बिहार के किशनगंज जिले से जुड़ा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Chicken’s Neck Corridor (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत लगभग 40 किलोमीटर लंबी भूमिगत रेलवे टनल बनाने का प्रस्ताव है, जिसका प्रारंभिक सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

सर्वे का काम शुरू, निर्माण में लगेगा समय
उत्तर पूर्व रेलवे के एडीआरएम Manoj Kumar Singh ने किशनगंज में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल टनल निर्माण से पहले विस्तृत सर्वे का कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी और तकनीकी रूप से जटिल परियोजना है, इसलिए निर्माण कार्य शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है। सर्वे के आधार पर आगे की डिजाइन, लागत और निर्माण प्रक्रिया तय की जाएगी।

सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है कॉरिडोर
पश्चिम बंगाल के Siliguri क्षेत्र में स्थित चिकन नेक कॉरिडोर भारत के लिए अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक इलाका है। इसकी चौड़ाई मात्र करीब 22 किलोमीटर है और यही संकरा भूभाग देश के पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।
यह क्षेत्र चार देशों—Nepal, Bhutan, Bangladesh और China—के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति या सुरक्षा चुनौती के दौरान यदि इस कॉरिडोर में बाधा आती है तो पूर्वोत्तर भारत का संपर्क मुख्य भूमि से प्रभावित हो सकता है।

रेल मंत्री ने की थी परियोजना की घोषणा
इस महत्वपूर्ण पहल की घोषणा केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने फरवरी 2026 में की थी। प्रस्तावित रेल टनल टिन माइल हाट से शुरू होकर Rangapani और Bagdogra तक जाएगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का लगभग 6 किलोमीटर हिस्सा बिहार के किशनगंज जिले से होकर गुजरेगा, जिससे इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ जाएगा।

कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन को मिलेगा मजबूती
रेलवे का मानना है कि इस टनल के बनने से पूर्वोत्तर भारत के लिए रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। इसके अलावा किसी भी आपात या संकट की स्थिति में सैन्य, आपूर्ति और आम यातायात को बिना रुकावट जारी रखने में भी मदद मिलेगी।
किशनगंज में नया रेलवे स्टेशन बनने की संभावना
परियोजना के तहत किशनगंज क्षेत्र में एक नए रेलवे स्टेशन के निर्माण की संभावना भी जताई गई है। इसके साथ ही यहां चार नई रेलवे लाइनें बिछाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास को भी नई गति मिलेगी।
सर्वे के बाद तैयार होगा विस्तृत खाका
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद परियोजना का विस्तृत डिजाइन, लागत का अनुमान और बजट आवंटन तय किया जाएगा। इसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक मजबूती और पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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