बैद्यनाथ महतो हत्याकांड: सीतामढ़ी में शनिवार सुबह हुई जिला परिषद प्रतिनिधि बैद्यनाथ महतो की हत्या के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। मॉर्निंग वॉक पर निकले बैद्यनाथ महतो को बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोली मार दी। गोलीबारी इतनी खतरनाक थी कि उन्हें करीब 8 गोलियां लगीं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना डुमरा थाना क्षेत्र के केथरिया-रामपट्टी चौक के पास पथरिया श्मशान के नजदीक हुई।
बैद्यनाथ महतो वार्ड संख्या 13 की जिला परिषद सदस्य दिलखुश देवी के पति थे। सुबह के समय हुई इस वारदात के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की। वहीं, दूसरी तरफ हत्या की खबर फैलते ही ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता चला गया।

मॉर्निंग वॉक के दौरान बदमाशों ने बनाया निशाना
स्थानीय लोगों के मुताबिक, बैद्यनाथ महतो रोज की तरह शनिवार सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए घर से निकले थे। वह केथरिया-रामपट्टी चौक के पास पथरिया श्मशान के नजदीक पहुंचे ही थे कि बदमाशों ने उन्हें घेर लिया।
बताया जा रहा है कि हमलावरों ने बैद्यनाथ महतो को निशाना बनाकर लगातार फायरिंग की। गोलियां लगने के बाद वह गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर गिर पड़े। हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद वहां से फरार हो गए।
गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। जब तक लोग कुछ समझ पाते, बैद्यनाथ महतो की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
शराब कारोबार के विरोध को लेकर विवाद का आरोप
इस हत्याकांड में गांव के ही त्रिभुवन कुशवाहा उर्फ एजाज का नाम सामने आ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजाज गांव में शराब की सप्लाई करता था और बैद्यनाथ महतो इसका विरोध करते थे।
ग्रामीणों के मुताबिक, शराब के कथित कारोबार को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को हत्या की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने अभी हत्या की अंतिम वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पुलिस हत्या में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वारदात में कितने लोग शामिल थे और हमलावरों ने किस योजना के तहत बैद्यनाथ महतो को निशाना बनाया।

हत्या के बाद भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
बैद्यनाथ महतो की हत्या की खबर जैसे-जैसे आसपास के गांवों में पहुंची, लोगों का आक्रोश बढ़ता गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल के आसपास जमा हो गए।
आक्रोशित भीड़ ने कथित आरोपी के घर पर हमला कर दिया और उसमें आग लगा दी। इसके बाद स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। पुलिस को हालात संभालने के लिए अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए करीब 12 थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। एसपी और एसडीएम भी घटनास्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया।
प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही थी, लेकिन आक्रोशित भीड़ काफी देर तक शांत नहीं हुई।
पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़, पथराव में दो इंस्पेक्टर घायल
हंगामे के दौरान स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन की गाड़ियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। बताया गया है कि भीड़ ने करीब 8 वाहनों में तोड़फोड़ की।
इसके साथ ही पुलिस टीम पर पथराव भी किया गया। पथराव में इंस्पेक्टर अनिल राम और इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार के सिर में चोट लगी। दोनों पुलिस अधिकारियों को चोट लगने के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
बताया जा रहा है कि दो दरोगाओं को भी ग्रामीणों ने मौके से खदेड़ दिया। पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनाव बढ़ने के बाद इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई।
प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी स्थिति में हिंसा दोबारा न भड़के और इलाके में कानून-व्यवस्था बनी रहे।

थानाध्यक्ष मुकेश कुमार सस्पेंड
हत्याकांड के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे। मृतक के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि घटना से पहले भी इलाके में फायरिंग की शिकायत पुलिस से की गई थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
परिवार का आरोप है कि अगर पुलिस ने पहले मिली शिकायतों को गंभीरता से लिया होता तो शायद शनिवार सुबह हुई हत्या को रोका जा सकता था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने डुमरा थानाध्यक्ष मुकेश कुमार को सस्पेंड कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है।
अब पुलिस इस बात की भी जांच करेगी कि पहले मिली शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई थी और यदि कोई लापरवाही हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी।
पुरानी शिकायतों की भी जांच होगी
पुलिस अब सिर्फ हत्या की घटना की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे पहले हुए विवाद और कथित फायरिंग की घटनाओं को भी जांच के दायरे में शामिल किया जा रहा है।
परिवार और ग्रामीणों के आरोपों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या बैद्यनाथ महतो को पहले से किसी तरह का खतरा था। अगर उन्हें धमकी दी गई थी या पहले फायरिंग हुई थी तो उस मामले में पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी, इसकी भी समीक्षा की जाएगी।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि हत्या के पीछे सिर्फ शराब के कथित कारोबार का विरोध था या इसके पीछे कोई अन्य वजह भी थी।
आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश देने की तैयारी कर रही है। साथ ही घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमलावर किस वाहन से आए थे और घटना के बाद किस रास्ते से फरार हुए। आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।
पुलिस हत्या में इस्तेमाल हथियार, हमलावरों की संख्या और वारदात से पहले तथा बाद की गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी है।
इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
हत्याकांड के बाद पैदा हुए तनाव को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों की कोशिश है कि हत्या के बाद किसी तरह की दोबारा हिंसा न हो।
प्रशासन की ओर से ग्रामीणों से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हत्या के आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, बैद्यनाथ महतो के परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन हत्या के आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हत्या से लेकर पुलिस कार्रवाई तक कई सवाल
सीतामढ़ी का यह मामला सिर्फ एक हत्या तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ जिला परिषद सदस्य के पति की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या हुई, तो दूसरी तरफ इसके बाद भड़के आक्रोश में पुलिस टीम पर पथराव और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि बैद्यनाथ महतो की हत्या की असली वजह क्या थी? क्या शराब के कथित कारोबार का विरोध ही हत्या की वजह बना या इसके पीछे कोई और विवाद था? क्या हत्या की पहले से साजिश रची गई थी? और अगर परिवार की शिकायत के मुताबिक पहले भी फायरिंग हुई थी, तो उस समय पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी?
इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता आरोपियों को गिरफ्तार करना, हत्या की पूरी साजिश का पता लगाना और इलाके में कानून-व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना है। वहीं, थानाध्यक्ष के निलंबन के बाद पुलिस की पिछली कार्रवाई की भी जांच शुरू हो गई है।
सीतामढ़ी में बैद्यनाथ महतो की हत्या के बाद जिस तरह से हिंसा और विरोध की स्थिति बनी, उसने पुलिस-प्रशासन के सामने भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस जांच के अगले खुलासे पर टिकी हैं।










