बदहाल सड़क: पूर्णिया जिले के बायसी प्रखंड की ताराबारी पंचायत में सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। लंबे समय से खराब सड़क, जगह-जगह बने गड्ढों और बारिश के बाद जमा होने वाले कीचड़ से परेशान ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकालकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सड़क की स्थिति को लेकर प्रशासन और व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए सवाल उठाए।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पंचायत में सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब है। बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन जाते हैं और उनमें पानी व कीचड़ जमा हो जाता है। ऐसे रास्ते से पैदल चलने के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहनों को निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
पैदल मार्च के दौरान ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली पर अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। लोगों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि आजाद भारत में शायद ही किसी ने ऐसी ‘खूबसूरत’ सड़क देखी होगी। प्रदर्शनकारियों ने सड़क की तुलना ताजमहल की खूबसूरती से करते हुए व्यवस्था पर कटाक्ष किया। ग्रामीणों का कहना था कि अगर विकास का यही मॉडल है, तो उनकी सड़क को भी इसी ‘खूबसूरती’ का उदाहरण माना जाना चाहिए।

ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क की खराब हालत का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ बढ़ जाने से लोगों की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है।
सबसे ज्यादा मुश्किल पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों को होती है। गड्ढों और कीचड़ के कारण वाहन फिसलने का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की हालत ऐसी है कि कई बार थोड़ी दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से इसकी मरम्मत और निर्माण की मांग की जाती रही है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि बार-बार समस्या बताने और संबंधित अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने के बावजूद उन्हें ठोस कार्रवाई का इंतजार है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने चुनावी वादों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि चुनाव के समय सड़क, नाली, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद वही समस्याएं फिर सामने खड़ी दिखाई देती हैं।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी उन्हें आंदोलन करना पड़ रहा है, तो विकास के दावों का लाभ आखिर जमीन पर कब दिखाई देगा। लोगों ने कहा कि सड़क की समस्या केवल आने-जाने की परेशानी नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र की सामान्य गतिविधियों पर पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की कि सड़क की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाए और जल्द से जल्द निर्माण या मरम्मत का काम शुरू किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि केवल अस्थायी तौर पर मिट्टी या गिट्टी डालने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्हें ऐसी सड़क चाहिए, जिस पर सालभर सुरक्षित तरीके से आवाजाही हो सके।
पैदल मार्च में शामिल ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सड़क खराब होने का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। बारिश के दिनों में बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। इसी तरह बीमार लोगों को इलाज के लिए बाहर ले जाने में भी रास्ते की स्थिति बाधा बनती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में खराब सड़क गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों ने पंचायत के लोगों से भी एकजुट होने की अपील की। उनका कहना है कि अगर सभी लोग मिलकर अपनी समस्या को मजबूती से उठाएंगे, तभी प्रशासन तक उनकी आवाज प्रभावी तरीके से पहुंचेगी। लोगों ने स्पष्ट किया कि वे केवल आश्वासन सुनकर शांत नहीं बैठना चाहते।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतंत्र में जनता को अपनी समस्याओं और अधिकारों के लिए आवाज उठाने का पूरा हक है। इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पैदल मार्च के जरिए अपनी नाराजगी सामने रखी है। ग्रामीणों ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सड़क की समस्या के समाधान की मांग को लेकर है।
ताराबारी पंचायत के लोगों ने कहा कि वे लंबे समय से खराब सड़क का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान जब कीचड़ और पानी सड़क को और खराब कर देते हैं, तब परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण या बेहतर तरीके से मरम्मत होने पर क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
विरोध के दौरान ग्रामीणों ने जिस तरह सड़क को ‘खूबसूरत’ बताकर व्यंग्य किया, वह उनके गुस्से और नाराजगी का प्रतीक रहा। लोगों का कहना था कि सड़क की वास्तविक हालत देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि यहां से गुजरने वालों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग सड़क का निरीक्षण करे, उसकी स्थिति का आकलन करे और निर्माण या मरम्मत के लिए जल्द कदम उठाए। ग्रामीणों ने यह भी संकेत दिया कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आगे भी अपनी मांग को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।
फिलहाल ताराबारी पंचायत की सड़क की बदहाली को लेकर निकाला गया पैदल मार्च स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने अपने विरोध के जरिए यह सवाल उठाया है कि आखिर बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्हें कब तक इंतजार करना पड़ेगा।
सड़क जैसी बुनियादी सुविधा किसी भी ग्रामीण क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी होती है। अच्छी सड़क से लोगों की आवाजाही आसान होती है और स्कूल, अस्पताल, बाजार तथा अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच बेहतर होती है। ऐसे में ताराबारी पंचायत के ग्रामीण अब सड़क के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए। पैदल मार्च के जरिए उन्होंने प्रशासन का ध्यान सड़क की समस्या की ओर खींचा है और साफ किया है कि जब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।










