अररिया नगर परिषद के वार्ड संख्या 29 के हजारों निवासी आज भी एक स्थायी पुल का इंतजार कर रहे हैं। वार्ड को दो हिस्सों में बांटने वाली परमान नदी के कारण स्थानीय लोग दशकों से बांस और लकड़ी से बने अस्थायी चचरी पुल पर निर्भर हैं। यह पुल हर साल बरसात से पहले स्थानीय लोगों की मदद से बनाया जाता है, लेकिन मानसून आते ही यह बह जाता है और तब नाव ही एकमात्र आवागमन का विकल्प बचता है।

महत्वपूर्ण मार्गों से कटते हैं लोग
यह रास्ता मैनपुर, बसंतपुर, मोमिन टोला और मानिकपुर जैसे इलाकों को जोड़ता है। अररिया बाजार महज एक किलोमीटर और सदर अस्पताल दो किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। इसके बावजूद बरसात के मौसम में छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बीमार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। स्कूली बच्चे भी पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालकर चचरी पुल से गुजरते हैं।
स्थानीय निवासी मोहम्मद इरशाद ने कहा, “1960 से पहले यह मुख्य मार्ग था। बाद में दूसरी तरफ सड़क बन गई, लेकिन हमारे वार्ड की हालत आज भी जस की तस बनी हुई है। हम नगर परिषद क्षेत्र में रहते हैं, फिर भी हमें गांव जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।”
सदर अस्पताल में कार्यरत मोहम्मद इम्तियाज आलम ने बताया, “मुझे रोज इसी रास्ते से आना-जाना पड़ता है। मेरी उम्र 37 साल हो गई है, लेकिन हालात नहीं बदले। बरसात में नाव के सहारे ही गुजारा करना पड़ता है।”

शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोग इस बात से हैरान हैं कि कई ग्रामीण पंचायतों में पहले ही पुल बन चुके हैं, लेकिन नगर परिषद क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोग अब भी इस बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। पिछले कई वर्षों में इस मुद्दे पर कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
वार्ड 29 के निवासी मांग कर रहे हैं कि शहरी क्षेत्र होने के बावजूद उन्हें पक्का पुल और सड़क का निर्माण किया जाए। उनका कहना है कि इससे दैनिक जीवन आसान होगा और खासकर मानसून के दौरान जान-माल के खतरे को खत्म किया जा सकेगा।

स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। वार्डवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही पक्का पुल नहीं बना तो आने वाले मानसून में हालात और खतरनाक हो सकते हैं।
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