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अररिया बाल सुरक्षा जागरूकता: अररिया में बच्चों को कानून व सुरक्षा के प्रति किया गया जागरूक

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अररिया बाल सुरक्षा जागरूकता: Araria जिले के फारबिसगंज प्रखंड स्थित Dr. Bhimrao Ambedkar Residential School में शुक्रवार को बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “सुरक्षित बचपन-सुरक्षित भविष्य जागृति योजना 2025” के तहत आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर उन्हें जागरूक और सशक्त बनाना था।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय अधिकारियों ने भाग लिया। आयोजन को बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

अररिया बाल सुरक्षा जागरूकता
अररिया बाल सुरक्षा जागरूकता

कार्यक्रम का उद्देश्य: सुरक्षित बचपन और जागरूक समाज

कार्यक्रम का मूल उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें यह समझाना था कि किसी भी प्रकार की असुरक्षित स्थिति में वे कैसे अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

आयोजकों ने बताया कि आज के समय में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए कानूनी जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, ताकि छात्र न केवल अपने अधिकारों को समझें, बल्कि किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करने पर सही कदम भी उठा सकें।

अररिया बाल सुरक्षा जागरूकता
अररिया बाल सुरक्षा जागरूकता

एडवोकेट राहुल रंजन ने दी विस्तृत जानकारी

कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पैनल एडवोकेट Rahul Ranjan ने किया। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) 2012 के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पॉक्सो एक्ट बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है। यह कानून बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है।

एडवोकेट राहुल रंजन ने छात्रों को समझाया कि यदि किसी भी प्रकार का शोषण, दुर्व्यवहार या अपराध उनके साथ होता है, तो उन्हें चुप नहीं रहना चाहिए बल्कि तुरंत कानूनी सहायता लेनी चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों के लिए बनाए गए कानूनों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करना भी है।

अररिया बाल सुरक्षा जागरूकता
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कानूनी सहायता और सुरक्षा उपायों की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को यह भी बताया गया कि वे किसी भी आपात स्थिति में कानूनी सहायता कैसे प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें हेल्पलाइन नंबरों, स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण इकाइयों की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

एडवोकेट ने कहा कि समाज में जागरूकता ही बच्चों की सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है। यदि बच्चे और अभिभावक सतर्क रहें, तो कई तरह के अपराधों को रोका जा सकता है।


किशोर न्याय अधिनियम 2015 की जानकारी

कार्यक्रम में केवल पॉक्सो एक्ट ही नहीं, बल्कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 पर भी विशेष जानकारी दी गई।

Rahul Ranjan ने बताया कि इस अधिनियम के तहत जरूरतमंद और पीड़ित बच्चों की देखरेख, संरक्षण, उपचार, विकास और पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है।

उन्होंने कहा कि यह कानून उन बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो किसी कारणवश कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं या जिन्हें सहायता और संरक्षण की आवश्यकता है।


बच्चों की भागीदारी और जागरूकता का महत्व

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न प्रश्न पूछे। एडवोकेट राहुल रंजन ने बच्चों के सभी प्रश्नों का सरल भाषा में उत्तर दिया, जिससे छात्रों को कानून की समझ और बेहतर तरीके से हो सकी।

उन्होंने बच्चों को यह भी प्रेरित किया कि वे अपने अधिकारों को समझें और किसी भी प्रकार की गलत स्थिति में आवाज उठाने से न डरें।

कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।


विद्यालय प्रशासन की भूमिका

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक Krishna Kant ने कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी जागरूकता भी दी जानी चाहिए ताकि वे एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें।


अन्य अधिकारियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी Basant Kumar Singh, अधिकार मित्र Yugal Kishore Gupta सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे बच्चों के भविष्य के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।


जागरूकता से सुरक्षित भविष्य की ओर कदम

कार्यक्रम के अंत में बच्चों से अपील की गई कि वे कानून और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर हमेशा सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत अपने शिक्षक, अभिभावक या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।


निष्कर्ष

Araria में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। पॉक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों से बच्चों को न केवल कानूनी समझ मिली, बल्कि उन्हें सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी प्रेरित किया गया।

इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाने की आवश्यकता है, ताकि समाज में बाल सुरक्षा और जागरूकता को और मजबूत किया जा सके।

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