पूर्णिया सफाईकर्मी हड़ताल: बिहार के पूर्णिया शहर में सफाई व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। नगर निगम के सफाईकर्मियों की हड़ताल लगातार सातवें दिन भी जारी है, जिसका सीधा असर अब शहर के हर हिस्से में दिखाई देने लगा है। मुख्य सड़कों से लेकर आम मोहल्लों और यहां तक कि वीआईपी इलाकों में भी कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं।
सफाईकर्मियों के काम पर नहीं लौटने के कारण शहर की नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। जगह-जगह कचरा जमा है और कई इलाकों में गंदगी के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों का कहना है कि घर से बाहर निकलते ही उन्हें बदबू और फैले हुए कचरे से जूझना पड़ रहा है।
शहर के सबसे प्रमुख इलाकों में से एक एसपी कोठी रोड की स्थिति भी खराब हो गई है। यहां लगे कूड़ेदान पूरी तरह भर चुके हैं और कचरा सड़क तक फैल गया है। खास बात यह है कि इसी इलाके में जिले के कई बड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सरकारी आवास मौजूद हैं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था चरमराती हुई नजर आ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सफाई नहीं होने के कारण कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है। बारिश के बाद स्थिति और भी खराब हो गई है। पानी के साथ कचरा बहने से कई जगहों पर जलजमाव और गंदगी की समस्या बढ़ गई है।
विश्वेश्वरैया चौक सहित कई इलाकों में बारिश के पानी में कचरा तैरता नजर आ रहा है। इससे न केवल लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है, बल्कि संक्रमण और बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। सड़क किनारे छोटी दुकानें लगाने वाले दुकानदारों का कहना है कि गंदगी और दुर्गंध के कारण ग्राहकों की संख्या कम हो गई है और कारोबार प्रभावित हो रहा है।
दरअसल, सफाईकर्मी अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार और प्रशासन की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।
सफाईकर्मियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को लेकर कई बार प्रशासन से बातचीत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उनका कहना है कि बैठकें जरूर होती हैं, लेकिन कर्मचारियों की मांगों को लेकर धरातल पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा।

बिहार लोकल बॉडीज एम्पलायीज फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि नगर निकाय कर्मचारियों की स्थिति लंबे समय से खराब बनी हुई है। संगठन का कहना है कि कम वेतन, ठेका व्यवस्था और आउटसोर्सिंग के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों का दावा है कि कई सफाईकर्मियों को इतनी कम राशि मिलती है कि परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि वे शहर को साफ रखने का काम करते हैं, लेकिन खुद आर्थिक असुरक्षा में जीवन जीने को मजबूर हैं।
सफाईकर्मियों की एक प्रमुख मांग स्थायी नियुक्ति को लेकर है। उनका कहना है कि लंबे समय से काम करने के बावजूद कई कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी सेवा को देखते हुए स्थायीकरण की प्रक्रिया शुरू करे और उन्हें नौकरी की सुरक्षा प्रदान करे।
इसके अलावा कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान भुगतान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारियों को निर्धारित वेतन से कम भुगतान किया जा रहा है।

सफाई व्यवस्था से जुड़े ड्राइवरों ने भी अपनी समस्याएं सामने रखी हैं। उनका कहना है कि उन्हें भी अपेक्षित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संगठन का दावा है कि नगर निकाय व्यवस्था में काम करने वाले कई कर्मचारियों को लंबे समय से अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
वहीं, इस हड़ताल का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। शहरवासियों को कूड़े के ढेर, दुर्गंध और खराब सफाई व्यवस्था से जूझना पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि प्रशासन और सफाईकर्मियों के बीच जल्द बातचीत हो और इस समस्या का समाधान निकाला जाए।
लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था किसी भी शहर की मूलभूत जरूरत है। लंबे समय तक सफाई बाधित रहने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में प्रशासन को जल्द से जल्द कोई रास्ता निकालना चाहिए।
फिलहाल सफाईकर्मी अपनी मांगों पर कायम हैं और प्रशासन के साथ उनका गतिरोध जारी है। दोनों पक्षों के बीच समाधान नहीं निकलने तक शहरवासियों को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन सफाईकर्मियों की मांगों पर क्या फैसला लेता है और हड़ताल कब समाप्त होती है। यदि जल्द कोई समझौता नहीं हुआ, तो शहर में सफाई संकट और गहरा सकता है।
पूर्णिया में जारी यह हड़ताल केवल सफाई व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह नगर निकाय कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को भी सामने ला रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले को किस तरह सुलझाते हैं और शहर को फिर से साफ-सुथरा बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।










