अररिया मोबाइल लूटकांड: अररिया पुलिस ने देश के सबसे चर्चित मोबाइल लूटकांडों में से एक मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई ने न सिर्फ करोड़ों रुपये के मोबाइल फोन बरामद कराए हैं, बल्कि एक ऐसे संगठित गिरोह का भी पर्दाफाश किया है, जिसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ बताया जा रहा है। पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी ने हरियाणा के नूंह जिले से इस पूरे गिरोह के कथित मास्टरमाइंड नईम को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 620 महंगे मोबाइल फोन, करीब 7 लाख रुपये नकद और दो वाहन बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार जब्त किए गए सामान की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये है।
यह गिरफ्तारी इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि पुलिस का दावा है कि नईम इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य योजनाकार था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह लंबे समय से संगठित तरीके से मोबाइल लूट और उनकी अवैध बिक्री के नेटवर्क को संचालित कर रहा था। पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और चोरी किए गए मोबाइल आखिर किन-किन राज्यों में पहुंचाए जाने वाले थे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, नईम का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से ही काफी लंबा है। उसके खिलाफ कई राज्यों में मामले दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि वह फरीदाबाद पुलिस का इनामी आरोपी भी है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में दर्ज एक अन्य मामले में वह जमानत पर बाहर था। अब अररिया पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर बिहार लेकर आई है, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने नईम की स्कॉर्पियो वाहन की भी तलाशी ली। इस दौरान मोबाइल कंपनियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। इन दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं गिरोह के पास मोबाइल कंपनियों की सप्लाई चेन से जुड़ी अंदरूनी जानकारी तो नहीं थी। यदि ऐसा साबित होता है तो यह मामला और भी गंभीर हो सकता है।
अब बात करते हैं इस पूरे मामले की शुरुआत की। यह घटना 7 और 8 जून की रात की है। नोएडा से गुवाहाटी के लिए एक कंटेनर रवाना हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में महंगे मोबाइल फोन और उनके पार्ट्स भेजे जा रहे थे। लेकिन रास्ते में यह कंटेनर संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गया। बाद में अररिया के जीरो माइल इलाके में यह कंटेनर लावारिस हालत में मिला। जब पुलिस ने इसकी जांच की तो पता चला कि कंटेनर में रखे गए कुल 1143 बॉक्स में से 612 बॉक्स गायब थे। यहीं से इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड की जांच शुरू हुई।
जांच में पुलिस को जो जानकारी मिली, उसने सभी को चौंका दिया। आरोपियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से गोरखपुर और लखनऊ के बीच कंटेनर को रोका। इसके बाद उसमें रखे मोबाइल फोन के सैकड़ों बॉक्स निकाल लिए गए। चोरी करने के बाद आरोपियों ने कंटेनर को अररिया में लाकर छोड़ दिया, ताकि पुलिस को लगे कि घटना बिहार में हुई है और जांच की दिशा भटक जाए। यह पूरी योजना बेहद पेशेवर तरीके से बनाई गई थी।
एसआईटी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कई राज्यों में जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और अन्य इनपुट के आधार पर पुलिस ने पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। उन आरोपियों के कब्जे से 817 मोबाइल फोन, एक थार एसयूवी, एक कार, लैपटॉप और अन्य सामान बरामद किया गया था। अब नईम की गिरफ्तारी के बाद 620 और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इस तरह अब तक कुल 1437 मोबाइल फोन पुलिस के हाथ लग चुके हैं।
पुलिस का अनुमान है कि अब तक बरामद किए गए मोबाइल फोन और अन्य सामान की कुल कीमत 6 से 7 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि जांच अभी भी जारी है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी मोबाइल फोन तथा अन्य सामान बरामद हो सकते हैं।

पूछताछ के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार चोरी किए गए मोबाइल फोन को हरियाणा के मेवात क्षेत्र में एक दूसरे कंटेनर में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद इन्हें अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग लोगों को बेचने की तैयारी चल रही थी। पुलिस अब उन लोगों की पहचान करने में जुटी है, जो इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा थे।
जांच एजेंसियों को यह भी आशंका है कि यदि ये मोबाइल फोन बाजार में पहुंच जाते, तो उनका इस्तेमाल सिर्फ अवैध बिक्री तक सीमित नहीं रहता। इनका उपयोग साइबर अपराधों में भी किया जा सकता था। आजकल साइबर ठगी करने वाले गिरोह बड़ी संख्या में बिना वैध दस्तावेज वाले मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पुलिस का मानना है कि समय रहते इस गिरोह का भंडाफोड़ होने से एक बड़े साइबर नेटवर्क को भी नुकसान पहुंचा है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि संगठित अपराधी अब हाई-टेक और सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। वे लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन की पूरी जानकारी जुटाकर करोड़ों रुपये के माल को निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल ही सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है।
अररिया पुलिस और एसआईटी की इस कार्रवाई की सराहना की जा रही है क्योंकि उन्होंने कई राज्यों में फैले नेटवर्क का पीछा करते हुए कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने में सफलता हासिल की। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है। गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में और बड़े नाम सामने आएंगे? क्या चोरी किए गए बाकी मोबाइल फोन भी बरामद हो पाएंगे? क्या इस गिरोह का संबंध किसी बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से भी जुड़ा हुआ है? इन सभी सवालों के जवाब आने वाली पुलिस जांच में सामने आ सकते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि करोड़ों रुपये के इस मोबाइल लूटकांड में पुलिस को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिल चुकी है। 1437 मोबाइल फोन की बरामदगी, कथित मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी और कई अहम दस्तावेजों की बरामदगी ने इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में इस जांच से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।










