बेखौफ जुबां बे बाक अंदाज

मनरेगा घोटाला: किशनगंज में मनरेगा सड़क योजना में गड़बड़ी का आरोप, फर्जी मास्टर रोल से राशि निकासी का दावा; वार्ड सदस्य ने मांगी जांच

Share Now :

WhatsApp

मनरेगा घोटाला: किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की चिल्हनियां पंचायत में मनरेगा योजना को लेकर वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। वार्ड नंबर 11 की वार्ड सदस्य सोनी देवी ने मनरेगा योजना में बिना काम किए फर्जी मास्टर रोल तैयार कर सरकारी राशि की निकासी किए जाने का दावा किया है। इस मामले को लेकर उन्होंने मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वार्ड सदस्य की शिकायत के बाद अब इस मामले में विभागीय जांच की बात कही जा रही है। मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी बिपिन कुमार ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि आवेदन में लगाए गए आरोपों के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में अगर किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है और आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

मनरेगा घोटाला
मनरेगा घोटाला

दरअसल, पूरा मामला चिल्हनियां पंचायत में मनरेगा के तहत प्रस्तावित सड़क निर्माण योजना से जुड़ा हुआ है। वार्ड सदस्य सोनी देवी के आवेदन के अनुसार, सुहिया मुख्य सड़क से रंजीत के खेत तक सड़क निर्माण के लिए मनरेगा के तहत योजना स्वीकृत की गई थी। इस योजना के लिए कुल 8 लाख 23 हजार 749 रुपये की राशि मंजूर की गई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस सड़क निर्माण के लिए यह राशि स्वीकृत की गई थी, मौके पर उस तरह का काम नहीं हुआ। इसके बावजूद कथित तौर पर फर्जी मास्टर रोल तैयार किया गया और मजदूरों के नाम पर राशि की निकासी कर ली गई। वार्ड सदस्य का दावा है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से 1 लाख 48 हजार 920 रुपये की राशि निकाली गई।

वार्ड सदस्य ने इस निकासी को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि योजना स्थल पर काम किए बिना ही मजदूरों की हाजिरी और मास्टर रोल तैयार कर सरकारी राशि निकाल ली गई है, तो इसकी जांच जरूरी है।

मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ गांवों में बुनियादी विकास से जुड़े कार्य कराना है। सड़क निर्माण, जल संरक्षण, तालाब, नाला, मिट्टी भराई और अन्य ग्रामीण विकास कार्यों के माध्यम से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में किसी योजना में बिना काम किए राशि की निकासी के आरोप लगने से योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

वार्ड सदस्य सोनी देवी ने अपनी शिकायत में एक अन्य मनरेगा योजना का भी जिक्र किया है। उनका दावा है कि करीब एक साल पहले उन्होंने एक योजना का काम पूरा कराया था, लेकिन उस काम में लगे मजदूरों को अब तक भुगतान नहीं किया गया है।

मनरेगा घोटाला
मनरेगा घोटाला

शिकायत के मुताबिक, योजना संख्या 0542001/FP/20435373 में भी कथित तौर पर अनियमितता हुई है। वार्ड सदस्य ने आरोप लगाया है कि पंचायत रोजगार सेवक रविंद्र कुमार की ओर से बिना काम किए फर्जी मास्टर रोल तैयार कर राशि निकालने की शिकायत है।

हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि पूरे मामले में विभागीय जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं, संबंधित योजना में वास्तविक रूप से कितना काम हुआ है और सरकारी राशि की निकासी किस प्रक्रिया के तहत की गई।

वार्ड सदस्य का कहना है कि मनरेगा की योजनाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन योजनाओं के जरिए बड़ी संख्या में मजदूरों को रोजगार मिलता है। अगर किसी योजना में वास्तविक काम किए बिना मजदूरों के नाम पर राशि निकाली जाती है, तो इसका सीधा असर सरकारी योजना और ग्रामीण मजदूरों दोनों पर पड़ता है।

शिकायत में योजना स्थल की जांच कराने, स्वीकृत राशि और खर्च की गई राशि का मिलान करने तथा मास्टर रोल में दर्ज मजदूरों की वास्तविकता की जांच करने की मांग की गई है। इसके अलावा यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि जिस कार्य के लिए राशि स्वीकृत की गई थी, वह जमीन पर कितना पूरा हुआ है।

मामले में अब विभागीय जांच के जरिए कई बिंदुओं की पड़ताल की जा सकती है। इसमें योजना स्थल का भौतिक सत्यापन, मास्टर रोल में दर्ज मजदूरों की जानकारी, मजदूरों को किए गए भुगतान का रिकॉर्ड, योजना से जुड़े दस्तावेज और राशि की निकासी से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं।

यदि जांच के दौरान यह सामने आता है कि बिना काम किए ही सरकारी राशि की निकासी की गई है या दस्तावेजों में अनियमितता की गई है, तो संबंधित लोगों पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि जांच में शिकायत के आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो मामले की वास्तविक स्थिति भी सामने आ जाएगी।

इस पूरे प्रकरण में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुहिया मुख्य सड़क से रंजीत के खेत तक जिस सड़क निर्माण योजना के लिए 8 लाख 23 हजार 749 रुपये स्वीकृत किए गए थे, उस पर वास्तव में कितना काम हुआ। इसके अलावा कथित तौर पर निकाली गई 1 लाख 48 हजार 920 रुपये की राशि किस आधार पर निकाली गई और मास्टर रोल में दर्ज मजदूरों को वास्तव में काम मिला था या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है।

मनरेगा घोटाला
मनरेगा घोटाला

दूसरी ओर, मजदूरों के भुगतान से जुड़ी वार्ड सदस्य की शिकायत भी जांच का विषय है। अगर किसी योजना में काम करने वाले मजदूरों का भुगतान लंबित है, जबकि किसी अन्य स्तर पर राशि की निकासी का आरोप लगाया जा रहा है, तो रिकॉर्ड की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल शिकायत सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। ग्रामीण स्तर पर मनरेगा योजनाओं की निगरानी और सरकारी राशि के सही इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभाग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है।

अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि चिल्हनियां पंचायत की मनरेगा सड़क योजना में वास्तव में कोई वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं। अगर आरोप प्रमाणित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। वहीं, अगर आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो विभागीय जांच के जरिए पूरे मामले की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल, इस मामले में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। शिकायतकर्ता के आरोप और विभाग की ओर से जांच का आश्वासन सामने है। अब जांच के निष्कर्ष से ही तय होगा कि मनरेगा योजना में सरकारी राशि के इस्तेमाल में कोई गड़बड़ी हुई या पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई।

8 Views

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Other News

error: JEB News is copyright content