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रेल लाइन सुरक्षा: अररिया-गलगलिया रेल लाइन पर पहली बारिश में मिट्टी धंसी, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

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रेल लाइन सुरक्षा: अररिया जिले से रेल परियोजना की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन पर पहली बारिश के बाद ही मिट्टी के कटाव और पुल के आसपास बने रेन कट की तस्वीरें सामने आई हैं। मामला अररिया-कटिहार रेलखंड पर अररिया कोर्ट के हृदयपुर वार्ड नंबर 7 में बीआर-5 पुल के पास का बताया जा रहा है। यहां पुल के एंबैंकमेंट और सपोर्टिंग हिस्से के आसपास मिट्टी बहने से पटरी के नजदीक गहरे कटाव दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जगह मिट्टी का कटाव हुआ है, वह रेल पटरी के काफी करीब है। बताया जा रहा है कि पटरी से करीब दो हाथ की दूरी पर मिट्टी खिसक गई है। ऐसे में लोगों के बीच रेल लाइन की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि रेलवे प्रशासन जल्द से जल्द मौके का निरीक्षण करे और जिस हिस्से में कटाव हुआ है, वहां जरूरी मरम्मत कराई जाए।

दरअसल, बारिश के मौसम में रेल लाइनों और पुलों के आसपास मिट्टी का कटाव एक महत्वपूर्ण विषय होता है। रेलवे ट्रैक जिस एंबैंकमेंट पर बिछाया जाता है, उसकी स्थिरता काफी हद तक मिट्टी और जल निकासी की व्यवस्था पर निर्भर करती है। अगर लगातार बारिश के कारण मिट्टी बहती रहे तो ट्रैक के आसपास की जमीन कमजोर हो सकती है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक खतरे की स्थिति क्या है और निर्माण में किसी तरह की तकनीकी कमी है या नहीं, इसकी पुष्टि विशेषज्ञों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

रेल लाइन सुरक्षा
रेल लाइन सुरक्षा

मौके पर सामने आई तस्वीरों के अनुसार पुल के आसपास बारिश के पानी से मिट्टी बहने के निशान दिखाई दे रहे हैं। कुछ जगहों पर गहरे रेन कट बनने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के कैपलिंग हिस्से में भी दरारें नजर आ रही हैं। इन दावों की तकनीकी पुष्टि अभी संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो पाएगी।

सबसे बड़ा सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण रेल परियोजना है। अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन परियोजना की लागत करीब 4,410 करोड़ रुपये बताई जा रही है। निर्माण कार्य पूरा हुए अभी लगभग एक साल ही हुआ है। ऐसे में सामान्य बारिश के बाद ही एंबैंकमेंट के आसपास मिट्टी कटने की शिकायत सामने आने से स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं।

स्थानीय निवासी अमित साह और भूपेन यादव ने मांग की है कि रेलवे के संबंधित अधिकारी जल्द से जल्द मौके पर पहुंचें और स्थिति का जायजा लें। उनका कहना है कि रेल पटरी के बिल्कुल नजदीक मिट्टी का कटाव होने की शिकायत को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। अगर समय रहते इसकी जांच और मरम्मत नहीं की गई तो आने वाले दिनों में बारिश बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो सकती है।

स्थानीय लोगों की चिंता सिर्फ मिट्टी के कटाव तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि पुल के आसपास अगर लगातार पानी जमा होता रहा और मिट्टी बहती रही तो एंबैंकमेंट की स्थिति पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि लोग रेलवे प्रशासन से तत्काल निरीक्षण की मांग कर रहे हैं।

रेल लाइन सुरक्षा
रेल लाइन सुरक्षा

वार्ड नंबर 7 के पार्षद श्याम कुमार मंडल ने भी इस मामले में रेलवे प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के कारण हुए कटाव की वजह से अगर रेल लाइन की सुरक्षा प्रभावित होने की कोई संभावना है तो अधिकारियों को बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर जांच करनी चाहिए।

रेल परियोजनाओं में पुल और एंबैंकमेंट के आसपास जल निकासी की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। बारिश के पानी को नियंत्रित तरीके से बाहर निकालना जरूरी होता है, ताकि पानी मिट्टी को काटकर कमजोर न करे। अगर किसी हिस्से में पानी का बहाव लगातार एक ही दिशा में होता है तो वहां रेन कट बनने की संभावना बढ़ सकती है।

