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किशनगंज रमजान नदी: रमजान नदी को बचाने की पहल, सांसद जावेद ने नमामि गंगे मिशन को लिखा पत्र

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किशनगंज रमजान नदी: किशनगंज की ऐतिहासिक रमजान नदी को अतिक्रमण और जलजमाव की समस्या से बचाने के लिए अब पहल शुरू हो गई है। नदी के संरक्षण और उसके पुराने स्वरूप को बहाल करने की मांग को लेकर किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने नमामि गंगे मिशन के महानिदेशक को पत्र लिखा है। सांसद ने नदी का वैज्ञानिक और भौतिक सीमांकन कराने के साथ-साथ नदी के बहाव क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण को हटाने और प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करने की मांग की है।

रमजान नदी किशनगंज शहर और आसपास के इलाकों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण जलधारा मानी जाती रही है। लेकिन पिछले कई वर्षों में नदी के अलग-अलग हिस्सों में अतिक्रमण और जल निकासी से जुड़ी समस्याओं के कारण इसकी स्थिति प्रभावित हुई है। सांसद का कहना है कि करीब दो दशकों से नदी के विभिन्न हिस्सों में अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है। इसका सीधा असर नदी के प्राकृतिक प्रवाह और जलधारण क्षमता पर पड़ रहा है।

सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने अपने पत्र में इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदी का विस्तृत सर्वेक्षण और सीमांकन कराने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि नदी का वास्तविक क्षेत्र कितना है, उसका प्राकृतिक बहाव क्षेत्र कौन-कौन से हिस्सों से होकर गुजरता है और किन स्थानों पर अतिक्रमण के कारण जल प्रवाह बाधित हो रहा है।

किशनगंज रमजान नदी
किशनगंज रमजान नदी

अतिक्रमण से प्रभावित हो रहा प्राकृतिक प्रवाह

रमजान नदी को लेकर सामने आ रही प्रमुख चिंताओं में नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण भी शामिल है। नदी के आसपास निर्माण और अन्य प्रकार के अतिक्रमण के कारण पानी के प्राकृतिक रास्ते में रुकावट आने की बात कही जा रही है। जब नदी का प्रवाह क्षेत्र सीमित हो जाता है तो बारिश के दौरान पानी के तेजी से निकलने की क्षमता भी प्रभावित होती है।

सांसद ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नदी के बहाव क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण की पहचान कर उसे हटाने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने वैज्ञानिक और भौतिक सीमांकन को जरूरी बताया है। सीमांकन के बाद नदी की वास्तविक सीमा और बाढ़ क्षेत्र को चिह्नित किया जा सकेगा, जिससे भविष्य में नदी के क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण को रोकने की दिशा में भी कार्रवाई की जा सकती है।

मानसून में बढ़ जाती है परेशानी

किशनगंज में मानसून के दौरान भारी बारिश होने पर जलजमाव की समस्या कई इलाकों में देखने को मिलती है। बारिश के दौरान जब पानी की मात्रा बढ़ती है तो प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में यदि नदी का प्रवाह बाधित हो तो पानी की निकासी प्रभावित होने की आशंका रहती है।

रमजान नदी के संदर्भ में भी सांसद ने इसी समस्या को प्रमुखता से उठाया है। उनके मुताबिक, नदी की धारा और बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट आ रही है। इसका असर नदी की जलधारण क्षमता पर भी पड़ रहा है।

भारी बारिश के समय नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने पर शहर के कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बनने की बात कही गई है। जलजमाव का असर आम लोगों की आवाजाही, स्थानीय कारोबार और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। ऐसे में नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करना केवल नदी संरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर की जल निकासी व्यवस्था से जुड़ा विषय भी माना जा रहा है।

