मलेशिया में फंसे युवक: मलेशिया में रोजगार की तलाश में गए किशनगंज और पूर्णिया के कई युवकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इन युवकों से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ युवक सुनसान जंगल में छिपे हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में युवक अपनी मजबूरी बताते हुए भारत सरकार से मदद की गुहार लगाते दिखाई दे रहे हैं।
युवकों का दावा है कि वे रोजगार की उम्मीद लेकर मलेशिया पहुंचे थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद परिस्थितियां उनके खिलाफ होती चली गईं। उनके मुताबिक, अब उनके पास न तो वैध वीजा है, न काम और न ही इतना पैसा बचा है कि वे किसी कमरे का किराया दे सकें। इसी वजह से उन्हें सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जंगल और सुनसान इलाकों में छिपकर रहना पड़ रहा है।

पुलिस कार्रवाई के डर से जंगल में रहने का दावा
सामने आए वीडियो में युवकों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वे मलेशिया में पुलिस की कार्रवाई को लेकर डरे हुए हैं। उनका कहना है कि खुले इलाके में रहने या बाहर निकलने पर गिरफ्तारी का खतरा महसूस होता है। इसी डर के कारण वे जंगल जैसे सुनसान स्थानों में रहने को मजबूर हैं।
युवकों के मुताबिक, जंगल में रहना उनके लिए आसान नहीं है। खाने-पीने और रहने की बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। कई बार उन्हें पर्याप्त भोजन तक नहीं मिल पाता। इसके बावजूद वे मजबूरी में अपना ठिकाना बदलते रहते हैं।
वीडियो में युवकों की स्थिति सामने आने के बाद उनके परिवारों की चिंता और बढ़ गई है। परिवारों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर रोजगार और कमाई की उम्मीद में विदेश भेज रहे थे, लेकिन अब वही बच्चे वहां मुश्किल हालात में फंस गए हैं।
करीब 40 युवकों की गिरफ्तारी का भी दावा
मलेशिया में फंसे भारतीय युवकों को लेकर इससे पहले भी एक वीडियो सामने आ चुका है। उसमें किशनगंज और पूर्णिया के करीब 40 युवकों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने का दावा किया गया था। वीडियो में कुछ युवक पुलिस वैन में हथकड़ी लगाए नजर आए थे।
अब जंगल में छिपे युवकों का नया वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर परिवारों की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है। एक तरफ कुछ युवकों की गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ अन्य युवक पुलिस से बचने के लिए जंगल में छिपे होने की बात कह रहे हैं।
हालांकि, सामने आए वीडियो में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में युवकों की वास्तविक स्थिति और उनके खिलाफ मलेशिया में क्या कानूनी कार्रवाई चल रही है, इसकी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

परिवारों ने लगाए गंभीर आरोप
युवकों के परिवारों की ओर से विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप भी लगाए गए हैं। कुछ परिजनों का दावा है कि उनके बच्चों को मलेशिया और बाद में दुबई में रोजगार दिलाने का भरोसा दिया गया था।
परिजनों ने किशनगंज के पूर्व विधायक मुजाहिद आलम का नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें विदेश में रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया गया था। परिवारों का दावा है कि उनसे लाखों रुपये लिए गए और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनके बच्चों को विदेश में अच्छी नौकरी मिल जाएगी।
हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों को फिलहाल परिजनों के आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।
रोजगार की उम्मीद में विदेश पहुंचे थे युवक
परिवारों के मुताबिक, युवाओं ने विदेश जाने का फैसला रोजगार और बेहतर कमाई की उम्मीद में किया था। सीमित रोजगार के अवसरों के बीच कई परिवारों को लगा कि विदेश में काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
इसी उम्मीद में परिवारों ने एजेंटों या संबंधित लोगों को बड़ी रकम दी। परिजनों का आरोप है कि उन्हें विदेश में नौकरी, रहने की व्यवस्था और बेहतर भविष्य का भरोसा दिया गया था।
लेकिन मलेशिया पहुंचने के बाद कथित तौर पर युवकों के सामने अलग स्थिति पैदा हो गई। परिवारों का कहना है कि युवकों के पास काम नहीं है और वीजा से जुड़ी समस्या भी सामने आ गई। धीरे-धीरे उनके पास मौजूद पैसे भी खत्म होते चले गए।

