किशनगंज में कचरा प्रबंधन की लापरवाही पर एनजीटी की कड़ी फटकार: तीन माह में ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान अनिवार्य
किशनगंज नगर परिषद द्वारा ठोस कचरे के प्रबंधन में लगातार लापरवाही बरतने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ, कोलकाता ने नगर परिषद को कड़ी फटकार लगाई है। यह कार्रवाई नगर परिषद द्वारा मझिया क्षेत्र में लंबे समय से नगर ठोस अपशिष्ट को सरकारी भूमि पर डंप करने की शिकायत के बाद की गई।
एनजीटी ने मूल आवेदन संख्या 192/2025/ईजेड के तहत इस मामले का संज्ञान लिया था। अधिकरण ने स्थल निरीक्षण के लिए एक संयुक्त समिति गठित की, जिसमें माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष) और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह शामिल थे। निरीक्षण में पाया गया कि डंपिंग स्थल पर लगभग 80 टन पुराना ठोस अपशिष्ट जमा था, हालांकि किसी भी तरह का जैव-चिकित्सीय कचरा या मृत पशु नहीं मिला।

जिलाधिकारी किशनगंज ने इस कचरे को हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद नगर परिषद ने 30 दिसंबर 2025 को शपथपत्र दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि सभी चिन्हित कचरा हटा दिया गया है और स्थल को सुरक्षित स्थिति में बहाल किया गया है। एनजीटी ने इस शपथपत्र को अपर्याप्त बताया और नगर परिषद को सख्त निर्देश जारी किए कि मझिया से मोतिबाग में स्थानांतरित सभी नगर ठोस अपशिष्ट का तीन माह के भीतर वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित किया जाए।
एनजीटी ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक निपटान में कंपोस्टिंग, रीसाइक्लिंग या सुरक्षित लैंडफिल जैसी विधियों का पालन करना अनिवार्य होगा। अधिकरण ने चेतावनी दी कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एनजीटी ने कहा कि यह कदम किशनगंज में बढ़ रहे पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए जरूरी है। लंबे समय से अनियमित कचरा डंपिंग के कारण इलाके में भूमि, जल और वायु प्रदूषण बढ़ा है, जिससे स्थानीय निवासियों की सुरक्षा प्रभावित हो रही थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस आदेश से न केवल किशनगंज में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार होगा, बल्कि यह बिहार के अन्य नगर निकायों के लिए भी उदाहरण बनेगा। स्थानीय प्रशासन अब बाध्य होगा कि वह ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करे और भविष्य में ऐसे पर्यावरणीय खतरों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
इस मामले में पर्यावरणविदों ने कहा कि एनजीटी का यह कदम समय पर लिया गया सही निर्णय है, क्योंकि यदि कचरे का उचित निपटान नहीं हुआ तो यह भूमि, जल स्रोत और वायु को और अधिक प्रदूषित कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।











