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गलगलिया पोस्ट ऑफिस विवाद: गलगलिया पोस्ट ऑफिस को मिनी ब्रांच बनाए जाने पर बवाल, लोगों ने जताया विरोध

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गलगलिया पोस्ट ऑफिस विवाद: किशनगंज जिले के गलगलिया मुख्य बाजार में शनिवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब स्थानीय लोगों और खाताधारकों ने पोस्ट ऑफिस व्यवस्था में किए गए बदलाव के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने गलगलिया पोस्ट ऑफिस को ब्रांच पोस्ट ऑफिस से मिनी पोस्ट ऑफिस में बदले जाने के फैसले को आम जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह पोस्ट ऑफिस लंबे समय से पूरे क्षेत्र की डाक और बैंकिंग सेवाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। लेकिन इसके दर्जे को घटाकर मिनी पोस्ट ऑफिस किए जाने से हजारों खाताधारकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि यह निर्णय बिना जमीनी स्थिति को समझे और गलत आंकड़ों के आधार पर लिया गया है, जिससे आम जनता सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।

स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार विभागीय अधिकारियों को आवेदन और शिकायतें दी गई थीं। लोगों ने पिन कोड बरकरार रखने की मांग की थी, जिसे तो बनाए रखा गया, लेकिन इसके बावजूद पोस्ट ऑफिस की सेवाओं को सीमित कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि पहले जैसी पूरी डाक सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

गलगलिया पोस्ट ऑफिस विवाद
गलगलिया पोस्ट ऑफिस विवाद

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, गलगलिया क्षेत्र में इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के करीब 10 हजार खाताधारक हैं, जो नियमित रूप से इस पोस्ट ऑफिस से जुड़ी सेवाओं का उपयोग करते हैं। लेकिन विभागीय स्तर पर केवल 2 हजार खातों का हवाला देकर पोस्ट ऑफिस की स्थिति को बदला गया, जिसे लोग पूरी तरह गलत और भ्रामक बता रहे हैं।

लोगों का कहना है कि इस बदलाव के बाद डाक सेवाओं पर सीधा असर पड़ा है। डाक वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई है और समय पर पत्र, पार्सल और अन्य जरूरी डाक सामग्री लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावा बचत खाता, आरडी, एफडी, स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री, मनीऑर्डर और पेंशन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में भी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। बुजुर्गों और महिलाओं को बैंकिंग और डाक सेवाओं के लिए बार-बार बाजार आना पड़ता है। कई लोगों ने बताया कि पहले सभी सुविधाएं आसानी से स्थानीय पोस्ट ऑफिस में मिल जाती थीं, लेकिन अब सेवाएं सीमित होने से उन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ रहा है।

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जोरदार नारेबाजी की और प्रशासन तथा डाक विभाग से फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि यह निर्णय आम जनता के हित में नहीं है और इससे गरीब, किसान और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

गलगलिया पोस्ट ऑफिस विवाद
गलगलिया पोस्ट ऑफिस विवाद

मुखिया प्रतिनिधि मुन्ना सिंह ने इस मामले को लेकर गंभीर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कई बार विभागीय अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गलगलिया सब पोस्ट ऑफिस की सभी सेवाएं बहाल नहीं की गईं, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

स्थानीय लोगों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो वे अपने बचत खाते, आरडी, एफडी और अन्य योजनाओं को बंद कराने के लिए मजबूर होंगे। लोगों का कहना है कि जब उन्हें उचित सेवाएं ही नहीं मिल रही हैं, तो वे अपनी जमा पूंजी को ऐसे सिस्टम में क्यों रखें।

गलगलिया पोस्ट ऑफिस (पिन कोड 855106) की सेवाएं सीमित होने से पूरे क्षेत्र में असंतोष का माहौल है। लोगों की मांग है कि पहले की तरह सभी डाक सेवाएं बहाल की जाएं और इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि एक छोटे से बदलाव ने पूरे क्षेत्र की डाक और बैंकिंग व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि पहले यह पोस्ट ऑफिस न केवल डाक सेवाओं का केंद्र था, बल्कि यह लोगों के लिए बैंकिंग सुविधा का भी मुख्य माध्यम था। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र था, जहां वे आसानी से अपने सभी काम निपटा लेते थे।

अब मिनी पोस्ट ऑफिस बनने के बाद कर्मचारियों की संख्या और संसाधनों में भी कमी आ गई है, जिससे सेवाओं की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई हैं। कई बार लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और फिर भी काम पूरा नहीं हो पाता।

गलगलिया पोस्ट ऑफिस विवाद
गलगलिया पोस्ट ऑफिस विवाद

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में डाक सेवाओं को सीमित करने से सीधे तौर पर आम जनता प्रभावित होती है, खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लोग। ऐसे में किसी भी बदलाव से पहले जमीनी स्थिति और उपयोगकर्ताओं की संख्या का सही आकलन किया जाना जरूरी होता है।

इस पूरे विवाद ने डाक विभाग की कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

फिलहाल गलगलिया क्षेत्र में तनाव और असंतोष का माहौल बना हुआ है। लोग लगातार प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकलेगा। डाक सेवाओं की बहाली को लेकर स्थानीय जनता की निगाहें अब अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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