पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) में डॉक्टरों ने चिकित्सा कौशल और मानवता का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए एक गरीब मजदूर की जिंदगी बदल दी। करीब 30 वर्षों से गले में असामान्य वृद्धि और गंभीर दर्द झेल रहे भवानीपुर निवासी गुरुदेव मुखिया का सफल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने उनके गले से लगभग 3 किलोग्राम वजन का ट्यूमर (मांस का लोथड़ा) निकाल दिया।

तीन दशक से संघर्ष कर रहा था मरीज
गुरुदेव मुखिया के अनुसार, लगभग 30 साल पहले उनके गले में एक छोटा सा मस्सा (गांठ) विकसित हुआ था। शुरुआत में इसे सामान्य समझकर उन्होंने घरेलू और होम्योपैथिक उपचार अपनाया, लेकिन समय के साथ यह समस्या लगातार बढ़ती गई। धीरे-धीरे यह गांठ एक बड़े ट्यूमर का रूप लेती चली गई, जो बाद में गले से बाहर लटकने लगी।
इस स्थिति ने उनके जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। उन्हें न केवल खाने-पीने और बोलने में कठिनाई होने लगी, बल्कि लगातार शारीरिक दर्द और असुविधा भी झेलनी पड़ी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे उचित इलाज नहीं करा पाए और मजदूरी कर किसी तरह जीवन यापन करते रहे।

सामाजिक कठिनाइयों का भी सामना
गुरुदेव बताते हैं कि उनकी स्थिति के कारण उन्हें सामाजिक भेदभाव का भी सामना करना पड़ा। लोग उनसे दूरी बनाने लगे, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हुआ। इसके बावजूद उन्होंने जीवन की लड़ाई नहीं छोड़ी और कठिन परिस्थितियों में भी काम करते रहे।

डॉक्टर की पहल बनी जीवनदायिनी
इस मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब GMCH के डॉक्टर डॉ. विकास कुमार की नजर बस स्टैंड के पास एक होटल में गुरुदेव पर पड़ी। वे उन्हें बेहद कठिनाई के साथ भोजन करते हुए देख रहे थे। स्थिति को गंभीर समझते हुए डॉक्टर ने तुरंत उन्हें अस्पताल लाने की व्यवस्था की।

सफल ऑपरेशन से मिली नई जिंदगी
GMCH में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने विस्तृत जांच के बाद गुरुदेव का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। जटिल सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने उनके गले से लगभग 3 किलोग्राम का विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया।
ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और मरीज की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर इलाज न मिलने के कारण यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी, लेकिन सर्जरी के बाद उनके जीवन में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है।
मानवता और चिकित्सा का उदाहरण
यह घटना केवल एक चिकित्सा सफलता नहीं बल्कि मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल भी बन गई है। डॉक्टरों की संवेदनशीलता और तत्परता ने एक ऐसे व्यक्ति को नया जीवन दिया, जो वर्षों से दर्द और उपेक्षा में जी रहा था।
स्थानीय लोगों ने GMCH की टीम और डॉ. विकास कुमार की इस पहल की सराहना की है, जिसे एक सामाजिक और मानवीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
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