पूर्णिया में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शहर में अब कचरे को सिर्फ गीले और सूखे कचरे के तौर पर अलग करने के बजाय चार अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर उसके उचित प्रबंधन की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्रशासन की ओर से जनप्रतिनिधियों और नगर निकायों से जुड़े अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
शहर के प्रेक्षागृह में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। अभियान के दौरान शहर और जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता गतिविधियां चलाने के साथ-साथ लोगों को कचरे के सही तरीके से संग्रह और छंटाई के बारे में जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 और कचरे के प्रबंधन की नई व्यवस्था के बारे में जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को जानकारी देना था। प्रशासन का मानना है कि अगर कचरे को उसके स्रोत यानी घर, स्कूल, बाजार और अन्य स्थानों पर ही सही तरीके से अलग किया जाए, तो उसके निस्तारण की प्रक्रिया को काफी आसान बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में पूर्णिया नगर निगम की महापौर विभा कुमारी और उप महापौर के साथ सभी वार्डों के पार्षद शामिल हुए। इसके अलावा जिले के अलग-अलग नगर निकायों के मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद, वार्ड सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद रहे।

कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार, डीडीसी राजीव कुमार और एसडीएम लॉ एंड ऑर्डर राजकुमार गुप्ता समेत अभियान के संचालन से जुड़ी एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की। इससे पहले वंदे मातरम और राष्ट्रगान हुआ। कार्यक्रम के दौरान ‘हरित पूर्णिया’ के संदेश को भी प्रमुखता दी गई। इसी क्रम में अतिथियों को पौधे भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।
जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि स्वच्छता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को नई व्यवस्था की पूरी जानकारी होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 के प्रमुख प्रावधानों को समझने के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का कहना है कि सिर्फ नगर निकायों या सफाई कर्मियों के प्रयास से शहर को पूरी तरह स्वच्छ रखना संभव नहीं है। इसके लिए लोगों को अपने घर से ही जिम्मेदारी निभानी होगी। अगर घर से निकलने वाले कचरे को सही श्रेणी में अलग किया जाए, तो उसके संग्रह, परिवहन और निस्तारण की पूरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान अभियान से जुड़ी एजेंसी के अधिकारियों ने कचरा संग्रह, छंटाई और निस्तारण की नई व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि घरों, स्कूलों, बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाले कचरे को बिना छंटाई के एक साथ जमा करने की बजाय उसकी प्रकृति के आधार पर अलग किया जाना जरूरी है।
इसी दिशा में अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसके प्रबंधन की तैयारी की जा रही है। पूर्णिया नगर निगम की महापौर विभा कुमारी ने बताया कि पहले आम तौर पर कचरे को दो प्रमुख श्रेणियों यानी गीले और सूखे कचरे में बांटकर देखा जाता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत कचरे को चार श्रेणियों में अलग-अलग करने पर जोर दिया जा रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि अलग-अलग तरह के कचरे को उसके उपयोग और निस्तारण की प्रक्रिया के अनुसार संभाला जा सके। इससे पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करने, जैविक कचरे से खाद बनाने और अन्य कचरे के सुरक्षित निस्तारण में मदद मिल सकती है।
गीले कचरे को लेकर भी प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक किया जाएगा। घरों और अन्य स्थानों से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल जैविक खाद बनाने में किया जा सकता है। इस तरह कचरे को सिर्फ बेकार सामग्री मानने के बजाय उसका उपयोगी तरीके से प्रबंधन किया जा सकता है।
वहीं, कचरे को बिना छंटाई के सड़क किनारे, खाली जगहों या खुले स्थानों पर फेंकने से कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इससे आसपास गंदगी फैलती है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक कचरा जमा रहने से लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
प्रशासन अब ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के माध्यम से लोगों तक इसी संदेश को पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। अभियान के दौरान स्वच्छता को केवल सफाई कर्मियों की जिम्मेदारी न मानकर इसे सामूहिक जिम्मेदारी बनाने पर जोर दिया जाएगा।
शहर में जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को बताया जाएगा कि कचरे की छंटाई की शुरुआत घर से ही होनी चाहिए। परिवार के स्तर पर अगर अलग-अलग प्रकार के कचरे को अलग रखा जाए, तो उसे संग्रह करने वाली व्यवस्था के लिए भी आसानी होगी।
स्कूलों और बाजारों में भी जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों और युवाओं को स्वच्छता अभियान से जोड़कर उन्हें कचरे को सही तरीके से अलग करने और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फैलाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

प्रशासन का मानना है कि स्वच्छता अभियान तभी सफल होगा, जब लोगों की आदतों में बदलाव आएगा। केवल अभियान की अवधि के दौरान सफाई करने के बजाय नियमित रूप से कचरे की छंटाई और उचित निस्तारण की व्यवस्था को अपनाना जरूरी होगा।
नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिए जाने का एक उद्देश्य यह भी है कि वे अपने-अपने वार्डों में लोगों को इस नई व्यवस्था के बारे में समझा सकें। वार्ड स्तर पर जागरूकता बढ़ने से कचरे के संग्रह और प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
पूर्णिया में बढ़ती आबादी और शहरी गतिविधियों के साथ कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले समय में वैज्ञानिक और व्यवस्थित कचरा प्रबंधन की जरूरत और बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन नई व्यवस्था को लेकर तैयारी कर रहा है।
‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। इस दौरान स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार बनाना और कचरे को सही तरीके से अलग करने की आदत विकसित करना है।
प्रशासन की ओर से यह भी संदेश दिया जा रहा है कि स्वच्छ शहर बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी विभागों की नहीं है। आम नागरिकों की भागीदारी इसके लिए बेहद जरूरी है। अगर लोग अपने घर से निकलने वाले कचरे को सही तरीके से अलग करें और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाएं, तो नगर निकायों के लिए भी सफाई व्यवस्था को संचालित करना आसान होगा।
फिलहाल पूर्णिया में नई कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर प्रशिक्षण का दौर शुरू हो गया है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को नई नियमावली और कचरे की चार श्रेणियों में छंटाई की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है।
अब प्रशासन की चुनौती इस व्यवस्था को प्रशिक्षण कक्ष से निकालकर जमीन पर लागू करने की होगी। लोगों की जागरूकता, नगर निकायों की सक्रियता और नियमित निगरानी के जरिए ही इस अभियान को प्रभावी बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, पूर्णिया में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान के तहत कचरा प्रबंधन को नई दिशा देने की तैयारी है। अब जोर सिर्फ कचरा उठाने पर नहीं, बल्कि कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग करने और उसके बेहतर निस्तारण पर रहेगा। अगर प्रशासन और आम लोगों की भागीदारी के साथ यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।










