किशनगंज मदरसा नियुक्ति: किशनगंज के ठाकुरगंज नगर पंचायत क्षेत्र स्थित मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन, मदरसा संख्या-528 में तीन शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इन नियुक्तियों को लेकर शिकायत सामने आने के बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी यानी BEO स्तर से जांच कराई गई। जांच पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंप दी गई है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी के स्तर से फैसला लिया जाना है।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जांच के दौरान शिक्षकों के योगदान और उनकी उपस्थिति दर्ज किए जाने की तारीख को लेकर एक महत्वपूर्ण विसंगति सामने आने की बात कही गई है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों शिक्षकों ने मदरसे में 26 सितंबर 2026 को योगदान दिया, जबकि हाजिरी पंजी में उनकी उपस्थिति 1 सितंबर 2026 से ही दर्ज पाई गई। यानी जिस तारीख को शिक्षकों ने औपचारिक रूप से योगदान दिया, उससे करीब 25 दिन पहले की तारीख से ही उनकी उपस्थिति दर्ज होने का मामला सामने आया है।
अब इसी बिंदु को लेकर नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अंतिम तौर पर इन नियुक्तियों में कोई नियम उल्लंघन हुआ है या नहीं, इस पर विभागीय स्तर से अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई। आवेदक मोहम्मद मुख्तार ने जिलाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और स्थानीय विधायक गोपाल अग्रवाल को आवेदन देकर मदरसे में तीन शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि मदरसे में पहले से तीन शिक्षक कार्यरत थे और तीन पद रिक्त थे। इन्हीं रिक्त पदों पर कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर एक कमेटी बनाकर तीन लोगों की नियुक्ति कर दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई और चयन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल हैं।
आवेदन में नियुक्ति के दौरान कथित तौर पर पैसों के लेन-देन का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, यह आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि या अंतिम सत्यापन का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है। यही वजह है कि पूरे मामले में अब विभागीय जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से मांग की थी कि नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कराई जाए। इसमें विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया, चयन समिति के गठन, अभ्यर्थियों के चयन, नियुक्ति पत्र और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच शामिल है। साथ ही शिकायत में यह भी कहा गया है कि अगर नियुक्तियां नियमों के विपरीत पाई जाती हैं तो उन्हें रद्द करने की कार्रवाई की जाए।
शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की जिम्मेदारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अवधेश कुमार को दी गई। BEO ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंप दी है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, तीनों शिक्षकों की बहाली बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना के पत्रांक-94, दिनांक 5 जनवरी 2026 के आधार पर की गई थी। यानी नियुक्तियों के लिए मदरसा शिक्षा बोर्ड से संबंधित आदेश या पत्र का हवाला दिया गया था। लेकिन जांच के दौरान हाजिरी पंजी में दर्ज तारीख को लेकर जो विसंगति सामने आई, उसने पूरी प्रक्रिया पर एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि तीनों शिक्षक 26 सितंबर 2026 को मदरसे में योगदान देने पहुंचे। लेकिन हाजिरी पंजी की जांच में उनकी उपस्थिति 1 सितंबर 2026 से दर्ज पाई गई। सामान्य तौर पर किसी कर्मचारी की उपस्थिति उसके वास्तविक योगदान के बाद दर्ज होने की उम्मीद की जाती है। ऐसे में योगदान से पहले की तारीख से उपस्थिति दर्ज होने का मामला विभागीय जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सवाल यह है कि हाजिरी पंजी में 1 सितंबर से उपस्थिति दर्ज होने की वजह क्या थी? क्या यह रिकॉर्ड तैयार करने में हुई कोई प्रशासनिक या लिपिकीय गलती थी, या इसके पीछे नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा कोई दूसरा कारण था? इन सवालों का जवाब आगे की विभागीय जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल से ही साफ हो सकेगा।
इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों को फिलहाल अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। नियुक्ति में पैसों के लेन-देन जैसे गंभीर आरोपों पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए ठोस दस्तावेज और सक्षम स्तर की जांच जरूरी होगी। वहीं, हाजिरी पंजी में तारीख की विसंगति जांच रिपोर्ट में दर्ज एक बिंदु है, जिस पर विभाग को अपना पक्ष और स्पष्टीकरण देखना होगा।
अब पूरा मामला जिला शिक्षा पदाधिकारी के स्तर पर पहुंच चुका है। BEO की रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों और मदरसे से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जानी है। विभाग चाहे तो संबंधित पक्षों से स्पष्टीकरण मांग सकता है और नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड की विस्तृत जांच भी कर सकता है।
स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर इसलिए भी चर्चा है क्योंकि मदरसे में शिक्षकों की नियुक्ति सीधे तौर पर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर उठने वाले सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना जरूरी माना जा रहा है।
फिलहाल, जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद गेंद अब जिला शिक्षा विभाग के पाले में है। देखना होगा कि जिला शिक्षा पदाधिकारी इस रिपोर्ट पर क्या निर्णय लेते हैं। क्या हाजिरी पंजी में सामने आई तारीख की विसंगति को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा? क्या नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी जांच होगी? और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर विभाग का क्या रुख रहता है?

इन सभी सवालों का जवाब आगे होने वाली कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।
कुल मिलाकर, ठाकुरगंज के मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन में तीन शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विभागीय जांच के चरण तक पहुंच चुका है। शिकायतकर्ता की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया और कथित लेन-देन को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि BEO की जांच में शिक्षकों के योगदान और हाजिरी दर्ज होने की तारीख में अंतर सामने आने की बात कही गई है।
अब सबकी नजर जिला शिक्षा पदाधिकारी के अगले फैसले पर है। विभागीय स्तर पर अगर दस्तावेजों की विस्तृत जांच होती है, तो यह साफ हो सकता है कि नियुक्ति प्रक्रिया में वास्तव में कोई नियम संबंधी कमी थी या हाजिरी पंजी की तारीख केवल रिकॉर्ड संबंधी त्रुटि का परिणाम थी।
फिलहाल इतना जरूर है कि किशनगंज के ठाकुरगंज स्थित इस मदरसे में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद और गंभीर चर्चा में आ गया है। अब आगे की कार्रवाई ही तय करेगी कि इन नियुक्तियों को लेकर उठे सवालों का समाधान किस तरह होता है।










