विदेश नौकरी ठगी: किशनगंज लोकसभा क्षेत्र में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से कथित ठगी के मामलों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। मामले को लेकर किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने बिहार सरकार के गृह सचिव को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। सांसद का कहना है कि रोजगार की तलाश में विदेश जाने का सपना देखने वाले कई युवाओं और उनके परिवारों से बड़ी रकम लिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि किशनगंज और पूर्णिया जिले के कई बेरोजगार युवाओं को विदेश में बेहतर नौकरी और अच्छी कमाई का भरोसा देकर उनसे पैसे लिए गए। शिकायतों में मलेशिया समेत दूसरे देशों में रोजगार दिलाने के नाम पर रकम लेने की बात सामने आई है। कुछ मामलों में यह आरोप भी लगाया गया है कि युवाओं को जरूरी कानूनी दस्तावेजों और वैध वर्क वीजा के बिना विदेश भेज दिया गया।
सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद के मुताबिक, लोकसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्हें ऐसे कई लोगों और परिवारों से शिकायतें मिलीं, जिन्होंने विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर एजेंटों या बिचौलियों को पैसे दिए थे। इन शिकायतों में युवाओं को नौकरी का भरोसा देने, विदेश भेजने और वहां बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के दावे किए जाने की बात सामने आई है।
लेकिन विदेश पहुंचने के बाद कुछ युवाओं को कथित तौर पर ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी। शिकायतों के अनुसार, कुछ लोगों को नौकरी से जुड़ी कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ मामलों में दस्तावेजों और वीजा की स्थिति को लेकर भी समस्याएं सामने आईं। विदेश में फंसने की स्थिति ने युवाओं के साथ-साथ उनके परिवारों की मुश्किलें भी बढ़ा दीं।
कई परिवारों के लिए विदेश भेजने के नाम पर दी गई रकम जुटाना आसान नहीं था। रोजगार की उम्मीद में परिवारों ने अपनी बचत खर्च की, कर्ज लिया या दूसरे स्रोतों से पैसे जुटाए। ऐसे में यदि विदेश पहुंचने के बाद नौकरी या वैध रोजगार की सुविधा नहीं मिलती है, तो इसका सीधा असर परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

इसी को देखते हुए सांसद ने गृह सचिव से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने का आग्रह किया है। पत्र में कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़े एजेंटों, दलालों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल करने की मांग की गई है। सांसद ने कहा है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाना चाहिए कि युवाओं से पैसे लेने वाले लोगों के पास विदेश में रोजगार दिलाने के लिए वैध अनुमति और जरूरी पंजीकरण था या नहीं।
सांसद की मांग है कि किशनगंज और पूर्णिया जिलों में विदेश भेजने का काम करने वाली एजेंसियों और एजेंटों का सत्यापन कराया जाए। उनके पंजीकरण, लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि कौन-कौन से लोग अधिकृत तरीके से विदेश रोजगार के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और कौन लोग बिना वैध अनुमति के युवाओं को विदेश भेजने का दावा कर रहे हैं।
मामले में स्थानीय नेटवर्क की भूमिका की जांच की मांग भी की गई है। सांसद ने पुलिस प्रशासन से सक्रिय एजेंटों, उनके स्थानीय संपर्कों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल करने का आग्रह किया है। जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि अलग-अलग युवाओं से संपर्क कैसे किया गया, उन्हें किस तरह के रोजगार का भरोसा दिया गया और उनसे कितनी रकम ली गई।
इसके साथ ही पहले से दर्ज शिकायतों और लंबित मामलों की समीक्षा की मांग भी सांसद ने की है। उनका कहना है कि यदि विदेश रोजगार के नाम पर ठगी से संबंधित शिकायतें पहले से पुलिस या प्रशासन के पास दर्ज हैं, तो उनकी स्थिति की समीक्षा होनी चाहिए। लंबित मामलों में आवश्यक कार्रवाई को तेज किया जाना चाहिए, ताकि शिकायतकर्ताओं को समय पर न्याय मिल सके।
विदेश रोजगार से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि युवा अक्सर आकर्षक नौकरी और विदेश में बेहतर भविष्य के वादों पर भरोसा कर लेते हैं। कई बार उन्हें एजेंटों की वैधता, भर्ती प्रक्रिया, वीजा की श्रेणी और रोजगार अनुबंध की सही जानकारी नहीं होती। ऐसे में जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर कथित बिचौलिये युवाओं को अपने जाल में फंसा सकते हैं।
इसी वजह से सांसद ने केवल जांच और कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि युवाओं को विदेश रोजगार से पहले जरूरी सावधानियों की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्हें बताया जाना चाहिए कि किसी भी एजेंसी या एजेंट के माध्यम से विदेश जाने से पहले उसका पंजीकरण और वैधता जांचना जरूरी है।
युवाओं को वैध वर्क वीजा और रोजगार से जुड़े दस्तावेजों की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए। जिस देश में रोजगार के लिए जाना है, वहां की कानूनी प्रक्रिया, नौकरी का अनुबंध, वेतन, रहने की व्यवस्था और अन्य शर्तों को समझना भी महत्वपूर्ण है। किसी भी एजेंट को केवल मौखिक भरोसे के आधार पर बड़ी रकम देने से पहले उसकी वैधता की जांच जरूरी है।
सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद का कहना है कि रोजगार की तलाश में युवा अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। विदेश जाने का सपना कई परिवारों के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद से जुड़ा होता है। ऐसे में यदि इसी उम्मीद का फायदा उठाकर किसी व्यक्ति या नेटवर्क द्वारा कथित तौर पर ठगी की जाती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।

अब सांसद के पत्र के बाद प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी। जांच के दौरान यदि किसी एजेंट या संस्था की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जिन युवाओं ने कथित तौर पर पैसे गंवाए हैं, उनकी शिकायतों को दर्ज कर उन्हें उचित कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
किशनगंज और पूर्णिया जैसे सीमांचल के जिलों से बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों का भी रुख करते हैं। ऐसे में विदेश रोजगार के नाम पर होने वाली किसी भी कथित धोखाधड़ी का असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल सांसद ने गृह सचिव से उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच का दायरा कितना व्यापक रखता है और कथित एजेंटों तथा बिचौलियों की भूमिका की जांच किस तरह की जाती है।
सबसे अहम बात यह है कि विदेश में नौकरी का सपना देखने वाले युवाओं को किसी भी एजेंट या संस्था पर भरोसा करने से पहले उसकी वैधता की जांच करनी चाहिए। वैध वर्क वीजा, अधिकृत भर्ती प्रक्रिया और लिखित रोजगार अनुबंध जैसी जरूरी बातों की पुष्टि करना बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि रोजगार का सपना तभी सुरक्षित भविष्य में बदल सकता है, जब विदेश जाने की पूरी प्रक्रिया कानूनी और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए।










