बिहार खिलाड़ी सम्मान: बिहार में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए उन्हें सरकारी नौकरी की सौगात दी है। इस पहल के तहत भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाशदीप और मुकेश कुमार को पुलिस उपाधीक्षक यानी डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा एथलेटिक्स खिलाड़ी पीयूष राज को पुलिस अवर निरीक्षक यानी एएसआई के पद पर नियुक्ति मिली है। कुल 19 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जिससे पूरे राज्य के खेल जगत में उत्साह का माहौल है।
राजधानी में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों, अधिकारियों और खेल प्रेमियों की मौजूदगी रही। सम्मान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद उन्हें सरकार की ओर से यह सम्मान मिला।
कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक चर्चा भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाशदीप और मुकेश कुमार की रही। दोनों खिलाड़ियों ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। यह भावुक पल समारोह का प्रमुख आकर्षण बना। दोनों खिलाड़ियों ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल एक सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि उनके संघर्ष और उपलब्धियों की पहचान है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में भी देश और बिहार का नाम रोशन करने के लिए पूरी मेहनत से खेलते रहेंगे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें सही अवसर और उचित संसाधन उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी, छात्रवृत्ति और सम्मान राशि देकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बिहार के क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक और महत्वपूर्ण संकेत दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में बिहार की अपनी क्रिकेट टीम भी इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के ऑक्शन में हिस्सा ले सकती है। उनका यह बयान खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई समय-सीमा या विस्तृत योजना साझा नहीं की, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिला कि सरकार राज्य में क्रिकेट के विकास को लेकर गंभीर है।
कार्यक्रम में बताया गया कि वर्ष 2026 में अब तक कुल 106 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। यह संख्या बताती है कि सरकार खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इस योजना का उद्देश्य खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि वे बिना भविष्य की चिंता किए अपने खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।
सरकारी नौकरी के साथ-साथ खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति और पुरस्कार राशि भी दी जा रही है। इससे युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए आर्थिक सहयोग मिलता है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं नई पीढ़ी को खेलों की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस समारोह में पांच पैरा खिलाड़ियों को भी नियुक्ति पत्र सौंपे गए। सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि दिव्यांग खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर समान सम्मान के हकदार हैं। विभिन्न खेल विधाओं के खिलाड़ियों को समान अवसर देना राज्य की खेल नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को नकद सम्मान राशि भी प्रदान की गई। एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप-2026 में स्वर्ण और रजत पदक जीतने वाले सेतु मिश्रा को 37 लाख 50 हजार रुपये की सम्मान राशि दी गई। सेतु मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर बिहार का नाम रोशन किया है। सरकार ने उनकी उपलब्धि को सम्मानित करते हुए यह पुरस्कार प्रदान किया।
इसी प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले विभास्कर कुमार को 2 लाख रुपये की सम्मान राशि दी गई। वहीं, कॉमनवेल्थ यूथ शतरंज चैंपियनशिप-2026 की ब्लिट्ज स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली मरियम फातिमा को 9 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मानित कर सरकार ने यह संदेश दिया कि हर खेल और हर खिलाड़ी का योगदान समान रूप से महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की नीति उनके मनोबल को मजबूत करती है। अक्सर खिलाड़ी अपने खेल करियर के बाद रोजगार को लेकर चिंतित रहते हैं। ऐसे में सरकारी नौकरी मिलने से उन्हें आर्थिक स्थिरता मिलती है और युवा खिलाड़ियों को भी खेलों में करियर बनाने की प्रेरणा मिलती है।
बिहार लंबे समय तक खेल सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जूझता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार खेल अवसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। नए स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र, आधुनिक उपकरण और कोचिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी सहायता दी जा रही है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खिलाड़ियों को सम्मान, रोजगार और बेहतर सुविधाएं मिलती रहीं, तो आने वाले वर्षों में बिहार से कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलकर सामने आएंगे। इससे न केवल राज्य की पहचान मजबूत होगी, बल्कि देश को भी विभिन्न खेलों में नई प्रतिभाएं मिलेंगी।

समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनें। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि पूरे राज्य में खेल संस्कृति को मजबूत करना है। इसके लिए खेल प्रतिभाओं को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बिहार सरकार की यह पहल खेलों के क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश देती है। सरकारी नौकरी, सम्मान राशि और छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देती हैं और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस तरह की पहल से राज्य के अधिक से अधिक युवा खेलों को अपना करियर बनाएंगे और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन करेंगे।










