अररिया नकली बीज खाद: बिहार के अररिया जिले में नकली बीज और संदिग्ध उर्वरक की पैकिंग से जुड़े कथित कारोबार का मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर गैयारी गांव में कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक गोदाम पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान टीम को ऐसे सामान और पैकेजिंग से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिली, जिनके आधार पर सस्ते मक्का बीज को नामी कंपनी के रैपर में पैक किए जाने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा बड़ी कंपनियों के नाम वाले बोरों में संदिग्ध उर्वरक की पैकिंग किए जाने की बात भी सामने आई है।
इस कार्रवाई के बाद इलाके में कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, उनकी असली पहचान और किसानों तक पहुंचने वाली खाद-बीज की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, गोदाम में मिले उत्पाद वास्तव में नकली थे या नहीं, इसकी अंतिम पुष्टि जांच और नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
जानकारी के मुताबिक, अररिया जिला मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर दूर गैयारी गांव में झमेली शाह के मकान में एक गोदाम संचालित होने की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि धीरज साह कथित तौर पर यहां बीज और उर्वरक की पैकिंग से जुड़ा कारोबार चला रहा था। धीरज साह की जीरो माइल इलाके में उर्वरक की दुकान होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कारोबार की प्रकृति की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

मामले की जानकारी मिलने पर कृषि विभाग ने पुलिस के साथ मिलकर गुरुवार शाम गोदाम में छापेमारी की योजना बनाई। संयुक्त टीम जब मौके पर पहुंची, तो गोदाम में ताला लगा हुआ था। बताया गया कि कार्रवाई की भनक लगने के बाद गोदाम से जुड़ा व्यक्ति मौके से चला गया था। इसके बाद टीम ने पंचायत प्रतिनिधि की मौजूदगी में ताला खुलवाने के बजाय उसे तोड़कर अंदर रखे सामान की जांच शुरू की। इस दौरान गोदाम में मौजूद पैकेजिंग सामग्री और कृषि उत्पादों को लेकर जानकारी जुटाई गई।
छापेमारी के दौरान सबसे अहम बात सस्ते मक्का बीज को नामी कंपनी पायोनियर के रैपर में पैक किए जाने की आशंका से जुड़ी रही। कृषि विभाग की टीम को जानकारी मिली कि कम कीमत वाले बीज को कंपनी के नाम वाले पैकेट में भरकर बाजार में बेचने की तैयारी की जा रही थी। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है, तो यह किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला हो सकता है। क्योंकि किसान आमतौर पर बीज खरीदते समय कंपनी के नाम, पैकेट पर दी गई जानकारी और उत्पाद की गुणवत्ता पर भरोसा करते हैं।
मक्का की खेती में बीज की गुणवत्ता का विशेष महत्व होता है। किसान बेहतर उत्पादन की उम्मीद में अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से बीज खरीदते हैं। ऐसे में यदि किसी उत्पाद की वास्तविक पहचान छिपाकर उसे किसी प्रतिष्ठित कंपनी के नाम से बेचा जाता है, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खराब या अनुपयुक्त बीज से अंकुरण प्रभावित होने, पौधों की वृद्धि कमजोर रहने और अपेक्षित पैदावार नहीं मिलने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, इस मामले में बरामद बीज की वास्तविक गुणवत्ता और उसकी कृषि उपयोगिता का पता जांच के बाद ही चलेगा।
गोदाम में संदिग्ध उर्वरक की पैकिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, बड़ी कंपनियों के नाम वाले बोरों में खाद भरने की गतिविधि की आशंका जताई गई है। जांच टीम को यह संदेह भी है कि नमक से तैयार किए गए पदार्थ को डीएपी के नाम पर कंपनियों के बोरों में पैक किया जा रहा था। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि गोदाम में वास्तव में किस प्रकार का पदार्थ रखा था और उसकी रासायनिक संरचना क्या थी।

डीएपी यानी डाइ-अमोनियम फॉस्फेट एक प्रमुख उर्वरक है, जिसका इस्तेमाल फसलों को फॉस्फोरस और नाइट्रोजन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। यदि किसी गैर-उपयुक्त पदार्थ को डीएपी बताकर किसानों को बेचा जाए, तो फसल की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं। इससे खेती की लागत बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा रहता है। यही कारण है कि संदिग्ध उर्वरक के मामले में उसकी पहचान, गुणवत्ता और पैकेजिंग की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस संयुक्त कार्रवाई में जिला कृषि पदाधिकारी पंकज कुमार, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी विकास कुमार, पौधा संरक्षण अधिकारी ऋतुराज और कृषि समन्वयक मनीष कुमार समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने गोदाम में रखे सामान की जांच की और संदिग्ध गतिविधियों से संबंधित जानकारी जुटाई।
जिला कृषि पदाधिकारी पंकज कुमार के अनुसार, विभाग को गैयारी गांव में अवैध तरीके से उर्वरक के भंडारण और नकली खाद तैयार किए जाने की सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस के सहयोग से छापेमारी की गई। इस कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध कारोबार की वास्तविकता का पता लगाना और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता से जुड़े मामले की जांच करना है।
गोदाम से जुड़े व्यक्ति के मौके पर नहीं मिलने के बाद अब यह पता लगाना भी जांच का हिस्सा है कि कथित तौर पर पैक किए जा रहे बीज और उर्वरक कहां भेजे जाने थे। इसके अलावा यह भी जांचा जाना जरूरी है कि क्या इस गतिविधि में अन्य लोग शामिल थे और क्या संबंधित उत्पाद पहले से बाजार में बेचे जा चुके हैं। यदि सप्लाई नेटवर्क की जानकारी मिलती है, तो उससे जुड़े कारोबारियों और वितरण व्यवस्था की भी जांच की जा सकती है।
किसानों के लिए इस मामले का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि खेती की लागत लगातार एक बड़ी चिंता बनी हुई है। किसान बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद फसल से बेहतर आमदनी की उम्मीद करते हैं। यदि उन्हें खरीदे गए उत्पाद की गुणवत्ता या असली पहचान के बारे में गलत जानकारी मिलती है, तो उनकी मेहनत और निवेश दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे मामलों में उत्पाद की गुणवत्ता की जांच के साथ-साथ बिक्री से संबंधित दस्तावेजों और पैकेजिंग पर दर्ज विवरण की जांच भी अहम होती है।

कृषि उत्पादों की खरीदारी करते समय किसानों को अधिकृत विक्रेताओं से बीज और उर्वरक खरीदने, पक्का बिल लेने और पैकेट पर कंपनी का नाम, बैच नंबर, निर्माण या पैकिंग संबंधी विवरण तथा अन्य जरूरी जानकारी देखने की सलाह दी जाती है। किसी उत्पाद पर संदेह होने पर किसान संबंधित कृषि विभाग को इसकी जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, किसी उत्पाद की असलियत का अंतिम निर्णय उचित जांच के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
फिलहाल, अररिया के गैयारी गांव स्थित गोदाम में हुई छापेमारी के बाद मामले की जांच जारी है। बरामद सामग्री की प्रकृति, बीज की गुणवत्ता, उर्वरक की वास्तविक संरचना और पैकेजिंग से जुड़े तथ्यों की पुष्टि होना बाकी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या कथित तौर पर नामी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल करके कृषि उत्पाद बेचने की तैयारी की जा रही थी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला किसानों के हितों की सुरक्षा और कृषि बाजार में नकली उत्पादों पर नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।










