बनमनखी योजना राशि विवाद: पूर्णिया जिले के बनमनखी प्रखंड में करीब ढाई करोड़ रुपये की योजना राशि के बंटवारे को लेकर विवाद गहरा गया है। पंचायत समिति के कई सदस्यों ने प्रखंड प्रमुख कामेश्वर टुडू के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए योजना राशि के वितरण में कथित अनियमितता और पक्षपात के आरोप लगाए हैं। शनिवार को कई पंचायत समिति सदस्य प्रखंड सह अंचल कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान मामला उस समय और गरमा गया, जब कुछ प्रदर्शनकारी प्रखंड प्रमुख के चैंबर के अंदर पहुंच गए। वहां नारेबाजी की गई। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोग चैंबर के अंदर नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो में नजर आ रहे सभी लोगों की पहचान और उनकी आधिकारिक भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विवाद की मुख्य वजह वित्तीय वर्ष की करीब ढाई करोड़ रुपये की योजना राशि का वितरण बताया जा रहा है। विरोध कर रहे पंचायत समिति सदस्यों का आरोप है कि योजना की राशि सभी पंचायत समिति क्षेत्रों में समान रूप से या नियमों के अनुरूप वितरित नहीं की गई। उनका दावा है कि कुछ चुनिंदा सदस्यों के क्षेत्रों में राशि का आवंटन अधिक किया गया, जबकि कई अन्य क्षेत्रों को अपेक्षित हिस्सा नहीं मिला।
पंचायत समिति सदस्यों का कहना है कि विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध सरकारी राशि का इस्तेमाल सभी क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए होना चाहिए। उनके अनुसार, अगर किसी क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए योजना राशि स्वीकृत की जाती है, तो उसके वितरण में पारदर्शिता और निर्धारित नियमों का पालन होना जरूरी है।

प्रदर्शन कर रहे सदस्यों ने आरोप लगाया कि योजना राशि के बंटवारे में मनमानी की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राशि के इस्तेमाल को लेकर कुछ लोगों के बीच आपसी साठगांठ और कथित कमीशनखोरी की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी की ओर से इन आरोपों को सही ठहराने वाली कोई रिपोर्ट सामने आई है।
पंचायत समिति सदस्यों ने मांग की है कि योजना राशि के वितरण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि प्रत्येक पंचायत समिति क्षेत्र को नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसका उचित हिस्सा मिलना चाहिए। सदस्यों ने यह भी कहा कि अगर उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
विरोध कर रहे सदस्यों ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर प्रखंड कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पूर्व में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज और जानकारी सार्वजनिक करने की बात भी कही है।
दूसरी ओर, प्रखंड प्रमुख कामेश्वर टुडू ने पंचायत समिति सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन पर योजना राशि की बंदरबांट या गबन जैसे आरोप बेबुनियाद हैं। प्रमुख के मुताबिक योजना राशि का वितरण नियमों के अनुसार किया जा रहा है और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई है।
प्रमुख ने प्रदर्शन को लेकर भी अलग दावा किया है। उनका कहना है कि प्रदर्शन में मौजूद ज्यादातर लोग वास्तविक पंचायत समिति सदस्य नहीं थे, बल्कि पंचायत समिति सदस्यों के पति या उनके प्रतिनिधि थे। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

योजना राशि को लेकर विवाद के बीच अब सवाल यह है कि करीब ढाई करोड़ रुपये की राशि के आवंटन का आधार क्या था और अलग-अलग पंचायत समिति क्षेत्रों के लिए कितनी राशि निर्धारित की गई। इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि राशि के वितरण के लिए कौन-से नियम और मानक लागू किए गए थे।
अगर पंचायत समिति सदस्यों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच होती है, तो योजना राशि के आवंटन से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृत योजनाएं, क्षेत्रवार आवंटन और संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि राशि का वितरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ और क्या सभी क्षेत्रों को निर्धारित नियमों के अनुसार हिस्सा मिला।
फिलहाल बनमनखी प्रखंड में यह विवाद राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ पंचायत समिति सदस्य प्रमुख पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रमुख इन आरोपों को पूरी तरह गलत बता रहे हैं। दोनों पक्षों के दावों में अंतर होने के कारण मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
शनिवार के प्रदर्शन के दौरान प्रखंड प्रमुख के चैंबर में हुई नारेबाजी ने भी मामले को चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी शिकायत और नाराजगी दर्ज कराने के लिए विरोध किया। वहीं, प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि योजना राशि के वितरण को लेकर उठे सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आए और यदि कोई शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज होती है तो उसकी प्रक्रिया के तहत जांच की जाए।

पंचायत समिति सदस्यों का कहना है कि विकास योजनाओं की राशि जनता के हित के लिए होती है। इसलिए इसके आवंटन और खर्च में पारदर्शिता जरूरी है। उनका दावा है कि अगर सभी क्षेत्रों को उचित हिस्सा नहीं मिला तो इसका सीधा असर स्थानीय विकास कार्यों पर पड़ सकता है।
दूसरी तरफ प्रखंड प्रमुख का पक्ष है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक और व्यक्तिगत विरोध से प्रेरित हैं और योजना राशि के वितरण में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों की जांच सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है।
फिलहाल मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। करीब ढाई करोड़ रुपये की योजना राशि के वितरण को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब तभी सामने आएगा, जब संबंधित दस्तावेजों और आवंटन प्रक्रिया की आधिकारिक समीक्षा होगी।
बनमनखी प्रखंड में हुए इस विवाद ने स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के आवंटन, पंचायत समिति की भूमिका और राशि के पारदर्शी इस्तेमाल को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में कोई औपचारिक जांच या समीक्षा कराता है या नहीं और योजना राशि के वितरण को लेकर लगाए गए आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।










