पूर्णिया GMCH निरीक्षण: पूर्णिया के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल यानी जीएमसीएच में उस समय हलचल मच गई, जब पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव अचानक औचक निरीक्षण के लिए अस्पताल पहुंच गए। बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस दौरे ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए। निरीक्षण के दौरान सांसद ने अलग-अलग वार्डों का दौरा किया, मरीजों और उनके परिजनों से सीधे बातचीत की तथा अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।
सांसद पप्पू यादव का कहना था कि अस्पताल में आने वाले मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें कई बार बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य आम और जरूरतमंद लोगों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि अस्पताल में ही मरीजों को पर्याप्त इलाज और सुविधाएं नहीं मिलें, तो यह चिंता का विषय है।
निरीक्षण के दौरान पप्पू यादव सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। वहां उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि उन्हें समय पर इलाज मिल रहा है या नहीं। कई लोगों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं। कुछ मरीजों ने इलाज में देरी, डॉक्टरों की अनुपलब्धता और जरूरी सुविधाओं की कमी की शिकायत की। इन शिकायतों को सुनने के बाद सांसद ने अस्पताल प्रशासन से जवाब तलब किया।
उन्होंने कहा कि अस्पताल में जिस समय मरीजों को सबसे अधिक डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता होती है, उसी समय कई जिम्मेदार अधिकारी और डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिलते। उनका कहना था कि यदि इमरजेंसी जैसी महत्वपूर्ण सेवा में भी पर्याप्त डॉक्टर और कर्मचारी उपलब्ध नहीं होंगे, तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

सांसद ने इमरजेंसी सेवाओं की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को तुरंत उपचार मिलना चाहिए, लेकिन कई मामलों में उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बन रही है और इसे सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान पप्पू यादव ने अस्पताल के अन्य वार्डों का भी दौरा किया। उन्होंने मरीजों के बेड, साफ-सफाई, दवा वितरण व्यवस्था और चिकित्सा सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया। कई मरीजों ने उन्हें बताया कि अस्पताल में सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं रहतीं, जिसके कारण उन्हें बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। गरीब परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च काफी मुश्किल पैदा करता है।
सांसद ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में यदि आवश्यक दवाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो गरीब मरीजों को इलाज के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि अस्पताल में सभी आवश्यक दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

इसके अलावा उन्होंने जांच सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कई मरीजों को आवश्यक जांच कराने के लिए निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है। इससे न केवल मरीजों का खर्च बढ़ता है, बल्कि इलाज में भी देरी होती है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध होना बेहद जरूरी है ताकि मरीजों को एक ही जगह पर सभी सेवाएं मिल सकें।
निरीक्षण के दौरान सांसद ने एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में सामान्य चोट या सामान्य बीमारी को भी गंभीर बताकर मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह बेहद चिंताजनक है। उनका कहना था कि सरकारी अस्पतालों में जिन मरीजों का इलाज संभव है, उन्हें निजी अस्पताल भेजना उचित नहीं है, क्योंकि इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई मरीजों ने उन्हें बताया कि छोटी-छोटी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं, जैसे प्लास्टर करने या सामान्य उपचार में भी अनावश्यक देरी होती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को लंबे समय तक दर्द और परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से पूछा कि आखिर इन सेवाओं में देरी क्यों हो रही है और इसे रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
पप्पू यादव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा किसी भी नागरिक का मूल अधिकार है। सरकारी अस्पतालों का निर्माण इसलिए किया जाता है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी बेहतर इलाज मिल सके। यदि अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर, दवाएं, जांच सुविधाएं और आवश्यक चिकित्सा संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो इसका सबसे अधिक नुकसान गरीब और जरूरतमंद लोगों को ही उठाना पड़ेगा।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रशासन से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा। उन्होंने यह जानना चाहा कि डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है, दवाओं की कमी क्यों होती है, जांच सुविधाओं में सुधार के लिए क्या योजनाएं हैं और मरीजों की शिकायतों के समाधान के लिए कौन-सी व्यवस्था लागू है।

सांसद ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशात्मक अंदाज में कहा कि मरीजों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और स्वास्थ्य सेवाओं में जल्द सुधार किया जाए। उनका कहना था कि अस्पताल प्रशासन को नियमित रूप से वार्डों का निरीक्षण करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही समय रहते सामने आ सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल कमियां गिनाना नहीं, बल्कि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलाना है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था मजबूत होगी, तो लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा और उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेने की जरूरत कम पड़ेगी।
अस्पताल में मौजूद कई मरीजों और उनके परिजनों ने सांसद के निरीक्षण का स्वागत किया। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण किया जाना चाहिए ताकि व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
वहीं, अस्पताल प्रशासन की ओर से कहा गया कि मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि निरीक्षण के दौरान जिन मुद्दों को उठाया गया है, उनका परीक्षण किया जाएगा और जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर समय-समय पर कई सवाल उठते रहे हैं। डॉक्टरों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता, जांच सुविधाओं का अभाव और मरीजों की बढ़ती संख्या जैसी चुनौतियां कई सरकारी अस्पतालों के सामने हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए निरीक्षण इन समस्याओं को उजागर करने और सुधार की दिशा में पहल करने का माध्यम बन सकते हैं।
फिलहाल जीएमसीएच में सांसद पप्पू यादव के औचक निरीक्षण ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बहस तेज कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि निरीक्षण के दौरान उठाए गए मुद्दों पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किस प्रकार के सुधार किए जाते हैं।
यदि अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं का विस्तार और इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ हजारों मरीजों को मिलेगा। यही उम्मीद मरीजों और उनके परिजनों की भी है कि निरीक्षण के बाद केवल चर्चा ही नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।










