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कटिहार कांग्रेस बैठक बवाल: तारिक अनवर की उपेक्षा के आरोप पर कार्यकर्ताओं का विरोध, बैठक बाधित

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कटिहार कांग्रेस बैठक बवाल: कटिहार में कांग्रेस पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक उस समय अचानक विवाद और हंगामे में बदल गई जब संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। यह घटना राजेंद्र आश्रम स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संगठन सृजन अभियान कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया।

बैठक का उद्देश्य संगठन को मजबूत करने और आगामी रणनीतियों पर चर्चा करना था, लेकिन कुछ ही समय में यह कार्यक्रम आंतरिक मतभेदों और नाराजगी का मंच बन गया। कार्यकर्ताओं के विरोध और नारेबाजी के चलते कुछ देर के लिए बैठक की कार्यवाही पूरी तरह बाधित हो गई।

कटिहार कांग्रेस बैठक बवाल
कटिहार कांग्रेस बैठक बवाल

बैठक में मौजूद थे वरिष्ठ नेता

इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, पूर्व विधायक शकील अहमद खान सहित कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए थे। शुरुआत में कार्यक्रम सामान्य रूप से चल रहा था और नेता अपने विचार रख रहे थे।

लेकिन जैसे ही नेताओं का संबोधन जारी था, तभी कुछ कार्यकर्ता अचानक अपनी सीटों से खड़े हो गए और जोरदार विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल बदल गया और नारेबाजी शुरू हो गई।

कार्यकर्ताओं का आरोप: वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी

विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का मुख्य आरोप था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद तारिक अनवर तथा मनिहारी विधायक मनोहर प्रसाद को संगठनात्मक कार्यक्रमों में उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा है।

उनका कहना था कि पार्टी के भीतर लगातार ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। कई कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि संगठन सृजन अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में इन नेताओं की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि अगर संगठन को मजबूत करना है तो सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना होगा, अन्यथा कार्यकर्ताओं का भरोसा कमजोर होगा।

कटिहार कांग्रेस बैठक बवाल
कटिहार कांग्रेस बैठक बवाल

नारेबाजी से बिगड़ा माहौल

स्थिति तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब कुछ कार्यकर्ताओं ने बैठक के बीच ही “तारिक अनवर जिंदाबाद” के नारे लगाने शुरू कर दिए। यह नारेबाजी धीरे-धीरे पूरे हॉल में फैल गई और माहौल अफरा-तफरी में बदल गया।

करीब आधे घंटे तक कार्यक्रम स्थल पर स्थिति अव्यवस्थित रही। इस दौरान बैठक की कार्यवाही पूरी तरह बाधित हो गई और नेता भी कुछ समय के लिए असहज नजर आए।

कई कार्यकर्ता अपनी बात जोर-शोर से रखने की कोशिश करते रहे, जिससे स्थिति को संभालना मुश्किल हो गया।

प्रदेश अध्यक्ष का हस्तक्षेप

मामले के बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने नाराज कार्यकर्ताओं से बातचीत की और उन्हें शांत कराने का प्रयास किया।

काफी समझाने-बुझाने के बाद कार्यकर्ता शांत हुए और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकी। इसके बाद बैठक की कार्यवाही फिर से शुरू की गई, हालांकि माहौल में पहले जैसी सहजता नहीं रही।

नेताओं की प्रतिक्रिया

इस घटना के दौरान कांग्रेस नेता सोहराब आलम और पंकज ने भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार संगठन को मजबूत करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि संगठन को मजबूत बनाना है तो सभी स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं की बात को गंभीरता से सुनना होगा, अन्यथा असंतोष बढ़ता रहेगा।

तारिक अनवर और मनोहर प्रसाद को लेकर मांग

बैठक में उठी प्रमुख मांगों में यह बात शामिल थी कि सांसद तारिक अनवर और विधायक मनोहर प्रसाद को पार्टी संगठन में उनकी भूमिका के अनुरूप सम्मान और महत्व दिया जाए।

कार्यकर्ताओं का कहना था कि दोनों नेताओं का अनुभव और योगदान पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है, और उनकी उपेक्षा से संगठन कमजोर हो सकता है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों में सभी वरिष्ठ नेताओं को उचित स्थान दिया जाए।

संगठन के भीतर असंतोष की झलक

कटिहार की यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि कांग्रेस संगठन के भीतर आंतरिक असंतोष और मतभेद मौजूद हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार संगठन को मजबूत करने की बात करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी समय-समय पर सामने आती रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रम पार्टी के लिए चेतावनी हैं, क्योंकि यदि आंतरिक संवाद और संतुलन नहीं रखा गया तो संगठनात्मक ढांचा प्रभावित हो सकता है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम घटना

यह घटना केवल एक बैठक में हुआ हंगामा नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियों का संकेत भी देती है। वरिष्ठ नेताओं की भूमिका, कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं और संगठनात्मक संतुलन जैसे मुद्दे इस घटना के केंद्र में रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे विवाद अगर समय रहते नहीं सुलझाए गए, तो यह आगे चलकर पार्टी की चुनावी रणनीति और जनाधार दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

निष्कर्ष

कटिहार कांग्रेस बैठक में हुआ यह बवाल पार्टी के भीतर मौजूद असंतोष और संवाद की कमी को उजागर करता है। तारिक अनवर की कथित उपेक्षा को लेकर उठे सवालों ने यह साफ कर दिया है कि संगठन के भीतर संतुलन और सम्मान की भावना बनाए रखना कितना जरूरी है।

फिलहाल, इस घटना के बाद पार्टी नेतृत्व पर यह जिम्मेदारी और बढ़ गई है कि वह सभी पक्षों को साथ लेकर चले और संगठन में एकजुटता बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए।

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