खाने-रहने तक का संकट
परिजनों के अनुसार, शुरुआत में युवकों के पास जो पैसे थे, उनका इस्तेमाल रहने, खाने और दूसरी जरूरी जरूरतों में होता रहा। काम नहीं मिलने के कारण आमदनी का कोई जरिया नहीं बना और कुछ समय बाद उनके पास पैसे खत्म होने लगे।
अब स्थिति यह है कि कई युवक खाने और रहने तक के संकट से जूझने का दावा कर रहे हैं। परिवारों का कहना है कि जब युवकों से फोन पर बात होती है तो वे अपनी परेशानियां बताते हैं।
कुछ युवकों के बारे में परिजनों का कहना है कि वे खुले इलाके में जाने से भी डरते हैं। पुलिस कार्रवाई की खबर मिलते ही वे अपना ठिकाना बदल देते हैं। इस वजह से परिवारों के साथ उनका संपर्क भी लगातार नहीं हो पा रहा है।
मोबाइल फोन बना परिवारों से संपर्क का जरिया
जंगल या सुनसान जगहों पर छिपे होने का दावा करने वाले युवकों के लिए मोबाइल फोन ही परिवारों से संपर्क का मुख्य माध्यम बना हुआ है। जब भी उन्हें मौका मिलता है, वे घरवालों से बात करके अपनी स्थिति बताते हैं।
परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके बच्चे सुरक्षित हैं या नहीं। फोन पर बच्चों की परेशानी सुनकर परिवारों की बेचैनी बढ़ जाती है।
परिजन चाहते हैं कि भारत सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और मलेशिया में संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर युवकों की स्थिति का पता लगाए। उनका कहना है कि जो युवक कानूनी या दस्तावेजी समस्या में फंसे हैं, उन्हें उचित प्रक्रिया के तहत भारत वापस लाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सुरक्षित वापसी की मांग
युवकों और उनके परिवारों की सबसे बड़ी मांग अब उनकी सुरक्षित वापसी है। परिवार चाहते हैं कि भारत सरकार और संबंधित दूतावास स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जाए।
परिजन यह भी चाहते हैं कि विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर अगर किसी तरह की धोखाधड़ी हुई है तो उसकी जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
विदेश जाने वाले युवाओं के लिए पासपोर्ट, वीजा और रोजगार से जुड़े दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों को अगर बिना उचित दस्तावेजों के विदेश भेजा गया है, तो इसकी भी जांच होनी चाहिए।
परिवारों की बढ़ती चिंता
मलेशिया से सामने आ रहे वीडियो ने किशनगंज और पूर्णिया के उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, जिनके बच्चे वहां रोजगार की तलाश में गए हैं। एक तरफ गिरफ्तारी की खबरें सामने आ रही हैं, दूसरी तरफ कुछ युवक जंगलों में छिपने का दावा कर रहे हैं।
ऐसे में परिवारों को अपने बच्चों के भविष्य और सुरक्षा दोनों की चिंता सता रही है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करेगी और युवकों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा।
फिलहाल सामने आए वीडियो के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि मलेशिया में फंसे इन युवकों की स्थिति क्या है, उनके पास वैध दस्तावेज क्यों नहीं हैं और उन्हें रोजगार दिलाने के नाम पर विदेश भेजने की पूरी प्रक्रिया क्या थी।
अब निगाहें सरकारी कार्रवाई पर हैं। यदि युवकों के दावे सही पाए जाते हैं, तो उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाना सबसे पहली प्राथमिकता होगी। साथ ही विदेश में रोजगार के नाम पर कथित तौर पर पैसे लेने और युवकों को मुश्किल हालात में छोड़ने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी होगी।










