गैस सिलेंडर समस्या: किशनगंज जिले में घरेलू गैस उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ताज एंटरप्राइजेज गैस एजेंसी से जुड़े कई ग्राहकों ने गैस सिलेंडर वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर शिकायतें की हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए कई दिनों तक एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इस समस्या के कारण आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और लोग प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी की ओर से उन्हें अलग-अलग दिन और समय पर बुलाया जाता है। जब ग्राहक बताए गए समय पर एजेंसी पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि गैस उपलब्ध नहीं है या फिर किसी और दिन आने को कहा जाता है। इस प्रक्रिया में लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि वे 10 से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर गैस एजेंसी तक पहुंचते हैं। सुबह जल्दी घर से निकलकर घंटों लाइन में इंतजार करने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। कई लोगों का कहना है कि एजेंसी के कर्मचारी सुबह जल्दी आने की बात कहते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती।
उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी में वितरण व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है। किसी ग्राहक को सुबह बुलाया जाता है तो किसी को दोपहर में आने को कहा जाता है। इसके बावजूद गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाता। कई परिवारों के घरों में गैस खत्म हो चुकी है, जिसके कारण उन्हें खाना बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एक उपभोक्ता ने बताया कि वह लगातार तीन दिनों से एजेंसी के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसे सिलेंडर नहीं मिला। उसने कहा कि हर बार अलग-अलग बहाना बनाकर वापस कर दिया जाता है। वहीं एक अन्य महिला उपभोक्ता ने बताया कि छोटे बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए बार-बार एजेंसी आना बेहद मुश्किल हो रहा है।

उपभोक्ताओं की एक बड़ी शिकायत एजेंसी के फोन नंबर को लेकर भी सामने आई है। लोगों का कहना है कि गैस एजेंसी से संपर्क करने के लिए कई बार फोन मिलाया जाता है, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया जाता। इससे लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पाती और उन्हें मजबूरी में एजेंसी पहुंचना पड़ता है।
कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा जारी कंट्रोल रूम नंबर पर भी संपर्क किया। वहां से एजेंसी का नंबर उपलब्ध कराया गया, लेकिन उस नंबर पर भी कॉल रिसीव नहीं हुआ। इससे लोगों की नाराजगी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि फोन पर सही जानकारी मिल जाए तो उन्हें बार-बार एजेंसी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
इधर जिला प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि जिले में एलपीजी गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और वितरण व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित हो रही है। प्रशासन के अनुसार जिले में 5507 से अधिक गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं तथा होम डिलीवरी व्यवस्था भी सुचारू रूप से जारी है। इसके साथ ही कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए लगातार छापेमारी अभियान चलाने की बात भी कही गई है।
हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों से बिल्कुल अलग है। लोगों का आरोप है कि जब प्रशासन गैस की पर्याप्त उपलब्धता की बात कर रहा है, तो फिर एजेंसी उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं होने की बात कहकर वापस क्यों भेज रही है। इस विरोधाभास ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिले में पर्याप्त गैस उपलब्ध है तो वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाना चाहिए। कई लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा लोगों को आसानी से गैस सिलेंडर मिल जाता है, जबकि आम उपभोक्ताओं को कई दिनों तक परेशान होना पड़ता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब और मजदूर वर्ग के लोग इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। रोज कमाने-खाने वाले लोगों के लिए बार-बार एजेंसी जाना आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। कई लोगों ने कहा कि किराया खर्च कर एजेंसी पहुंचने के बाद भी यदि गैस नहीं मिले तो यह आम जनता के साथ अन्याय है।
लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गैस वितरण व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उपभोक्ताओं की समस्याओं का जल्द समाधान निकाला जाए। साथ ही एजेंसी को निर्देश दिए जाएं कि वह फोन कॉल रिसीव करे और ग्राहकों को सही जानकारी उपलब्ध कराए।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू गैस जैसी आवश्यक सेवा में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था सीधे आम जनता को प्रभावित करती है। ऐसे में प्रशासन और गैस एजेंसियों की जिम्मेदारी बनती है कि वितरण प्रणाली को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखें। यदि समय पर निगरानी नहीं की गई तो लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को उजागर कर दिया है। एक ओर प्रशासन पर्याप्त गैस उपलब्ध होने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता सिलेंडर के लिए भटकने को मजबूर हैं। अब लोगों की नजर जिला प्रशासन पर टिकी हुई है कि वह इस समस्या पर क्या कदम उठाता है।
फिलहाल ताज एंटरप्राइजेज गैस एजेंसी से जुड़े उपभोक्ता लगातार परेशान हैं और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान होगा। लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें बार-बार संघर्ष न करना पड़े, इसके लिए प्रशासन को सख्त और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।










