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कटिहार रिवर फ्रंट: बाढ़ के बीच फंसा रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट, कटावरोधी काम पर उठे सवाल

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कटिहार रिवर फ्रंट: मनिहारी गंगा तट पर करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से नमामि गंगे परियोजना के तहत बनाया जा रहा रिवर फ्रंट इन दिनों बाढ़ और कटाव के बीच फंस गया है। जिस परियोजना से गंगा तट के विकास और क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद थी, वही परियोजना अब अपनी जमीन और निर्माण की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है।

निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद रिवर फ्रंट का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, गंगा का जलस्तर बढ़ने से निर्माणाधीन ढांचा चारों तरफ से पानी से घिर गया है। ऐसे हालात में परियोजना की सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

रिवर फ्रंट के निर्माण स्थल के आसपास फिलहाल बाढ़ और कटाव का असर साफ दिखाई दे रहा है। निर्माणाधीन संरचना को संभावित नुकसान से बचाने के लिए बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से कटावरोधी बांध और फ्लड फाइटिंग का काम कराया जा रहा है। हालांकि, इस स्थिति ने परियोजना के स्थल चयन और योजना तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कटिहार रिवर फ्रंट
कटिहार रिवर फ्रंट

कटाव प्रभावित जमीन पर परियोजना का सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस इलाके में रिवर फ्रंट का निर्माण कराया जा रहा है, वह जमीन लंबे समय से गंगा के कटाव से प्रभावित रही है। यहां हर साल बाढ़ के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ता है और आसपास के क्षेत्रों में कटाव का खतरा पैदा होता है।

ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर इस जमीन का चयन रिवर फ्रंट जैसी महत्वपूर्ण और करोड़ों रुपये की परियोजना के लिए किस तकनीकी अध्ययन के आधार पर किया गया।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, किसी भी बड़ी परियोजना को शुरू करने से पहले उसके निर्माण स्थल की भौगोलिक स्थिति, मिट्टी की मजबूती, बाढ़ की संभावना और नदी के कटाव के पुराने रिकॉर्ड का विस्तृत अध्ययन किया जाना जरूरी है। लोगों का आरोप है कि अगर परियोजना की मंजूरी से पहले इन पहलुओं का गंभीरता से आकलन किया गया होता, तो आज निर्माणाधीन ढांचे को बचाने के लिए अलग से कटावरोधी और फ्लड फाइटिंग कार्य कराने की जरूरत शायद नहीं पड़ती।

कटिहार रिवर फ्रंट
कटिहार रिवर फ्रंट

बाढ़ के बीच चारों तरफ पानी

मौजूदा समय में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण रिवर फ्रंट का निर्माण स्थल बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। निर्माणाधीन ढांचे तक पानी पहुंच जाने से परियोजना की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

एक तरफ परियोजना का निर्माण पूरा होना बाकी है, तो दूसरी तरफ नदी के बढ़ते जलस्तर और कटाव का खतरा बना हुआ है। ऐसे में निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती तैयार हो रही संरचना को सुरक्षित रखना है।

बाढ़ नियंत्रण विभाग, कटिहार की ओर से फिलहाल फ्लड फाइटिंग का काम कराया जा रहा है। कटावरोधी उपायों के जरिए पानी के दबाव और कटाव से निर्माणाधीन संरचना को बचाने की कोशिश की जा रही है।

लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर किसी परियोजना के निर्माण के दौरान ही उसे बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कार्य कराने की जरूरत पड़ रही है, तो क्या परियोजना की शुरुआती तकनीकी योजना में नदी के व्यवहार और बाढ़ की स्थिति को पर्याप्त महत्व दिया गया था?

