किशनगंज: जिले के इमली गोला चौक स्थित फैमिली चिल्ड्रन क्लिनिक बच्चों के इलाज के क्षेत्र में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। महज एक साल के भीतर इस क्लिनिक ने सैकड़ों बच्चों का सफल इलाज कर अभिभावकों के बीच गहरा भरोसा कायम किया है। यही वजह है कि अब दूर-दराज के इलाकों से भी लोग अपने बच्चों को यहां इलाज के लिए लेकर पहुंच रहे हैं।

यह क्लिनिक पूरी तरह से बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समर्पित है, जहां नवजात शिशुओं से लेकर बड़े बच्चों तक का इलाज आधुनिक सुविधाओं और अनुभवी चिकित्सा देखरेख में किया जाता है। क्लिनिक में बुखार, सर्दी-खांसी, वायरल संक्रमण, निमोनिया, दमा, एलर्जी, डायरिया, उल्टी, पेट दर्द, टाइफाइड, मलेरिया, डेंगू, पीलिया, कुपोषण, त्वचा रोग, कान-नाक-गला से जुड़ी समस्याएं, बच्चों के विकास में देरी सहित लगभग सभी सामान्य और गंभीर बीमारियों का इलाज उपलब्ध है। साथ ही, नियमित टीकाकरण की सुविधा भी यहां दी जाती है।

क्लिनिक की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वच्छ वातावरण, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और बच्चों के अनुकूल देखभाल है। यहां हर बच्चे का इलाज पूरी सावधानी और संवेदनशीलता के साथ किया जाता है, जिससे अभिभावकों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

क्लिनिक के अनुभवी चिकित्सक डॉ. यस हलदर (एमबीबीएस, डीसीएच, एमडी, डीएनबी) ने बदलते मौसम को देखते हुए अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि गर्मी, ठंड और अचानक मौसम परिवर्तन के कारण बच्चों में वायरल बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।
डॉ. हलदर ने स्पष्ट रूप से कहा कि बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की दवा या इंजेक्शन नहीं देना चाहिए, क्योंकि हर बीमारी का इलाज अलग होता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि बच्चे को 2-3 दिनों तक बुखार, खांसी या अन्य कोई समस्या बनी रहती है, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सेहत के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है, इसलिए समय पर सही इलाज बेहद जरूरी है।
बेहतर इलाज, भरोसेमंद सेवाओं और सकारात्मक परिणामों के कारण इमली गोला चौक का यह फैमिली चिल्ड्रन क्लिनिक अब किशनगंज ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी एक विश्वसनीय स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभर रहा है और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए अभिभावकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
अधिक अपडेट के लिए पढ़ें Jeb News.