इसी वजह से ऐसे मामलों में सिर्फ ऊपर से मिट्टी भर देना पर्याप्त नहीं माना जाता। संबंधित इंजीनियरों को यह देखना होता है कि कटाव किस कारण से हुआ, पानी का बहाव किस दिशा में है, एंबैंकमेंट की मिट्टी की स्थिति कैसी है और भविष्य में दोबारा कटाव रोकने के लिए किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

इस मामले में भी तकनीकी जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी स्थानीय स्तर पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रेलवे के इंजीनियरों और संबंधित तकनीकी टीम द्वारा मौके का निरीक्षण जरूरी होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मिट्टी का कटाव सामान्य बारिश की वजह से हुआ है या इसके पीछे ड्रेनेज, मिट्टी की मजबूती अथवा निर्माण से जुड़ा कोई तकनीकी कारण है।

रेलवे लाइन की सुरक्षा को देखते हुए बारिश के मौसम में ऐसे स्थानों की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर नए बने पुलों, एंबैंकमेंट और संवेदनशील हिस्सों पर लगातार निरीक्षण किया जाना जरूरी होता है। अगर किसी जगह पर मिट्टी बहने या दरार जैसी समस्या दिखाई देती है तो उसे शुरुआती स्तर पर ही ठीक कर देना ज्यादा सुरक्षित होता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अगर अभी से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर दी जाती है और पानी की निकासी की उचित व्यवस्था कर दी जाती है तो आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। वहीं अगर समस्या को नजरअंदाज किया गया तो लगातार बारिश की स्थिति में कटाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

रेल लाइन सुरक्षा
रेल लाइन सुरक्षा

इस पूरे मामले ने एक और सवाल खड़ा किया है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई रेल परियोजनाओं में निर्माण के बाद निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। किसी भी नई रेल लाइन की सफलता सिर्फ उसके निर्माण और उद्घाटन तक सीमित नहीं होती। उसके बाद भी ट्रैक, पुल, एंबैंकमेंट और जल निकासी व्यवस्था की नियमित जांच जरूरी होती है।

अररिया-गलगलिया रेल लाइन क्षेत्र के लिए परिवहन और कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना मानी जाती है। ऐसे में इसके किसी हिस्से में बारिश के बाद सामने आई समस्या को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता स्वाभाविक है। लोगों को उम्मीद है कि रेलवे प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द तकनीकी टीम भेजेगा।

अब सबसे ज्यादा नजर रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। क्या अधिकारी मौके पर पहुंचकर कटाव की स्थिति की जांच करेंगे? क्या पुल के आसपास दिखाई दे रही दरारों और मिट्टी के खिसकने की तकनीकी जांच होगी? और सबसे अहम सवाल यह है कि अगर निर्माण या जल निकासी व्यवस्था में कोई कमी पाई जाती है तो उसे कितनी जल्दी दूर किया जाएगा?

फिलहाल इतना साफ है कि अररिया-कटिहार रेलखंड के हृदयपुर वार्ड नंबर 7 में बीआर-5 पुल के पास बारिश के बाद मिट्टी के कटाव ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 4,410 करोड़ रुपये की परियोजना के हिस्से में सामने आई इस समस्या की वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

रेल यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसलिए जरूरी है कि संबंधित अधिकारी समय रहते मौके का निरीक्षण करें, समस्या के कारणों की पहचान करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल मरम्मत कराएं। बारिश का मौसम अभी जारी है, ऐसे में इस हिस्से की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ क्षेत्र के यात्रियों की नजर रेलवे प्रशासन पर है। सवाल सिर्फ मिट्टी के कटाव का नहीं, बल्कि नई रेल लाइन की सुरक्षा और उसकी दीर्घकालिक मजबूती का भी है। आने वाले दिनों में तकनीकी जांच से ही यह साफ होगा कि यह बारिश से हुआ सामान्य कटाव है या इसके पीछे कोई बड़ी तकनीकी खामी मौजूद है।

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