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पप्पू यादव का ऐलान: नेपाल त्रासदी पर पप्पू यादव का बड़ा ऐलान, अनाथ बच्चों को गोद लेने और 50 हजार की FD कराने की कही बात

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पप्पू यादव का ऐलान: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और उससे पैदा हुए हालात को लेकर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह नेपाल जाकर बाढ़ से प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और इस त्रासदी में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों से मुलाकात करेंगे। पप्पू यादव ने ऐसे अनाथ बच्चों को गोद लेने और उनके नाम पर 50 हजार रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराने की बात कही है।

पप्पू यादव दिल्ली रवाना होने के दौरान कटिहार पहुंचे थे, जहां समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इसी दौरान उन्होंने नेपाल में आई बाढ़ की स्थिति, पीड़ित परिवारों की मदद, आरक्षण के मुद्दे और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणी समेत कई राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखी।

नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही का जिक्र करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि इस आपदा ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में इंसानियत सबसे ऊपर होनी चाहिए और जहां भी लोगों को मदद की जरूरत है, वहां अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करना चाहिए।

सांसद ने कहा कि वह नेपाल के प्रभावित इलाकों में जाकर हालात का जायजा लेना चाहते हैं। खास तौर पर उन बच्चों से मिलने की बात उन्होंने कही, जिन्होंने बाढ़ की त्रासदी में अपने माता-पिता को खो दिया है। पप्पू यादव के मुताबिक, ऐसे बच्चों की मदद करना उनकी प्राथमिकता होगी।

पप्पू यादव का ऐलान
पप्पू यादव का ऐलान

उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के माता-पिता इस प्राकृतिक आपदा में नहीं रहे, उन्हें वह गोद लेने का फैसला कर चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्येक ऐसे बच्चे के नाम पर 50 हजार रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराने की बात भी कही। उनका कहना है कि यह राशि भविष्य में बच्चों की जरूरतों और उनके बेहतर भविष्य के लिए काम आ सकती है।

पप्पू यादव ने दावा किया कि नेपाल में बाढ़ की त्रासदी के दौरान उन्होंने नेपाल सरकार को 10 लाख रुपये की सहायता भी भेजी थी। उन्होंने कहा कि मदद का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ से जुड़ा नहीं है, बल्कि जरूरत के समय इंसान के साथ खड़ा होना है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में जहां भी इंसानियत को बचाने और पीड़ित लोगों की सहायता करने की जरूरत होगी, वह अपनी क्षमता के अनुसार मदद करने का प्रयास करते रहेंगे। नेपाल की त्रासदी को लेकर उन्होंने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी आपदा में प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

इसके बाद पप्पू यादव ने देश में चल रहे आरक्षण विवाद पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण के मुद्दे को लेकर सामने आए मतभेदों पर उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के बयान से संविधान या बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को बदला नहीं जा सकता।

पप्पू यादव ने दोनों नेताओं के साथ अपने संबंधों का जिक्र करते हुए चिराग पासवान को छोटा भाई और जीतन राम मांझी को पिता समान बताया। उन्होंने कहा कि वह दोनों के बीच किसी तरह का विवाद नहीं चाहते। उनके मुताबिक, समाज को जोड़ने की जरूरत है और राजनीतिक मतभेदों को इस तरह नहीं बढ़ाया जाना चाहिए कि समाज में तनाव पैदा हो।

उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान और सामाजिक न्याय के सवाल पर सभी पक्षों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और संविधान की मूल भावना को किसी व्यक्ति विशेष के बयान के आधार पर नहीं बदला जा सकता।

पप्पू यादव का ऐलान
पप्पू यादव का ऐलान

पप्पू यादव ने यह भी कहा कि किसी भी वर्ग की चिंता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समाज के अलग-अलग वर्गों की समस्याओं को समझना और उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार तथा राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मुस्लिम समुदाय को लेकर की गई टिप्पणी पर भी पप्पू यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह मोहन भागवत का सम्मान करते हैं, लेकिन भाषा और नीयत को लेकर आत्ममंथन जरूरी है।

उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग रहते हैं और भारत की ताकत उसकी विविधता में है। ऐसे में किसी भी बयान का असर समाज पर पड़ सकता है। इसलिए सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपने शब्दों के प्रभाव पर विचार करना चाहिए।

पप्पू यादव ने कहा कि देश में आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन समाज के लोगों के बीच दूरी बढ़ाने वाली परिस्थितियों से बचना चाहिए।

इसी दौरान उन्होंने जेएनयू और वहां के छात्रों तथा विचारधाराओं को लेकर इस्तेमाल किए जा रहे ‘बौद्धिक नक्सली’ जैसे शब्दों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि असहमति या अलग विचार रखने वाले व्यक्ति को किसी एक विशेष नजरिए से देखना उचित नहीं है।

अपने बयान में पप्पू यादव ने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, पेरियार, सावित्रीबाई फुले, ज्योतिबा फुले, कबीर, बुद्ध और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि देश का इतिहास अलग-अलग विचारों, आंदोलनों और सामाजिक बदलावों से बना है।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति के विचार मुख्यधारा से अलग हों तो क्या सिर्फ इसी आधार पर उसे गलत ठहरा देना चाहिए? उनके मुताबिक, समाज में विचारों और असहमति के लिए जगह होनी चाहिए। लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों पर चर्चा और बहस जरूरी है।

पप्पू यादव के इस पूरे बयान में एक तरफ नेपाल की प्राकृतिक आपदा में पीड़ित बच्चों की मदद का मुद्दा रहा, तो दूसरी तरफ देश के राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर उन्होंने अपनी राय रखी। नेपाल में अनाथ हुए बच्चों को गोद लेने और उनके नाम पर 50 हजार रुपये की FD कराने का उनका ऐलान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।

अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि पप्पू यादव नेपाल के प्रभावित इलाकों का दौरा कब करते हैं और अनाथ बच्चों की मदद के लिए उनके स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। वहीं, आरक्षण और सामाजिक एकता से जुड़े उनके बयानों पर भी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।

पप्पू यादव का ऐलान
पप्पू यादव का ऐलान

नेपाल की बाढ़ ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि प्राकृतिक आपदा के बाद सबसे ज्यादा जरूरत उन परिवारों और बच्चों की होती है, जो अपना सब कुछ खो चुके होते हैं। ऐसे में राहत और पुनर्वास के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

फिलहाल पप्पू यादव ने नेपाल त्रासदी को लेकर अपनी ओर से मदद का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए वह आगे भी अपनी क्षमता के अनुसार काम करते रहेंगे। उनके इस बयान के बाद अब यह देखना होगा कि नेपाल के प्रभावित बच्चों के लिए उनकी घोषणा किस तरह जमीन पर लागू होती है और उन्हें किस स्तर तक मदद मिल पाती है।

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