अररिया मोबाइल चोरी कांड: बिहार के अररिया जिले में हुए बहुचर्चित मोबाइल चोरी मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से जांच के घेरे में रहे इस मामले में पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए 2,050 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस बरामदगी के बाद चोरी हुए मोबाइलों की कुल संख्या बढ़कर 3,487 हो गई है।
पुलिस की इस कार्रवाई को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि मोबाइल चोरी के इस मामले में एक संगठित गिरोह के शामिल होने की आशंका जताई जा रही थी। पुलिस अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है, ताकि चोरी की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सके।
मामले की शुरुआत 9 जून 2026 को हुई थी, जब मोबाइल फोन और एसेसरीज से भरा एक ट्रक अचानक गायब हो गया था। बताया गया कि ट्रक में बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान मौजूद थे। ट्रक गायब होने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद अररिया थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ट्रक को चोरी करने के बाद उसे लावारिस हालत में जीरो माइल स्थित एचपी पेट्रोल पंप के पास छोड़ दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू की और तकनीकी जानकारी, पूछताछ तथा अन्य सुरागों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि जांच के क्रम में उत्तर प्रदेश के मथुरा निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी से पूछताछ के बाद उसकी निशानदेही पर पुलिस टीम ने 2,050 मोबाइल फोन बरामद किए।
बरामद किए गए मोबाइल फोन रियलमी और ओप्पो कंपनी के बताए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि यह बरामदगी मामले की जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। मोबाइल फोन की संख्या और गिरोह के काम करने के तरीके से यह संकेत मिल रहे हैं कि चोरी की यह घटना किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई बड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। इससे पहले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और उनके पास से 1,437 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 6.97 लाख रुपये नकद और पांच वाहन बरामद किए गए थे।
अब तक की पूरी कार्रवाई में कुल सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में 3,487 मोबाइल फोन, पांच वाहन, एक लैपटॉप और 6.97 लाख रुपये नकद बरामद किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल बरामद होने के बाद पुलिस को उम्मीद है कि चोरी के इस नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चोरी किए गए मोबाइल कहां-कहां भेजे गए थे, इस गिरोह में कितने लोग शामिल हैं और चोरी के सामान को खपाने का तरीका क्या था।
इस मामले में ट्रक के सह-चालक को भी ट्रांजिट रिमांड पर लाकर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है और जो भी लोग इस अपराध से जुड़े पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अररिया पुलिस का कहना है कि मामले में फरार चल रहे अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही चोरी किए गए बाकी सामान की बरामदगी के लिए भी अभियान जारी है।
इस पूरी कार्रवाई में अररिया थाना पुलिस, जिला सूचना इकाई यानी डीआईयू, टाइगर मोबाइल टीम और बिहार एसटीएफ (एसओजी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अलग-अलग टीमों के संयुक्त प्रयास से पुलिस इस बड़े मामले में लगातार आगे बढ़ रही है।
मोबाइल चोरी जैसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती चोरी किए गए सामान को बरामद करना और पूरे नेटवर्क तक पहुंचना होती है। अररिया पुलिस की यह कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अब पुलिस की नजर गिरोह के उन सदस्यों तक पहुंचने पर है, जो अभी फरार हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस चोरी की योजना कैसे बनाई गई थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।
अररिया मोबाइल चोरी कांड ने यह दिखाया है कि अपराधी कितनी भी सावधानी से योजना बनाएं, लगातार जांच और तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस उन तक पहुंच सकती है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।










