पूर्णिया स्कूल निरीक्षण: पूर्णिया जिले के बायसी प्रखंड में एक सरकारी स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी कई कमियां सामने आने का मामला सामने आया है। बायसी से AIMIM विधायक गुलाम सरवर ने तारबाड़ी पंचायत स्थित मध्य विद्यालय लोहिया का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं में जाकर छात्रों से बातचीत की, उनकी कॉपियां देखीं और स्कूल में रखे उपस्थिति रजिस्टरों की भी जांच की।
निरीक्षण के दौरान सामने आई कथित लापरवाही पर विधायक ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा और उचित मार्गदर्शन मिलना उनकी जिम्मेदारी है। अगर बुनियादी स्तर पर ही बच्चों की पढ़ाई को लेकर लापरवाही बरती जाएगी, तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ेगा।
बताया गया कि विधायक गुलाम सरवर निरीक्षण के दौरान सीधे कक्षा 6 में पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद छात्र-छात्राओं से पढ़ाई को लेकर बातचीत की और यह जानने की कोशिश की कि कक्षा में पढ़ाई किस तरह चल रही है। इसके बाद उन्होंने कुछ छात्रों की नोटबुक और कॉपियां भी देखीं।

एक छात्रा की कॉपी की जांच के दौरान विधायक का ध्यान हिंदी की बुनियादी शिक्षा से जुड़ी एक गलती पर गया। उनके अनुसार, छात्रा ने हिंदी वर्णमाला के शुरुआती अक्षरों क, ख, ग को सही क्रम और तरीके से नहीं लिखा था। विधायक ने इस बात पर आपत्ति जताई कि छात्रा की कॉपी में गलती मौजूद होने के बावजूद शिक्षक ने उसे सुधारने की कोशिश नहीं की और कॉपी पर हस्ताक्षर कर दिए।
विधायक ने शिक्षकों से सवाल किया कि अगर किसी बच्चे को शुरुआती स्तर की शिक्षा में ही कठिनाई हो रही है, तो शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वह उसकी गलती को समझाए और उसे सही तरीके से लिखना-पढ़ना सिखाए। उन्होंने कहा कि केवल कॉपी देखकर हस्ताक्षर कर देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों की पढ़ाई की वास्तविक प्रगति पर ध्यान देना जरूरी है।
गुलाम सरवर ने इस दौरान शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे बड़ी उम्मीद के साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ने आते हैं। यदि उन्हें बुनियादी शिक्षा भी ठीक से नहीं मिलेगी, तो अभिभावकों के सामने कई सवाल खड़े होंगे।
विधायक ने इसके बाद स्कूल के अलग-अलग कक्षाओं के अटेंडेंस रजिस्टर मंगवाकर उनकी जांच की। उनके निरीक्षण के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे से 1 बजे के बीच कई रजिस्टरों में उस दिन की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई थी। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों से इस संबंध में जानकारी मांगी।

विधायक के मुताबिक, जब प्रधानाध्यापक और शिक्षकों से पूछा गया कि उपस्थिति रजिस्टर में उस दिन की हाजिरी क्यों दर्ज नहीं की गई है, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कथित तौर पर यह कहा गया कि उपस्थिति बाद में दर्ज की जाएगी। विधायक ने इस व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई और इसे स्कूल के प्रशासनिक कामकाज में लापरवाही बताया।
उन्होंने कहा कि स्कूल में छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति से संबंधित रिकॉर्ड समय पर और सही तरीके से दर्ज किया जाना चाहिए। उपस्थिति रजिस्टर केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि स्कूल की नियमित व्यवस्था और अनुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
निरीक्षण के दौरान विधायक ने खाली पड़े रजिस्टरों की तस्वीरें और वीडियो भी अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए। उनका कहना था कि इन साक्ष्यों को संबंधित शिक्षा अधिकारियों के सामने रखा जाएगा, ताकि मामले की जांच हो सके और यदि लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
विधायक ने स्कूल की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार और शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बच्चों की कॉपियों की नियमित जांच, उनकी गलतियों को सुधारना और उनकी शैक्षणिक प्रगति पर नजर रखना जरूरी है।
इस औचक निरीक्षण के बाद स्कूल की व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। खास तौर पर छात्रों की बुनियादी शिक्षा और उपस्थिति रजिस्टर को लेकर सामने आई कथित कमियों ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, निरीक्षण के दौरान विधायक की ओर से लगाए गए आरोपों और सामने आई कमियों पर संबंधित शिक्षकों या शिक्षा विभाग का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है। किसी भी कार्रवाई से पहले विभागीय स्तर पर जांच और तथ्यों की पुष्टि की जानी जरूरी होगी।
सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की ओर से स्कूलों का औचक निरीक्षण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने का एक माध्यम हो सकता है। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों का समाधान भी समयबद्ध तरीके से किया जाए।
बायसी के मध्य विद्यालय लोहिया में हुए इस निरीक्षण के बाद अब संबंधित शिक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। विधायक द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो और वीडियो के आधार पर विभाग मामले की जांच कर सकता है। यदि रिकॉर्ड में अनियमितता या शिक्षण कार्य में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल विधायक गुलाम सरवर ने स्कूल की व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों की जवाबदेही और बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देने की बात कही है। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य स्कूल में शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सामने आई कमियों को अधिकारियों के संज्ञान में लाना बताया गया है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस निरीक्षण के बाद क्या कदम उठाता है और स्कूल में पढ़ाई तथा उपस्थिति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या सुधार किए जाते हैं। बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत करने के साथ-साथ स्कूलों में रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करना इस मामले से सामने आया अहम मुद्दा है।










