पूर्णिया बाल विवाह मुक्त अभियान: बिहार के पूर्णिया जिले के हरदा में गांधी जयंती और देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता से जुड़ा विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में एक ओर जहां ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़े का समापन हुआ, वहीं दूसरी ओर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के उद्देश्य से बाल विवाह मुक्त अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने और स्वच्छता को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त राजीव कुमार, नगर आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
गांधी और शास्त्री को दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के तैलचित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।
इस अवसर पर दोनों महान व्यक्तित्वों के विचारों और उनके जीवन से जुड़े आदर्शों को याद किया गया। महात्मा गांधी के स्वच्छता, सत्य और सामाजिक जिम्मेदारी के संदेश को आगे बढ़ाने के साथ ही लाल बहादुर शास्त्री के सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के विचारों को भी याद किया गया।
इसके बाद जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने उपस्थित लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। अधिकारियों और ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे अपने घर, आसपास के क्षेत्र, बाजार और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने में सक्रिय योगदान देंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को स्वच्छता के प्रति व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी का एहसास कराना भी रहा।

हरदा बाजार की सफाई को लेकर डीएम ने क्या कहा?
समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने हरदा बाजार के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हरदा बाजार पूर्णिया जिले का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। ऐसे में इस क्षेत्र की साफ-सफाई और व्यवस्था का सीधा संबंध जिले की छवि और आम नागरिकों की सुविधा से जुड़ा हुआ है।
डीएम ने बताया कि पहले हरदा बाजार में जगह-जगह गंदगी और कचरे की समस्या बनी रहती थी। इसके कारण स्थानीय दुकानदारों, राहगीरों और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े के दौरान जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सहयोग से व्यापक सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान में सामूहिक भागीदारी के जरिए बाजार और आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया।
जिलाधिकारी के अनुसार, इस संयुक्त प्रयास का परिणाम अब हरदा बाजार में दिखाई देने लगा है। पहले की तुलना में बाजार अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित नजर आ रहा है।
उन्होंने स्वच्छता अभियान में सहयोग करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
डीएम ने यह संदेश भी दिया कि स्वच्छता केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है। यदि नागरिक स्वयं अपने आसपास सफाई बनाए रखने की आदत विकसित करें, तो सार्वजनिक स्थलों को लंबे समय तक स्वच्छ रखा जा सकता है।
स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े का हुआ समापन
कार्यक्रम के दौरान ‘स्वच्छता ही सेवा’ पखवाड़े के समापन की औपचारिकता पूरी की गई। इस अभियान के माध्यम से स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने और लोगों को साफ-सफाई के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
हरदा बाजार में चलाए गए सफाई अभियान को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाना, कचरे का उचित निस्तारण करना और आसपास के वातावरण को साफ रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
प्रशासन की ओर से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने और अभियान के बाद भी सफाई व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई।

हरदा पंचायत से बाल विवाह मुक्त अभियान की शुरुआत
इस कार्यक्रम का दूसरा प्रमुख उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना रहा।
गांधी जयंती के अवसर पर हरदा पंचायत से बाल विवाह मुक्त अभियान का शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने बाल विवाह को बच्चों के भविष्य, शिक्षा और समग्र विकास के लिए गंभीर समस्या बताया।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों और उनके बेहतर भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
डीएम ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह कानूनन दंडनीय अपराध है।
जिलाधिकारी ने लोगों से अपील की कि वे इस कानून और इसके प्रावधानों के प्रति जागरूक रहें तथा किसी भी परिस्थिति में कम उम्र में बच्चों का विवाह न करें।
कम उम्र में शादी से शिक्षा और विकास पर पड़ता है असर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएम अंशुल कुमार ने बाल विवाह के सामाजिक और व्यक्तिगत दुष्परिणामों पर भी बात रखी।
उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही उनके शारीरिक विकास और मानसिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को कम उम्र में विवाह की जिम्मेदारियों में बांधने के बजाय उन्हें पढ़ने, आगे बढ़ने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर दिया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें और उनके भविष्य से जुड़े फैसले लेते समय उनकी उम्र, शिक्षा और विकास का ध्यान रखें।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए परिवार, समाज और स्थानीय स्तर पर जागरूकता जरूरी है।

पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों से सहयोग की अपील
बाल विवाह मुक्त अभियान को सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी ने पंचायत प्रतिनिधियों, अभिभावकों और ग्रामीणों से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि गांव और पंचायत स्तर पर जागरूकता फैलाकर इस सामाजिक कुरीति को रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से अपील की गई कि वे बाल विवाह के नुकसान के बारे में लोगों को समझाएं और बच्चों की शिक्षा तथा सुरक्षित भविष्य के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करें।
प्रशासन का संदेश स्पष्ट रहा कि बाल विवाह रोकना केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है।
स्वच्छता और सामाजिक बदलाव का संदेश
पूर्णिया के हरदा में आयोजित यह कार्यक्रम स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता के दो महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा।
एक ओर स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े के माध्यम से बाजार और सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने का संदेश दिया गया, तो दूसरी ओर बाल विवाह मुक्त अभियान के जरिए बच्चों के अधिकार, शिक्षा और बेहतर भविष्य को प्राथमिकता देने की अपील की गई।
कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी ने जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।
जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने स्वच्छता बनाए रखने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सभी से सहयोग की अपील की।
कुल मिलाकर, गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर हरदा में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि स्वच्छ और जागरूक समाज के निर्माण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
पूर्णिया के हरदा से स्वच्छता और बाल विवाह मुक्त समाज का यह संदेश अब जनभागीदारी के जरिए आगे बढ़ाने की अपील की गई है।










