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अररिया सदर अस्पताल: अररिया सदर अस्पताल में बढ़ी सर्जरी की सुविधा, तीन महीने में दोगुने हुए ऑपरेशन

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अररिया सदर अस्पताल: अररिया जिले के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक राहत भरी खबर सामने आई है। अररिया सदर अस्पताल में अब पहले की तुलना में ज्यादा सर्जरी और बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हो रही है। अस्पताल में ऑपरेशन की बढ़ती संख्या इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश कर रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जून महीने में जहां सदर अस्पताल में 263 ऑपरेशन किए गए थे, वहीं अगस्त में यह संख्या बढ़कर 528 तक पहुंच गई। यानी महज तीन महीने के भीतर अस्पताल में होने वाली सर्जरी की संख्या करीब दोगुनी हो गई है।

इस बढ़ोतरी को जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिला स्तर पर ही मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ अलग-अलग विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसका फायदा अब मरीजों को सीधे तौर पर मिल रहा है।

पहले जिन मरीजों को मामूली या सामान्य सर्जरी के लिए भी दूसरे शहरों या बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था, उनमें से कई का इलाज अब अररिया सदर अस्पताल में ही संभव हो रहा है। खास तौर पर ईएनटी और ऑर्थोपेडिक जैसी सेवाओं के मजबूत होने से अस्पताल में इलाज का दायरा बढ़ा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को दूसरे शहरों की दौड़ लगाने से राहत मिल रही है।

अगर अस्पताल में पिछले तीन महीनों के आंकड़ों को देखें तो इसमें लगातार सुधार नजर आता है। जून में छह तरह की सर्जरी के तहत कुल 263 ऑपरेशन किए गए थे। इसके बाद जुलाई में सर्जरी की संख्या बढ़ी और आठ अलग-अलग प्रकार की सर्जरी के तहत 423 ऑपरेशन किए गए। अगस्त में अस्पताल की सर्जिकल सेवाओं का दायरा और ज्यादा बढ़ गया। इस महीने करीब 25 प्रकार की सर्जरी की गईं और कुल 528 मरीजों के ऑपरेशन हुए।

अररिया सदर अस्पताल
अररिया सदर अस्पताल

यानी सिर्फ ऑपरेशन की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि सर्जरी की श्रेणियों में भी बड़ा विस्तार हुआ है। जून में जहां छह तरह की सर्जरी हो रही थीं, वहीं अगस्त तक यह संख्या बढ़कर 25 प्रकार तक पहुंच गई। यह बदलाव बताता है कि अस्पताल में अब पहले की तुलना में ज्यादा तरह के मामलों का इलाज करने की क्षमता विकसित हो रही है।

अस्पताल में कान से जुड़ी सर्जरी, सिजेरियन और हाइड्रोसील जैसी प्रक्रियाएं भी की जा रही हैं। इसके अलावा जरूरत के मुताबिक अन्य सर्जरी की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे उन मरीजों को खास फायदा हो रहा है, जिन्हें पहले इलाज के लिए पूर्णिया, भागलपुर, कटिहार या दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि गंभीर मरीजों के मामले में अस्पताल में सबसे पहले जरूरी प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और मरीज की स्थिति को स्थिर करने पर ध्यान दिया जाता है। इसके बाद ही आवश्यकता के अनुसार मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर किया जाता है।

इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण फायदा यह है कि हर गंभीर मरीज को तुरंत दूसरे अस्पताल भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। पहले स्थानीय स्तर पर उसकी स्थिति का आकलन किया जाता है। जरूरी उपचार दिया जाता है और डॉक्टर यह तय करते हैं कि मरीज का इलाज सदर अस्पताल में संभव है या उसे उच्च स्वास्थ्य केंद्र की जरूरत है।

अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर और अन्य जरूरी संसाधनों को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार का उद्देश्य यही है कि जिले के अधिक से अधिक मरीजों को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके।

अररिया सदर अस्पताल
अररिया सदर अस्पताल

सर्जरी की संख्या बढ़ने का सीधा असर मरीजों और उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है। किसी मरीज को अगर ऑपरेशन के लिए दूसरे शहर जाना पड़े तो सिर्फ इलाज का खर्च ही नहीं बढ़ता, बल्कि आने-जाने, रहने, खाने और अन्य जरूरी खर्च भी परिवार पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। कई बार मरीज के साथ एक से ज्यादा परिजन भी बाहर जाते हैं। ऐसे में स्थानीय अस्पताल में इलाज मिलना परिवार के लिए बड़ी राहत बन जाता है।

खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। अगर ऑपरेशन और जरूरी इलाज जिला मुख्यालय के अस्पताल में ही उपलब्ध हो जाए तो मरीज को निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों पर निर्भर रहने की जरूरत कम पड़ती है। इससे इलाज का खर्च और परिवार की भागदौड़ दोनों कम हो सकते हैं।

अररिया जैसे जिले में स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत होना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। बेहतर डॉक्टर, विशेषज्ञ सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर और जरूरी संसाधन उपलब्ध होने से सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा भी बढ़ सकता है।

सर्जरी के आंकड़े भी इसी बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। जून में 263 ऑपरेशन से शुरुआत हुई, जुलाई में यह संख्या बढ़कर 423 हुई और अगस्त में 528 तक पहुंच गई। अगर जून और अगस्त के आंकड़ों की तुलना करें तो तीन महीने में ऑपरेशन की संख्या में 265 का इजाफा हुआ है। यह करीब दोगुनी वृद्धि है।

अररिया सदर अस्पताल
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हालांकि, सिर्फ ऑपरेशन की संख्या बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है। अस्पताल में मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए डॉक्टरों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, दवाओं, उपकरणों, साफ-सफाई और ऑपरेशन के बाद मरीजों की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत करना होगा।

अस्पताल प्रशासन की ओर से भी संसाधनों को बेहतर बनाने की कोशिश जारी रहने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले समय में अगर सर्जरी की सुविधाओं का और विस्तार होता है तो स्थानीय मरीजों को और ज्यादा लाभ मिल सकता है।

अररिया सदर अस्पताल में सर्जरी की बढ़ती संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के बदलते स्वरूप की तस्वीर भी पेश करती है। जून में छह प्रकार की सर्जरी से शुरू होकर अगस्त में 25 प्रकार की सर्जरी तक पहुंचना अस्पताल की क्षमता में हुए विस्तार को दर्शाता है।

अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि यह सुधार लगातार जारी रहे। मरीजों को समय पर इलाज मिले, अनावश्यक रेफरल कम हों और गंभीर मामलों में भी जरूरत के मुताबिक तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। अगर अस्पताल में विशेषज्ञ सेवाएं, संसाधन और ऑपरेशन की सुविधाएं इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में अररिया के लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।

कुल मिलाकर अररिया सदर अस्पताल से सामने आए ये आंकड़े जिले के मरीजों के लिए राहत की तस्वीर पेश करते हैं। ऑपरेशन की संख्या में लगातार बढ़ोतरी और सर्जरी के प्रकारों में विस्तार से साफ है कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में काम हो रहा है। अब जरूरत है कि इस व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए, ताकि जिले के हर जरूरतमंद मरीज को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।

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