अररिया। बिहार दिवस के अवसर पर अररिया जिले में रविवार को पूरे जिलेभर में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव किया।
कार्यक्रम की शुरुआत एचई हाई स्कूल, अररिया से प्रभात फेरी के साथ हुई। शहर के विभिन्न हिस्सों से निकली प्रभात फेरियों ने बिहार की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता का संदेश देते हुए टाउन हॉल पहुंचकर उत्सव का दृश्य प्रस्तुत किया।

मुख्य समारोह का उद्घाटन जिला पदाधिकारी बिनोद दुहन, जिला परिषद उपाध्यक्ष चांदनी देवी और डीडीसी रोजी कुमारी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। उद्घाटन के बाद अधिकारियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया।
इन स्टॉलों में समाज कल्याण विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, समेकित बाल विकास सेवाएं, जीविका, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य केंद्र, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, बिजली विभाग और परिवहन विभाग सहित कई अन्य विभाग शामिल थे। अधिकारियों ने स्टॉलों पर उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी ली और लाभार्थियों से बातचीत करके उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना।

इस अवसर पर जिला पदाधिकारी बिनोद दुहन ने कहा कि बिहार की भूमि सम्राट अशोक और भगवान गौतम बुद्ध की कर्मभूमि रही है, जहां से ज्ञान, शांति और मोक्ष का संदेश पूरे विश्व में फैला। उन्होंने कहा कि राज्य की सामाजिक और आर्थिक विकास प्रक्रिया में सभी नागरिकों और विभागों का सहयोग आवश्यक है।
जिला परिषद उपाध्यक्ष चांदनी देवी ने बिहार दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों में राज्य की गौरवशाली संस्कृति के प्रति जागरूकता और प्रेम बढ़ाएंगे।

इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, गीत-संगीत और नाट्य कार्यक्रमों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए, जिन्होंने बिहार दिवस के महत्व को जीवंत रूप में महसूस किया।
बिहार दिवस के इस आयोजन ने अररिया जिले में न सिर्फ उत्सव का माहौल बनाया, बल्कि लोगों में राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के प्रति गर्व और प्रेम को भी मजबूत किया।
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