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मेघा कुमारी मौत मामला: 13 वर्षीय मेघा का शव मिलने से मचा हड़कंप, परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही के लगाए गंभीर आरोप

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मेघा कुमारी मौत मामला: बिहार के किशनगंज जिले में 13 वर्षीय बच्ची मेघा कुमारी का शव नदी किनारे मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में शोक, आक्रोश और तनाव का माहौल बन गया है। कई दिनों से लापता चल रही बच्ची की मौत ने न केवल उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी भारी नाराजगी पैदा कर दी है। परिजनों ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि यदि समय रहते उनकी शिकायत पर कार्रवाई की जाती, तो शायद आज उनकी बेटी जिंदा होती।

मृतक बच्ची की पहचान डुमरिया भट्टा निवासी होटल व्यवसायी मनोज साह की बेटी मेघा कुमारी के रूप में हुई है। परिवार के अनुसार, मेघा शुक्रवार की शाम रोजाना की तरह घर से टहलने के लिए निकली थी। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसकी आखिरी शाम साबित होगी। जब देर रात तक वह घर वापस नहीं लौटी तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिवार के लोगों ने पहले अपने स्तर पर आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

मेघा कुमारी मौत मामला
मेघा कुमारी मौत मामला

इसके बाद परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया और बच्ची की गुमशुदगी की सूचना दी। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय इसे सामान्य घटना मानकर टाल दिया। बच्ची की मां पिंकी देवी का कहना है कि उन्होंने कई बार थाने जाकर अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि लड़की किसी के साथ चली गई होगी और जल्द लौट आएगी।

परिवार का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती दौर में न तो सक्रिय खोजबीन की और न ही मामले की गंभीरता को समझा। यही कारण है कि अब बच्ची का शव मिलने के बाद लोगों में पुलिस प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है।

सोमवार को मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब माझिया स्थित नदी किनारे एक बच्ची का शव मिलने की सूचना सामने आई। सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों की भीड़ घटनास्थल पर जुटने लगी। बाद में शव की पहचान मेघा कुमारी के रूप में की गई। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण नमूने एकत्र किए, जिनकी जांच की जा रही है। प्रारंभिक कार्रवाई पूरी होने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया।

मेघा कुमारी मौत मामला
मेघा कुमारी मौत मामला

हालांकि, बच्ची का शव मिलने के बाद माहौल तेजी से तनावपूर्ण हो गया। परिजन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में सड़क पर उतर आए। लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस की उदासीनता और लापरवाही के कारण यह दुखद घटना हुई है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर हंगामे और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों को भी मौके पर पहुंचना पड़ा और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन देकर लोगों को समझाने की कोशिश की।

इस पूरे मामले ने किशनगंज जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कोई नाबालिग बच्चा या बच्ची लापता हो जाती है, तो पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इस मामले में परिवार की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। एसडीपीओ खुसरू सिराज ने बताया कि पुलिस किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

मेघा कुमारी मौत मामला
मेघा कुमारी मौत मामला

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह कोई दुर्घटना थी, आत्महत्या का मामला था या फिर इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश छिपी हुई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मेघा कुमारी की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है। वहीं स्थानीय लोग भी चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए।

अब पूरे जिले की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और मेघा कुमारी को न्याय मिलेगा। यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि नाबालिगों की गुमशुदगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील पुलिसिंग कितनी जरूरी है।

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