महानंदा नदी हादसा किशनगंज: बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां महानंदा नदी में डूबे 8 वर्षीय बच्चे का शव करीब 24 घंटे की तलाश के बाद बरामद किया गया। शव मिलने के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
यह घटना खानकी बोधीभिट्टा गांव की है, जहां रहने वाले नौशाद आलम के 8 वर्षीय पुत्र मोहम्मद सैफ आलम की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि बच्चा रविवार को घर के पास बहने वाली महानंदा नदी के किनारे गया था, लेकिन उसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा।
परिजनों के अनुसार, जब देर शाम तक बच्चा घर नहीं लौटा तो चिंता बढ़ी और उसकी तलाश शुरू की गई। आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
सूचना मिलते ही ठाकुरगंज थाना पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। टीम ने मोटरबोट और गोताखोरों की मदद से नदी में लगातार तलाश अभियान चलाया। हालांकि, रविवार देर शाम तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल सका।

नदी में तेज बहाव और लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंधेरा होने के बाद भी टीम ने प्रयास जारी रखा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
अगले दिन यानी सोमवार को ग्रामीणों ने बरचौंदी घाट के पास नदी में एक बच्चे का शव देखा। तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंची और शव को नदी से बाहर निकाला गया।
शव की पहचान के लिए परिजनों को मौके पर बुलाया गया। कपड़ों और अन्य पहचान के आधार पर परिवार ने शव की पुष्टि मोहम्मद सैफ आलम के रूप में की। जैसे ही यह खबर परिवार को मिली, वहां कोहराम मच गया और मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
शव घर पहुंचते ही पूरे गांव में मातम पसर गया। हर आंख नम थी और लोग परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंच रहे थे। बच्चे की असामयिक मौत ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चा अक्सर घर के पास नदी किनारे खेला करता था। लेकिन इस बार नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था और बहाव तेज था, जिससे यह दर्दनाक हादसा हो गया। आशंका जताई जा रही है कि बच्चा गहराई का अंदाजा नहीं लगा सका और नदी में डूब गया।

ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि महानंदा नदी में हर साल बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ जाता है और खतरा बना रहता है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए जाते।
इस घटना के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित परिवार को आपदा राहत नियमों के तहत आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, नदी किनारे संभावित खतरनाक स्थानों की पहचान कर सुरक्षा उपाय बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
SDRF टीम ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती तेज बहाव और गहराई थी। इसके बावजूद टीम ने लगातार प्रयास किए और अंततः शव को बरामद किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे ऐसे हादसों की संभावना अधिक हो जाती है। बच्चों और ग्रामीणों को नदी किनारे जाने से बचने की सलाह दी जाती है, खासकर तब जब पानी का बहाव तेज हो।

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए एक बड़ी त्रासदी बन गई है। मासूम बच्चे की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
फिलहाल पुलिस मामले की औपचारिक जांच कर रही है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। गांव में अभी भी शोक का माहौल बना हुआ है और लोग इस दुखद घटना को लेकर स्तब्ध हैं।










