किशनगंज नर्सिंग होम मौत मामला: किशनगंज जिले में एक निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान वृद्ध महिला की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश सामने आया है। घटना शहर के पश्चिम पल्ली स्थित एक निजी नर्सिंग होम की बताई जा रही है, जहां महिला की मौत के बाद परिवार के लोगों ने जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया।
मृतका की पहचान पोठिया प्रखंड के चेचुआ बाड़ी निवासी मलिका खातून के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, महिला की तबीयत खराब होने के बाद परिजनों ने उन्हें बेहतर इलाज की उम्मीद में पश्चिम पल्ली स्थित निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि भर्ती किए जाने के बाद भी महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि जब महिला की हालत काफी गंभीर हो गई, तब उन्हें नर्सिंग होम से सदर अस्पताल रेफर किया गया। परिजन महिला को लेकर तुरंत सदर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में गुस्सा फैल गया। इसके बाद वे वापस निजी नर्सिंग होम पहुंचे और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित लोगों ने नर्सिंग होम परिसर में जमकर हंगामा किया और मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
घटना की सूचना मिलने के बाद किशनगंज टाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया और हंगामा कर रहे लोगों को समझाकर शांत कराया। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी और जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते महिला को सही इलाज और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो शायद उनकी जान बच सकती थी। परिवार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इलाज में लापरवाही करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
परिजनों ने यह भी दावा किया कि जिस नर्सिंग होम में महिला का इलाज चल रहा था, उसका संचालन सदर अस्पताल के डीएस डॉक्टर अनवर हुसैन द्वारा किया जाता है। हालांकि, इस संबंध में नर्सिंग होम प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली है। लोगों का कहना है कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। किसी भी मरीज की मौत के बाद पूरी स्थिति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच के दौरान इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तथ्यों की समीक्षा की जा सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही महिला की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।











