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बिहार पॉलिटेक्निक सफलता कहानी: इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार की बेटी ने रचा इतिहास, बिहार पॉलिटेक्निक परीक्षा में शानदार रैंक हासिल

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बिहार पॉलिटेक्निक सफलता कहानी: किशनगंज जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। ठाकुरगंज प्रखंड के नगर पंचायत पौआखाली के वार्ड संख्या-08 की रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा रौकतिमा देवनाथ ने बिहार पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर अपने परिवार, क्षेत्र और स्कूल का नाम रोशन किया है।

रौकतिमा की इस उपलब्धि से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा इलाका गर्व महसूस कर रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जिस तरह यह मुकाम हासिल किया है, वह आज के युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा बन गया है।

परीक्षा में शानदार प्रदर्शन

बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद द्वारा आयोजित डिप्लोमा सर्टिफिकेट प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा (DCECE-PE)-2026 के परिणाम में रौकतिमा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

उनकी रैंकिंग इस प्रकार रही—

  • आरसीजी श्रेणी में 2,979वीं रैंक
  • पिछड़ा वर्ग (BC) श्रेणी में 5,983वीं रैंक
  • अनारक्षित श्रेणी में 15,783वीं रैंक

इन रैंकों के माध्यम से उन्होंने यह साबित कर दिया कि लगातार मेहनत और सही दिशा में की गई तैयारी सफलता की गारंटी बन सकती है।

बिहार पॉलिटेक्निक सफलता कहानी
बिहार पॉलिटेक्निक सफलता कहानी

साधारण परिवार से असाधारण सफलता तक

रौकतिमा एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता विश्वम्बर देवनाथ, जिन्हें इलाके में लोग “भोल्टू इलेक्ट्रॉनिक्स” के नाम से जानते हैं, एक छोटी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद उन्होंने कभी भी अपनी बेटी की शिक्षा में कोई बाधा नहीं आने दी। पिता ने अपनी सीमित आय के बावजूद हमेशा यह सुनिश्चित किया कि बेटी को अच्छी शिक्षा और बेहतर अवसर मिलें।

रौकतिमा की यह सफलता उनके माता-पिता के त्याग और समर्पण का परिणाम मानी जा रही है।

शिक्षा और मार्गदर्शन की अहम भूमिका

रौकतिमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने शिक्षकों और कोचिंग संस्थान को दिया है।

उन्होंने विशेष रूप से ऐचिवर कोचिंग सेंटर के निदेशक विष्णुकांत झा का आभार व्यक्त किया। रौकतिमा के अनुसार, कक्षा 6 से 8 तक मिले लगातार मार्गदर्शन, नियमित टेस्ट और सही दिशा में दी गई तैयारी ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया।

कोचिंग संस्थान में उन्हें समय-समय पर परीक्षा पैटर्न, कमजोर विषयों और तैयारी की रणनीति पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे उनकी तैयारी और बेहतर होती गई।

बिहार पॉलिटेक्निक सफलता कहानी
बिहार पॉलिटेक्निक सफलता कहानी

सफलता के पीछे मेहनत और अनुशासन

रौकतिमा का कहना है कि उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी हल्के में नहीं लिया। नियमित पढ़ाई, समय का सही उपयोग और निरंतर अभ्यास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

वे मानती हैं कि किसी भी परीक्षा में सफलता पाने के लिए केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि आत्मविश्वास और धैर्य भी जरूरी होता है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य से कभी ध्यान नहीं हटाया।

परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल

जैसे ही रौकतिमा की सफलता की खबर सामने आई, पूरे पौआखाली और फुलवाड़ी क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार, रिश्तेदार, शिक्षक और स्थानीय लोग लगातार उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं।

उनके घर पर लोगों का आना-जाना लगा हुआ है और हर कोई उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रौकतिमा ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और सीमित संसाधनों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

समाज के लिए प्रेरणा

रौकतिमा की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। विशेष रूप से उन छात्राओं के लिए, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को सीमित समझ लेती हैं।

उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर मेहनत सच्ची हो और दिशा सही हो, तो कोई भी बाधा सफलता में रुकावट नहीं बन सकती।

बिहार पॉलिटेक्निक सफलता कहानी
बिहार पॉलिटेक्निक सफलता कहानी

आगे की योजना

अब रौकतिमा की नजर आगामी पॉलिटेक्निक काउंसलिंग प्रक्रिया पर है। उन्हें उम्मीद है कि बेहतर रैंक के आधार पर उन्हें किसी प्रतिष्ठित सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थान में प्रवेश मिलेगा।

वे अपनी पसंदीदा शाखा में डिप्लोमा करना चाहती हैं ताकि आगे चलकर एक सफल करियर बना सकें और अपने परिवार का नाम और ऊंचा कर सकें।

निष्कर्ष

रौकतिमा देवनाथ की यह सफलता कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मेहनत, समर्पण और सही मार्गदर्शन के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार की बेटी ने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है।

उनकी यह उपलब्धि न केवल किशनगंज जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे बिहार के छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी है कि सपनों को पूरा करने के लिए केवल मेहनत की जरूरत होती है।

 

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