बेखौफ जुबां बे बाक अंदाज

पूर्णिया रोजगार मेला: पूर्णिया रोजगार मेले में हजारों युवाओं को नौकरी, 50 युवतियों को वर्क फ्रॉम होम का मौका

Share Now :

WhatsApp

पूर्णिया रोजगार मेला: पूर्णिया के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित रोजगार मेले में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। रोजगार की उम्मीद लेकर पहुंचे हजारों युवक-युवतियों के लिए यह मेला एक बड़े अवसर के रूप में सामने आया। पूर्णिया के अलावा कोसी और सीमांचल के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में युवा यहां पहुंचे और विभिन्न कंपनियों में नौकरी के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया।

सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के नेतृत्व में आयोजित इस रोजगार मेले में 20 हजार से ज्यादा युवक-युवतियों ने रोजगार के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी से साफ दिखाई दिया कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की कितनी बड़ी जरूरत है।

पूर्णिया रोजगार मेला
पूर्णिया रोजगार मेला

रोजगार मेले में देश की 38 प्रतिष्ठित कंपनियों ने हिस्सा लिया। इन कंपनियों ने अलग-अलग पदों के लिए युवाओं के इंटरव्यू लिए। कई अभ्यर्थियों को इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मौके पर ही ऑफर लेटर और जॉइनिंग लेटर भी दिए गए। इससे नौकरी की तलाश में पहुंचे युवाओं में काफी उत्साह देखने को मिला।

इस रोजगार मेले की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यहां अलग-अलग योग्यता और क्षमता रखने वाले युवाओं के लिए विभिन्न तरह के रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। कंपनियों की ओर से अलग-अलग पदों के लिए वेतन पैकेज भी अलग-अलग रखा गया था। चयनित अभ्यर्थियों को 12 हजार रुपये से लेकर 75 से 80 हजार रुपये प्रतिमाह तक के वेतन पैकेज की पेशकश की गई।

यानी रोजगार मेले में केवल शुरुआती स्तर की नौकरियों के अवसर ही नहीं थे, बल्कि योग्य और अनुभवी अभ्यर्थियों के लिए बेहतर वेतन वाली नौकरियों के विकल्प भी मौजूद रहे। इससे युवाओं को अपने कौशल और योग्यता के अनुसार रोजगार चुनने का अवसर मिला।

इस पूरे रोजगार मेले में महिलाओं की भागीदारी भी खास तौर पर देखने को मिली। खासकर उन युवतियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया, जो किसी कारण से घर से बाहर जाकर नौकरी नहीं कर सकतीं। रोजगार मेले में पूर्णिया की 50 युवतियों को वर्क फ्रॉम होम नौकरी के लिए चयन पत्र दिए गए।

इन युवतियों को घर से काम करने का अवसर मिलेगा और उन्हें करीब 15 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलने की बात कही गई है। वर्क फ्रॉम होम का यह विकल्प उन महिलाओं और युवतियों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकता है, जो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ रोजगार करना चाहती हैं।

आज के समय में वर्क फ्रॉम होम के जरिए रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर स्थानीय स्तर पर युवतियों को घर से काम करने की सुविधा के साथ नौकरी मिलती है, तो इससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सकती है। साथ ही परिवार और रोजगार के बीच संतुलन बनाने में भी आसानी हो सकती है।

रोजगार मेले में युवाओं की भीड़ इतनी ज्यादा थी कि आयोजन स्थल पर लंबे समय तक अभ्यर्थियों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। बड़ी संख्या में लोग अपने दस्तावेज और शैक्षणिक प्रमाणपत्र लेकर नौकरी की उम्मीद में पहुंचे थे।

पूर्णिया रोजगार मेला
पूर्णिया रोजगार मेला

इस दौरान एक महिला भी अपने दो छोटे बच्चों को साथ लेकर रोजगार मेले में अपनी बारी का इंतजार करती नजर आई। यह तस्वीर रोजगार की जरूरत और नौकरी पाने की उम्मीद को बयां करती दिखाई दी। इससे यह भी पता चलता है कि रोजगार का अवसर पाने के लिए लोग कितनी मुश्किलों के बावजूद प्रयास कर रहे हैं।

आयोजकों के मुताबिक, रोजगार मेले में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए इसे एक दिन और बढ़ाने का फैसला किया गया। इससे उन युवाओं के लिए भी अवसर बना रहा, जो पहले दिन किसी कारण से इंटरव्यू या रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे।

रोजगार मेले को एक दिन बढ़ाने का निर्णय उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो नौकरी की तलाश में यहां पहुंचे थे। इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन होने के बाद अतिरिक्त दिन मिलने से अधिक युवाओं को कंपनियों के सामने अपनी योग्यता रखने का अवसर मिल सकता है।

