बिहार शिक्षक दिवस प्रदर्शन: नमस्कार, आपका स्वागत है। बिहार में शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की मांगों को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। राजधानी पटना में कांग्रेस की ओर से ‘कफन पदयात्रा’ निकाली गई। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं के साथ बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में कटोरा लेकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताया और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की मांग की।
कांग्रेस ने इस पदयात्रा को गांधी मैदान से शुरू कर विधानसभा तक ले जाने की योजना बनाई थी। लेकिन पदयात्रा विधानसभा की ओर बढ़ती, उससे पहले ही पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
प्रदर्शन में शामिल कई शिक्षक फटे कपड़े पहनकर पहुंचे थे। उनके हाथों में कटोरे थे और वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। शिक्षकों का कहना था कि लंबे समय से वे अपनी मांगों को सरकार के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। इसी विरोध को प्रतीकात्मक रूप देने के लिए प्रदर्शनकारियों ने कटोरा लेकर सरकार से अपनी मांगों पर ध्यान देने की अपील की।
इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने गले में सफेद कपड़ा भी लपेट रखा था। प्रदर्शनकारी इसे प्रतीकात्मक ‘कफन’ बता रहे थे। कांग्रेस का कहना था कि जो शिक्षक पूरी जिंदगी बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में लगा देते हैं, अगर उन्हीं के भविष्य की कोई स्पष्ट गारंटी नहीं हो तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए जेपी गोलंबर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया था। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन भी बुलाया गया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी।
जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की तो पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। कई कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों को पुलिस अपने साथ ले गई। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मी पकड़कर और उठाकर मौके से हटाते हुए भी नजर आए।
कांग्रेस की ओर से इस प्रदर्शन को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि शिक्षकों की समस्याओं को सामने लाने का माध्यम बताया गया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि ‘कफन पदयात्रा’ का उद्देश्य समाज और सरकार को यह संदेश देना है कि शिक्षक पूरी जिंदगी विद्यार्थियों का भविष्य बनाने में लगा देता है, लेकिन आज उसके अपने भविष्य की कोई गारंटी नहीं है।
राजेश राम ने बिहार की वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि राज्य में यह व्यवस्था चार दशक से भी ज्यादा समय से चली आ रही है। वर्ष 1982 से चली आ रही इस व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज अस्तित्व में आए, लेकिन इन संस्थानों में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था अब तक स्थायी नहीं हो सकी है।

कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षकों और कर्मचारियों को लंबे समय से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है कि शिक्षकों को सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य मिले। इसी मुद्दे को लेकर शिक्षक दिवस के दिन कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ यह अनोखा प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों के हाथ में मौजूद कटोरा भी इस आंदोलन का प्रमुख प्रतीक बना। शिक्षक कटोरा लेकर सरकार और पुलिस के सामने खड़े दिखाई दिए। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि शिक्षकों की स्थिति को समझाने के लिए इस तरह का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया है। उनका संदेश था कि जो शिक्षक समाज को शिक्षित करने का काम करते हैं, उन्हें अपनी बुनियादी मांगों के लिए इस तरह प्रदर्शन करने की स्थिति में नहीं होना चाहिए।
वहीं, पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की तरफ जाने से रोक दिया गया। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रदर्शन निर्धारित क्षेत्र से आगे न बढ़े और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे। लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ने पर अड़े रहे। इसी दौरान बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की गई और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
कांग्रेस ने सरकार को आगे भी आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। पार्टी का कहना है कि अगर 5 सितंबर तक शिक्षकों की मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है, तो 6 सितंबर से ‘शिक्षा सत्याग्रह’ अभियान शुरू किया जाएगा।

कांग्रेस के मुताबिक यह आंदोलन पटना के गर्दनीबाग में शुरू किया जाएगा और इसे अनिश्चितकाल तक जारी रखने की योजना है। पार्टी का कहना है कि जब तक सरकार शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक और ठोस फैसला नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इसके साथ ही कांग्रेस राज्यभर में हस्ताक्षर अभियान चलाने की भी बात कह रही है। इस अभियान के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को शिक्षकों की मांगों से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। कांग्रेस का दावा है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दे केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा असर छात्रों और उनके भविष्य पर भी पड़ता है।
शिक्षक दिवस के दिन हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर बिहार की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की सेवा शर्तों से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ शिक्षक दिवस पर देशभर में शिक्षकों के योगदान और सम्मान की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ पटना में शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए।

‘कफन पदयात्रा’ के जरिए कांग्रेस ने सरकार के सामने शिक्षकों की समस्याओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और कांग्रेस के प्रस्तावित ‘शिक्षा सत्याग्रह’ का आगे क्या स्वरूप होता है।
फिलहाल पटना में शिक्षक दिवस के दिन हुआ यह प्रदर्शन बिहार की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान कर दिया है, जबकि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नेताओं और शिक्षकों के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है।











