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वित्तीय साक्षरता जागरूकता: अमौर में वित्तीय साक्षरता सप्ताह, नुक्कड़ नाटक से ग्रामीणों को किया जागरूक; बैंकिंग और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी

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वित्तीय साक्षरता जागरूकता: पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड में ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा और सरकारी वित्तीय योजनाओं के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। बिहार ग्रामीण बैंक की अमौर शाखा की ओर से वित्तीय साक्षरता जागरूकता एवं सतर्कता सप्ताह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को बैंकिंग से जुड़ी जरूरी जानकारियां बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाई गईं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार ग्रामीण बैंक की अमौर शाखा की शाखा प्रबंधक कुसुम किशोर ने की। इस दौरान बैंक से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और बैंकिंग सेवाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त की।

वित्तीय साक्षरता जागरूकता
वित्तीय साक्षरता जागरूकता

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को वित्तीय रूप से जागरूक बनाना था, ताकि वे बैंकिंग सेवाओं का सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकें और केंद्र तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा सकें। ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को इसके फायदे के साथ-साथ संभावित जोखिमों की जानकारी देना भी जरूरी है।

इसी उद्देश्य से कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग और डिजिटल लेन-देन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें समझाईं। नुक्कड़ नाटक के जरिए यह बताया गया कि बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और साइबर ठगी से खुद को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।

नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को समझाया गया कि डिजिटल भुगतान करते समय किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई लिंक नहीं खोलना चाहिए और न ही किसी संदिग्ध एप्लीकेशन को डाउनलोड करना चाहिए। इसके अलावा बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम में खास तौर पर एटीएम कार्ड, पिन और ओटीपी की सुरक्षा पर जोर दिया गया। ग्रामीणों को बताया गया कि बैंक कभी भी फोन पर उनसे एटीएम पिन, ओटीपी या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए नहीं कहता। इसलिए यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी बनकर ऐसी जानकारी मांगता है तो सतर्क रहना जरूरी है।

वित्तीय साक्षरता जागरूकता
वित्तीय साक्षरता जागरूकता

ग्रामीणों को सलाह दी गई कि वे अपने बैंक खाते से संबंधित किसी भी गोपनीय जानकारी को अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। खासकर ओटीपी और पिन को किसी भी परिस्थिति में दूसरे व्यक्ति को नहीं बताना चाहिए। साइबर अपराधी अक्सर अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सावधानी ही बचाव का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है।

कार्यक्रम के दौरान सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी जानकारी दी गई। ग्रामीणों को प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना के बारे में बताया गया और इसके माध्यम से मिलने वाले बीमा सुरक्षा लाभ की जानकारी दी गई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और अटल पेंशन योजना के बारे में भी ग्रामीणों को समझाया गया।

बैंक अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों को वित्तीय सुरक्षा से जोड़ना है। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे अपनी पात्रता के अनुसार उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी लें और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उनका लाभ उठाएं।

कार्यक्रम में जीविका दीदियों के लिए उपलब्ध ऋण सुविधा पर भी विशेष चर्चा की गई। ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दी जाने वाली ऋण सुविधा की जानकारी दी गई। बताया गया कि पात्र जीविका दीदियों को अपना रोजगार शुरू करने या पहले से चल रहे रोजगार को आगे बढ़ाने के लिए 2 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है।

इस जानकारी का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करना रहा। बैंक अधिकारियों ने लोगों को बताया कि किसी भी ऋण योजना के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित बैंक शाखा से पात्रता, दस्तावेज और नियमों की पूरी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

इसके अलावा विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र कारीगरों और शिल्पकारों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी दी गई। ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक काम और हस्तशिल्प से जुड़े हैं। ऐसे कारीगरों को अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता और अन्य सुविधाओं की जानकारी मिलना महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र कारीगरों और शिल्पकारों को उपलब्ध ऋण सुविधा के संबंध में विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही 23 सितंबर को होने वाली विशेष व्यवस्था के बारे में भी लोगों को जानकारी दी गई, ताकि पात्र लोग समय पर इसकी जानकारी प्राप्त कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकें।

शाखा प्रबंधक कुसुम किशोर ने ग्रामीणों से बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बैंक खाता खुलवाने के बाद उसे नियमित रूप से सक्रिय रखना भी जरूरी है। इसके लिए समय-समय पर खाते में वैध लेन-देन करने और बैंक की ओर से आवश्यक केवाईसी प्रक्रिया पूरी रखने की सलाह दी गई।

ग्रामीणों को केवाईसी यानी अपने ग्राहक को जानें प्रक्रिया के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। बैंकिंग सेवाओं को सुचारू रखने के लिए आवश्यक दस्तावेज और जानकारी समय पर अपडेट रखना जरूरी होता है। इसलिए लोगों से कहा गया कि यदि बैंक की ओर से केवाईसी अपडेट करने के लिए आधिकारिक सूचना दी जाती है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरा करें।

डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर भी कार्यक्रम में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। बैंक अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों से बचने के लिए किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज, लिंक या ऑनलाइन ऑफर पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति के साथ संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन या साइबर धोखाधड़ी की घटना होती है तो उसे मामले को छिपाने के बजाय तुरंत अपने बैंक और संबंधित सक्षम एजेंसी को सूचना देनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से आगे होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल सावधानी के साथ करना जरूरी है। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय उपयोगकर्ताओं को अपने पासवर्ड, पिन और अन्य गोपनीय जानकारियों की सुरक्षा करनी चाहिए।

अमौर में आयोजित इस वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि जटिल बैंकिंग जानकारियों को ग्रामीणों तक सरल भाषा और मनोरंजक तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया गया। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक करने से बैंकिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े संदेशों को आसानी से समझाने की कोशिश की गई।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों से अपील की गई कि वे खुद भी बैंकिंग नियमों के प्रति जागरूक रहें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी साइबर धोखाधड़ी से बचने के उपायों की जानकारी दें। खासकर बुजुर्गों और ऐसे लोगों को डिजिटल लेन-देन के दौरान सावधानियों के बारे में बताने की जरूरत पर जोर दिया गया, जिन्हें ऑनलाइन बैंकिंग की पूरी जानकारी नहीं है।

कुल मिलाकर अमौर में बिहार ग्रामीण बैंक की ओर से आयोजित वित्तीय साक्षरता जागरूकता एवं सतर्कता सप्ताह का कार्यक्रम ग्रामीणों को सुरक्षित बैंकिंग, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की दिशा में जागरूकता आधारित पहल रहा। कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक के जरिए बैंकिंग सुरक्षा के संदेश दिए गए, वहीं प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, जीविका दीदियों के लिए ऋण सुविधा और विश्वकर्मा योजना जैसी योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई।

अब जरूरत इस बात की है कि ग्रामीण इन जानकारियों को केवल कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दैनिक जीवन में भी बैंकिंग सुरक्षा के नियमों का पालन करें। किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें, संदिग्ध लिंक से बचें और किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत संबंधित बैंक और सक्षम एजेंसी को सूचना दें। यही सतर्कता ग्रामीणों को सुरक्षित डिजिटल और बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

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