सांसद पप्पू यादव ने रोजगार मेले को लेकर कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बेरोजगारी को कम करना और युवाओं के पलायन को रोकना है। सीमांचल और कोसी क्षेत्र से बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों और राज्यों का रुख करते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि रोजगार केवल एक व्यक्ति की आर्थिक स्थिति बदलने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे पूरे परिवार की स्थिति पर असर पड़ता है। अगर किसी युवा को अपने ही क्षेत्र में अच्छी नौकरी मिलती है, तो उसे दूसरे शहर में जाकर रोजगार तलाशने की जरूरत कम हो सकती है।

पूर्णिया रोजगार मेला
पूर्णिया रोजगार मेला

पप्पू यादव ने यह भी कहा कि पूर्णिया में हर छह महीने पर इसी तरह रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे। उनका लक्ष्य युवाओं को लगातार रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि आने वाले रोजगार मेलों में 20 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक के पैकेज वाली नौकरियों से युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

अगर यह पहल नियमित रूप से आगे बढ़ती है, तो क्षेत्र के युवाओं को बार-बार रोजगार के अवसर तलाशने के लिए दूर जाने की जरूरत कम हो सकती है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर कंपनियों और नौकरी चाहने वाले युवाओं के बीच सीधा संपर्क भी बढ़ सकता है।

सांसद ने आगे बताया कि रोजगार मेले का विस्तार दूसरे क्षेत्रों तक भी किया जाएगा। आने वाले समय में पटना और सहरसा प्रमंडलों में भी रोजगार मेले आयोजित करने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल पूर्णिया या सीमांचल के युवाओं तक रोजगार के अवसर सीमित रखना नहीं, बल्कि बिहार के दूसरे हिस्सों के युवाओं को भी कंपनियों से जोड़ना है।

इसके साथ ही अगले एक साल में बिहार के करीब तीन लाख युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर रोजगार मेलों का आयोजन और कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।

हालांकि रोजगार मेले में बड़ी संख्या में युवाओं का पहुंचना अपने आप में यह संकेत देता है कि बिहार में रोजगार की मांग कितनी बड़ी है। हजारों युवाओं का एक ही जगह नौकरी के लिए पहुंचना यह बताता है कि युवा अपने राज्य और अपने क्षेत्र में रोजगार के अवसर चाहते हैं।

युवाओं के लिए ऐसे रोजगार मेले इसलिए भी महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि यहां एक ही स्थान पर कई कंपनियों से संपर्क करने का मौका मिलता है। सामान्य तौर पर नौकरी तलाशने वाले युवाओं को अलग-अलग कंपनियों के कार्यालयों और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग जगह जाना पड़ता है। रोजगार मेले इस प्रक्रिया को काफी हद तक आसान बना सकते हैं।

वहीं, कंपनियों के लिए भी यह एक ऐसा मंच बनता है जहां उन्हें बड़ी संख्या में संभावित कर्मचारियों से सीधे मिलने का अवसर मिलता है। इससे भर्ती प्रक्रिया में समय और संसाधनों की बचत हो सकती है।

पूर्णिया के रोजगार मेले में ऑफर लेटर और जॉइनिंग लेटर मिलने से कई युवाओं के लिए नौकरी की तलाश खत्म होने की उम्मीद जगी है। वहीं 50 युवतियों को वर्क फ्रॉम होम का अवसर मिलना इस आयोजन की एक खास उपलब्धि के तौर पर सामने आया है।

कुल मिलाकर पूर्णिया का यह रोजगार मेला क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार की दिशा में एक बड़ा अवसर बनकर सामने आया। 20 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन, 38 कंपनियों की भागीदारी और अलग-अलग वेतन पैकेज वाली नौकरियों ने युवाओं को कई विकल्प दिए। वहीं 50 युवतियों को घर से काम करने का अवसर मिलना महिला रोजगार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

अब आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि इस रोजगार मेले से कितने युवाओं को स्थायी रूप से नौकरी मिलती है और कितने अभ्यर्थी अपनी नई नौकरी में शामिल हो पाते हैं। साथ ही हर छह महीने में पूर्णिया में रोजगार मेला आयोजित करने और पटना व सहरसा प्रमंडल तक इस पहल को पहुंचाने की योजना कितनी प्रभावी साबित होती है, यह भी देखने वाली बात होगी।

फिलहाल पूर्णिया के इंदिरा गांधी स्टेडियम से निकला संदेश साफ है कि युवा रोजगार चाहते हैं और उन्हें अपने ही क्षेत्र में अवसर मिलें तो पलायन को कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। अगर रोजगार मेलों की यह पहल नियमित रूप से चलती है और निजी कंपनियों के साथ मजबूत तालमेल बनता है, तो आने वाले समय में बिहार के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

7 Views

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Other News

error: JEB News is copyright content