यालयी कामकाज को लेकर अंचलाधिकारी सोनू भगत और प्रधान सहायक संजय वर्मा के बीच विवाद शुरू हुआ था। बताया गया कि शुरुआत में दोनों के बीच कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही देर में विवाद बढ़ गया और मामला कथित तौर पर शारीरिक झड़प तक पहुंच गया।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। सरकारी कार्यालय के भीतर अधिकारी और कर्मचारी के बीच इस तरह की घटना को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की।

कटिहार CO विवाद
कटिहार CO विवाद

जांच टीम ने घटनास्थल से जुड़े लोगों से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। इसके अलावा अंचल कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी खंगाला गया। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और शारीरिक झड़प की शुरुआत किस पक्ष की तरफ से हुई।

जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर 31 अगस्त को जिलाधिकारी को सौंप दी। रिपोर्ट में गवाहों के बयानों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना का प्रारंभिक आकलन किया गया। प्रशासन के मुताबिक, जांच में प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि शारीरिक झड़प की शुरुआत अंचलाधिकारी सोनू भगत की तरफ से होती हुई दिखाई देती है।

यानी जांच रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि विवाद के दौरान पहले शारीरिक रूप से आगे बढ़ने की स्थिति CO की तरफ से बनी। हालांकि, यह जांच का प्रथम दृष्टया निष्कर्ष है और पूरे मामले में अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई CO के स्पष्टीकरण और आगे की प्रक्रिया के बाद तय की जाएगी।

जांच रिपोर्ट में कार्यालय परिसर में हुई इस घटना को प्रशासनिक अनुशासन और सरकारी कार्यालय की गरिमा के विपरीत माना गया है। सरकारी कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि किसी भी तरह के मतभेद या विवाद को निर्धारित प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से सुलझाया जाए।

इसी आधार पर जिलाधिकारी की ओर से अंचलाधिकारी सोनू भगत को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन के मुताबिक, अंचलाधिकारी कार्यालय के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं और उनके ऊपर कार्यालय में अनुशासन बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

कटिहार CO विवाद
कटिहार CO विवाद

नोटिस में यह भी कहा गया है कि अंचलाधिकारी को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण रखना चाहिए। यदि कार्यालय में किसी कर्मचारी के साथ कामकाज को लेकर विवाद की स्थिति पैदा होती है, तो उसे बातचीत, विभागीय प्रक्रिया और नियमों के अनुसार सुलझाया जाना चाहिए। प्रशासन का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में कार्यालय का माहौल इस स्तर तक नहीं पहुंचना चाहिए कि विवाद शारीरिक झड़प में बदल जाए।

28 अगस्त की घटना के बाद से ही यह मामला प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में था। घटना के तुरंत बाद जांच शुरू की गई और उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया गया। मौके पर मौजूद लोगों के बयान लिए गए और सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई। इन सभी पहलुओं को देखने के बाद जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी।

सीसीटीवी फुटेज इस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। कार्यालय में लगे कैमरों से घटना के दौरान की गतिविधियों को समझने की कोशिश की गई। इसके साथ ही वहां मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। दोनों तरह के साक्ष्यों की समीक्षा के बाद जांच टीम ने प्रथम दृष्टया अपनी रिपोर्ट तैयार की।

अब प्रशासन ने CO को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। कारण बताओ नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। यानी अब अंचलाधिकारी सोनू भगत को यह बताना होगा कि जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और उन पर लगाए गए आरोपों के संबंध में उनका पक्ष क्या है।

स्पष्टीकरण मिलने के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा। यह कार्रवाई किस स्तर की होगी, यह CO के जवाब और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से अंतिम कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि विवाद किसी बाहरी व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालय में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी के बीच हुआ। ऐसे में घटना को प्रशासनिक अनुशासन के नजरिए से भी गंभीर माना जा रहा है।

सरकारी कार्यालय आम लोगों के कामकाज से सीधे जुड़े होते हैं। यहां अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच समन्वय और अनुशासन का होना जरूरी माना जाता है, ताकि आम लोगों को अपने काम के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े। ऐसे में कार्यालय के भीतर अधिकारी और कर्मचारी के बीच कथित मारपीट की घटना प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बन जाती है।

जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया CO की तरफ से झड़प शुरू होने की बात सामने आने के बाद अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है। हालांकि, CO को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामले में अंतिम तौर पर क्या निर्णय लिया जाएगा।

कटिहार CO विवाद
कटिहार CO विवाद

दूसरी तरफ, प्रधान सहायक संजय वर्मा और अंचलाधिकारी सोनू भगत के बीच विवाद की मूल वजह कार्यालयी कामकाज से जुड़ी बताई गई है। आखिर किस मुद्दे पर दोनों के बीच कहासुनी हुई और बातचीत किस तरह विवाद में बदल गई, इसकी विस्तृत जानकारी जांच प्रक्रिया के दौरान सामने आ सकती है।

प्रशासन की कार्रवाई से यह भी स्पष्ट है कि सरकारी कार्यालय में अनुशासन और अधिकारियों की जिम्मेदारी को गंभीरता से लिया जा रहा है। अंचलाधिकारी जैसे पद पर बैठे अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह कर्मचारियों के साथ समन्वय बनाए रखें और किसी भी विवाद की स्थिति को नियंत्रित करें।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि CO सोनू भगत अपने स्पष्टीकरण में क्या जवाब देते हैं। क्या वह जांच रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों पर अपनी सफाई देंगे? क्या घटना के दौरान की परिस्थितियों का कोई अलग पक्ष सामने रखेंगे? इन सवालों का जवाब उनके स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल कटिहार सदर अंचल कार्यालय में हुई कथित मारपीट के मामले में प्रशासन ने पहला बड़ा कदम उठाते हुए CO को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। जांच रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर प्रथम दृष्टया झड़प की शुरुआत CO की तरफ से होने की बात कही गई है। अब 24 घंटे के भीतर मांगे गए जवाब के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई तय करेगा।

कुल मिलाकर, 28 अगस्त को शुरू हुआ यह विवाद अब विभागीय कार्रवाई के चरण में पहुंच गया है। जांच टीम की रिपोर्ट 31 अगस्त को जिलाधिकारी को सौंपी जा चुकी है और उसके आधार पर CO से जवाब मांगा गया है। आने वाले समय में उनके स्पष्टीकरण के बाद ही यह साफ होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या अंतिम निर्णय लेता है।

 

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