इस मामले में किशनगंज पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंतरजिला ठगी गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने एसटीएफ की मदद से गिरोह के मुख्य आरोपी राजू कुमार को वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से ठगी के 50 हजार रुपये नकद, एक लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर गिरोह के दूसरे सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।
दरअसल, पूरा मामला किशनगंज जिले के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, भिमवालीस चौक की रहने वाली लक्ष्मी देवी ने 8 मई 2026 को इस मामले में ठाकुरगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल को Finsupport Micro Foundation नाम की कंपनी के कुछ एजेंट गांव पहुंचे थे।

इन एजेंटों ने गांव की महिलाओं को आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से चार-चार महिलाओं का समूह बनाया जाएगा और प्रत्येक समूह के लिए लोन कार्ड तैयार किया जाएगा। इसके बाद हर समूह को 60 हजार रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाएगा।
कंपनी के प्रतिनिधियों ने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि लोन लेने की प्रक्रिया बेहद आसान है और इसके लिए उन्हें कंपनी के कार्यालय में जाकर आवेदन करना होगा। आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद में कई महिलाएं इस योजना से जुड़ने के लिए तैयार हो गईं।
इसके बाद महिलाओं को कंपनी के कार्यालय में बुलाया गया, जहां उनसे लोन कार्ड बनवाने के नाम पर फॉर्म भरवाए गए। उनकी जरूरी जानकारी और दस्तावेज भी लिए गए। शुरुआत में पूरी प्रक्रिया को एक सामान्य वित्तीय योजना की तरह पेश किया गया, ताकि महिलाओं का भरोसा जीता जा सके।
लेकिन आरोप है कि कंपनी के लोगों ने लोन दिलाने के साथ घरेलू सामान देने के नाम पर भी महिलाओं से पैसे वसूलने शुरू कर दिए। उन्हें बताया गया कि कंपनी की ओर से प्रेस, हॉटपॉट, सिलाई मशीन और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए प्रत्येक महिला से चार हजार से लेकर सात हजार रुपये तक जमा कराए गए।
महिलाओं को उम्मीद थी कि कुछ ही दिनों में उन्हें लोन की राशि और घरेलू सामान दोनों मिल जाएंगे। इसी भरोसे में बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपनी जमा पूंजी कंपनी के प्रतिनिधियों को सौंप दी।
बताया गया कि 4 मई को ठाकुरगंज के जीलेबिया मोड़ स्थित कंपनी के कार्यालय में करीब 200 महिलाओं से पैसे जमा कराए गए। कंपनी की ओर से महिलाओं को स्पष्ट आश्वासन दिया गया था कि 8 मई की सुबह आठ बजे तक सामान उनके घरों तक पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें लोन की रकम भी उपलब्ध करा दी जाएगी।
महिलाओं ने कंपनी के इस वादे पर भरोसा किया और तय तारीख का इंतजार करने लगीं। लेकिन 8 मई को सुबह से ही महिलाओं को सामान मिलने का इंतजार करना पड़ा। न तो किसी के घर सामान पहुंचा और न ही किसी महिला को लोन की राशि मिली।

शुरुआत में महिलाओं ने कंपनी के कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब पीड़ित महिलाएं जीलेबिया मोड़ स्थित कंपनी के कार्यालय पहुंचीं तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गईं। कार्यालय पर ताला लगा हुआ था और कंपनी के कर्मचारी मौके से गायब थे।
इसके बाद महिलाओं को एहसास हुआ कि लोन और घरेलू सामान देने के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। पीड़ित महिलाओं ने एकजुट होकर ठाकुरगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर कांड संख्या 148/26 दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
एसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम
मामले में करीब 200 महिलाओं के साथ ठगी की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरे गिरोह का पता लगाने के लिए विशेष जांच टीम गठित की।
इस टीम में जिला सूचना इकाई यानी डीआईयू और एसडीपीओ-2 किशनगंज के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को शामिल किया गया। टीम ने कंपनी से जुड़े दस्तावेजों, मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि Finsupport Micro Foundation के नाम से संचालित कंपनी फर्जी थी। कंपनी के नाम पर महिलाओं को लोन और घरेलू सामान उपलब्ध कराने का भरोसा देकर उनसे पैसे वसूले जा रहे थे।
इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय सूचना के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की। जांच में गिरोह के मुख्य सरगना के रूप में राजू कुमार का नाम सामने आया। पुलिस ने उसकी गतिविधियों और ठिकाने की जानकारी जुटाई और एसटीएफ की मदद से कार्रवाई की योजना बनाई।
वैशाली से गिरफ्तार हुआ मुख्य आरोपी
लगातार जांच और छापेमारी के बाद किशनगंज पुलिस तथा एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य आरोपी राजू कुमार को वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार राजू कुमार काजीपुर थाना क्षेत्र के भतनडीह गांव निवासी अशोक कुमार झा का पुत्र है। आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से ठगी के 50 हजार रुपये नकद, एक लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किया है।
पुलिस अब बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन की जांच कर रही है। इन उपकरणों से कंपनी के कामकाज, महिलाओं से संपर्क करने वाले लोगों और गिरोह के दूसरे सदस्यों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
बिहार के कई जिलों में फैला है ठगी का नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का नेटवर्क केवल किशनगंज तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के कई जिलों में फैला हुआ है। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने दूसरे जिलों में भी इसी तरह महिलाओं को अपना निशाना बनाया है या नहीं।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और अलग-अलग इलाकों में महिलाओं तक पहुंचने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाई जाती थी।
पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि अब तक गिरोह ने कुल कितनी रकम की ठगी की है और महिलाओं से वसूले गए पैसे कहां इस्तेमाल किए गए। इसके अलावा कंपनी के नाम पर इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों और कार्यालय से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आर्थिक मदद की उम्मीद में गंवाई जमा पूंजी
इस घटना में सबसे ज्यादा परेशानी उन महिलाओं को हुई है, जिन्होंने आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद में अपनी मेहनत की कमाई कंपनी के प्रतिनिधियों को दे दी थी। किसी ने घरेलू सामान मिलने की उम्मीद में पैसे जमा किए तो किसी ने 60 हजार रुपये तक का लोन मिलने के भरोसे इस योजना में हिस्सा लिया।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए चार से सात हजार रुपये की रकम भी काफी मायने रखती है। ऐसे में इस तरह की ठगी ने उनकी आर्थिक परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित महिलाओं को उम्मीद है कि पुलिस की जांच से पूरे गिरोह का पर्दाफाश होगा और उनकी रकम वापस मिलने का रास्ता भी साफ हो सकेगा।
फिलहाल किशनगंज पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। साथ ही दूसरे जिलों में फैले नेटवर्क की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बताई है। किसी भी कंपनी या संस्था के नाम पर लोन, सब्सिडी अथवा घरेलू सामान देने का वादा किया जाए तो पहले उसकी आधिकारिक पहचान और विश्वसनीयता की जांच जरूर करनी चाहिए।
फिलहाल सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है।