कटिहार रिवर फ्रंट
कटिहार रिवर फ्रंट

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

रिवर फ्रंट की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाएं क्षेत्र के विकास के लिए होती हैं और ऐसी परियोजनाओं पर जनता के पैसे खर्च होते हैं। इसलिए योजना की मंजूरी से लेकर निर्माण तक हर स्तर पर पारदर्शिता और तकनीकी सावधानी जरूरी है।

स्थानीय निवासी रंजीत गुप्ता ने परियोजना के स्थल चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि निर्माण शुरू होने से पहले जमीन की तकनीकी जांच सही तरीके से की गई होती, तो आज निर्माणाधीन ढांचे को बचाने के लिए अतिरिक्त राशि खर्च करने की स्थिति नहीं बनती।

उनका कहना है कि गंगा के किनारे किसी भी निर्माण से पहले नदी के जलस्तर, कटाव की दिशा और बाढ़ के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो भविष्य में भी परियोजना को नुकसान का खतरा बना रह सकता है।

वहीं प्रीतम ओझा ने सरकारी राशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता और दूरदर्शिता की जरूरत बताई। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की परियोजना शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसका निर्माण स्थल लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि अगर निर्माण पूरा होने के बाद लगातार कटावरोधी काम की जरूरत पड़ती रही, तो इससे परियोजना की लागत और रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है।

हर साल बढ़ता है गंगा का जलस्तर

स्थानीय निवासी सीमा देवी के मुताबिक, मनिहारी के इस इलाके में हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ता है और कटाव की समस्या सामने आती है। बाढ़ के मौसम में नदी का पानी आसपास के इलाकों को प्रभावित करता है।

ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में किसी स्थायी निर्माण परियोजना को मंजूरी देने से पहले बाढ़ और कटाव की संभावित स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाना चाहिए था।

लोगों की चिंता सिर्फ वर्तमान बाढ़ तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि आने वाले वर्षों में जब गंगा का जलस्तर बढ़ेगा या नदी का कटाव और तेज होगा, तब रिवर फ्रंट की संरचना कितनी सुरक्षित रहेगी।

निर्माण बचाने के लिए फ्लड फाइटिंग

फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने तत्काल चुनौती निर्माणाधीन रिवर फ्रंट को बाढ़ और कटाव से बचाने की है। इसी को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से कटावरोधी बांध और फ्लड फाइटिंग का काम कराया जा रहा है।

फ्लड फाइटिंग के जरिए नदी के पानी के दबाव को कम करने और कटाव को रोकने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य निर्माणाधीन संरचना को सुरक्षित रखना है, ताकि परियोजना को और नुकसान न पहुंचे।

हालांकि, यह काम कितना प्रभावी साबित होगा और भविष्य में रिवर फ्रंट की सुरक्षा के लिए किस तरह की स्थायी व्यवस्था की जरूरत होगी, यह आने वाला समय बताएगा।

तकनीकी जांच की मांग

पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने परियोजना की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विशेषज्ञों की टीम से यह जांच कराई जानी चाहिए कि रिवर फ्रंट के लिए जमीन का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया था।

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि निर्माण से पहले बाढ़, कटाव और मिट्टी की स्थिति का तकनीकी सर्वे हुआ था या नहीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर परियोजना को मंजूरी दी गई थी, तो उस रिपोर्ट के आधार पर निर्माण स्थल की सुरक्षा और भविष्य की स्थिति का भी आकलन किया जाना चाहिए।

करोड़ों की परियोजना, लेकिन सवाल बरकरार

करीब नौ करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा तट को विकसित करने का उद्देश्य नदी किनारे सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना है।

लेकिन फिलहाल बाढ़ और कटाव के बीच घिरी निर्माणाधीन संरचना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निर्माण स्थल का चयन पर्याप्त तकनीकी अध्ययन के बाद किया गया था।

दूसरा सवाल यह है कि निर्माण पूरा होने के बाद रिवर फ्रंट को हर साल आने वाली बाढ़ और कटाव से सुरक्षित रखने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था होगी।

फिलहाल विभाग की ओर से फ्लड फाइटिंग और कटावरोधी कार्य जारी है। लेकिन स्थानीय लोग तत्काल राहत के साथ-साथ पूरे मामले की तकनीकी और निष्पक्ष समीक्षा चाहते हैं।

मनिहारी गंगा तट पर रिवर फ्रंट का निर्माण कब पूरा होगा और बाढ़-कटाव के बीच इसकी सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान क्या होगा, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं। परियोजना के भविष्य को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता तभी दूर हो सकेगी, जब स्थल चयन, तकनीकी सर्वे और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आएगा।

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