विषहरी पूजा अररिया: शहर के शिवपुरी वार्ड संख्या-9 में इन दिनों भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है। यहां स्थित मां विषहरी मंदिर में तीन दिवसीय विषहरी पूजा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। पूजा को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। मंदिर परिसर को सजाया गया है और आयोजन को लेकर तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। शिवपुरी के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
तीन दिवसीय इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत शनिवार रात पारंपरिक बेल नेवतने की रस्म के साथ हुई। धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार इस रस्म को विषहरी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसके बाद रविवार सुबह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई और धार्मिक अनुष्ठान का विधिवत आगाज हुआ।
पूजा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगी है। भक्त मां विषहरी के प्रति अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

निशा पूजा के बाद खुलेगा मां विषहरी का पट
आयोजन समिति और मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, विषहरी पूजा के तहत रविवार को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे। इसके बाद निशा पूजा का आयोजन किया जाएगा। सोमवार को मां विषहरी का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाएगा।
पट खुलने के बाद श्रद्धालु मां विषहरी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। बड़ी संख्या में भक्तों के मंदिर पहुंचने की संभावना है। स्थानीय लोगों के लिए यह पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परंपरा और सामुदायिक आस्था का भी प्रतीक है।
सोमवार देर शाम मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले को लेकर भी स्थानीय लोगों में काफी उत्साह है। पूजा के साथ मेले में आसपास के लोगों की भीड़ जुटने की उम्मीद है। बच्चों और परिवारों के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामुदायिक मेलजोल का अवसर भी बनेगा।

मंगलवार को हवन के साथ होगा समापन
तीन दिवसीय विषहरी पूजा का समापन मंगलवार को होगा। अंतिम दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद श्रद्धालु मां विषहरी का आशीर्वाद लेकर अपने घर लौटेंगे।
आयोजन को लेकर मंदिर समिति और स्थानीय लोग लगातार सक्रिय हैं। पूजा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मंदिर से जुड़े पुजारी और आयोजन में सहयोग कर रहे लोग पूजा की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
श्रद्धालुओं में खासा उत्साह
विषहरी पूजा को लेकर शिवपुरी और आसपास के इलाकों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों के बीच इस पूजा को लेकर विशेष आस्था देखने को मिलती है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की उम्मीद है।
भक्त मां विषहरी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मन्नत मांगेंगे। स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ मां विषहरी से की गई प्रार्थना भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
यही वजह है कि हर वर्ष विषहरी पूजा के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूजा के दिनों में शिवपुरी का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। मंदिर परिसर में पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की मौजूदगी से धार्मिक वातावरण बना रहता है।

आयोजन में स्थानीय लोगों की अहम भूमिका
विषहरी पूजा के सफल आयोजन में मंदिर के पुजारी अजय यादव के अलावा कई स्थानीय लोग सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। कैलाश राम, नागो राम, बिजेन राम, हरे राम पासवान और दिलीप ऋषिदेव समेत कई लोग आयोजन की तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों की भागीदारी इस आयोजन को खास बनाती है। पूजा से जुड़ी परंपराओं को निभाने से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं तक, अलग-अलग स्तर पर लोग अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
2005 में हुई थी मां विषहरी मंदिर की स्थापना
शिवपुरी वार्ड संख्या-9 स्थित मां विषहरी मंदिर का इतिहास भी स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। मंदिर की स्थापना वर्ष 2005 में स्थानीय सविता देवी ने की थी। स्थापना के बाद धीरे-धीरे यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और आस्था केंद्रों में शामिल हो गया।
समय के साथ मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा बढ़ती गई और विषहरी पूजा का आयोजन भी स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन बन गया। हर वर्ष पूजा के दौरान आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मंदिर की स्थापना के बाद से चली आ रही यह परंपरा आज भी जारी है। स्थानीय लोगों के लिए मां विषहरी का मंदिर श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बन चुका है।
बेल नेवतने की रस्म क्यों है खास?
विषहरी पूजा में बेल नेवतना एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा मानी जाती है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, कलश स्थापना से पहले मां विषहरी को पूजा में शामिल होने का निमंत्रण देने के उद्देश्य से यह रस्म निभाई जाती है।
शनिवार रात इसी पारंपरिक रस्म के साथ इस वर्ष की पूजा की तैयारियों को धार्मिक विधि से आगे बढ़ाया गया। इसके बाद रविवार सुबह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, बेल नेवतने की परंपरा पूजा के आरंभ से पहले देवी को आमंत्रित करने का प्रतीक है। इसी धार्मिक विश्वास के साथ श्रद्धालु इस रस्म में हिस्सा लेते हैं और इसके बाद पूजा के अन्य अनुष्ठान शुरू होते हैं।
आस्था और परंपरा का संगम
अररिया के शिवपुरी में आयोजित तीन दिवसीय विषहरी पूजा धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय परंपरा और सामुदायिक एकजुटता की भी मिसाल है। मंदिर की स्थापना से लेकर आज तक इस आयोजन ने स्थानीय लोगों को एक साथ जोड़ने का काम किया है।
इस वर्ष भी पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। सोमवार को मां विषहरी का पट खुलने और देर शाम मेले के आयोजन के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ और बढ़ने की संभावना है। मंगलवार को हवन के साथ धार्मिक अनुष्ठान का समापन होगा।
फिलहाल शिवपुरी का मां विषहरी मंदिर भक्ति और आस्था के रंग में रंगा हुआ है। श्रद्धालु मां के दर्शन, पूजा और मन्नत के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक विश्वास, परंपरा और सामाजिक सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है।