किशनगंज रमजान नदी
किशनगंज रमजान नदी

पुराने जलमार्ग को बहाल करने की मांग

सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने रमजान नदी को उसके पुराने स्वरूप में लाने के लिए एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है। उन्होंने रमजान नदी को डोंक नदी से जोड़ने वाले पुराने जलमार्ग को दोबारा बहाल करने की मांग की है।

पुराने जलमार्ग की बहाली का उद्देश्य नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह को मजबूत करना बताया गया है। यदि पुराने जलमार्ग की स्थिति और उपयोगिता तकनीकी सर्वेक्षण में उपयुक्त पाई जाती है, तो इसे पुनर्जीवित करने से पानी की निकासी और नदी के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस दिशा में किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले तकनीकी और पर्यावरणीय अध्ययन की जरूरत होगी। नदी के पुराने मार्ग, वर्तमान भौगोलिक स्थिति, आसपास की आबादी और निर्माण की स्थिति का अध्ययन करने के बाद ही किसी परियोजना को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण पर जोर

सांसद ने केवल अतिक्रमण हटाने की मांग नहीं की है, बल्कि नदी के संरक्षण और कायाकल्प के लिए वैज्ञानिक तरीके से पूरी प्रक्रिया अपनाने की बात कही है। इसके तहत नदी की वास्तविक सीमा का निर्धारण, बहाव क्षेत्र का अध्ययन, अतिक्रमण की पहचान, जलधारण क्षमता का आकलन और पुराने जलमार्ग की स्थिति का अध्ययन महत्वपूर्ण हो सकता है।

नदी संरक्षण की किसी भी योजना के लिए यह जरूरी है कि उसके प्राकृतिक स्वरूप और आसपास के पर्यावरण को ध्यान में रखा जाए। साथ ही स्थानीय लोगों की जरूरतों और लंबे समय से मौजूद निर्माण एवं बस्तियों की स्थिति को भी समझना होगा।

किशनगंज रमजान नदी
किशनगंज रमजान नदी

नमामि गंगे मिशन से कार्रवाई की उम्मीद

रमजान नदी के संरक्षण के लिए सांसद ने नमामि गंगे मिशन के महानिदेशक से आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है। उन्होंने नदी के सौंदर्यीकरण और संरक्षण को मिशन के तहत आगे बढ़ाने की मांग की है।

अब इस पत्र के बाद संबंधित विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। यदि नदी का वैज्ञानिक सर्वेक्षण और सीमांकन कराया जाता है, तो इससे नदी की वास्तविक स्थिति की विस्तृत तस्वीर सामने आ सकती है। इसके बाद अतिक्रमण वाले क्षेत्रों की पहचान और जल प्रवाह को बहाल करने की दिशा में ठोस योजना तैयार की जा सकती है।

रमजान नदी को लेकर उठी यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब शहरी क्षेत्रों में जल निकासी और जलजमाव की समस्या लगातार गंभीर विषय बनी हुई है। किसी भी नदी का प्राकृतिक प्रवाह केवल उसके अस्तित्व के लिए ही जरूरी नहीं होता, बल्कि वह आसपास के क्षेत्रों की जल निकासी व्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा होता है।

किशनगंज की रमजान नदी के मामले में भी अतिक्रमण हटाने, पुराने जलमार्ग को बहाल करने और नदी की सीमा निर्धारित करने की मांग इसी व्यापक समस्या से जुड़ी हुई है।

फिलहाल सांसद की ओर से नमामि गंगे मिशन को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की गई है। अब संबंधित विभाग इस प्रस्ताव का तकनीकी स्तर पर किस तरह आकलन करता है और नदी संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

अगर रमजान नदी का वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन होता है, अतिक्रमण की पहचान कर कार्रवाई की जाती है और पुराने जलमार्ग को लेकर तकनीकी रूप से उचित योजना तैयार होती है, तो इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बेहतर बनाने और जलजमाव की समस्या को कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है। फिलहाल स्थानीय लोगों और नदी संरक्षण से जुड़े लोगों की नजर प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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