किशनगंज शहर में महावीर जयंती के अवसर पर जैन समुदाय द्वारा एक भव्य और आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे शहर को धार्मिक आस्था और उत्साह के रंग में रंग दिया। ‘जियो और जीने दो’ के संदेश के साथ निकाली गई इस यात्रा का उद्देश्य भगवान महावीर के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाना और समाज में शांति, अहिंसा एवं भाईचारे का प्रसार करना था।

शोभायात्रा की शुरुआत शहर के जैन मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद हुई। मंदिर परिसर से जैसे ही यात्रा निकली, बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और बच्चे इसमें शामिल हो गए। कई बच्चों ने भगवान महावीर का रूप धारण कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उनके उपदेशों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

यात्रा के दौरान महिलाएं और बच्चे हाथों में तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर भगवान महावीर के उपदेश लिखे हुए थे। ‘अहिंसा परम धर्म’ और ‘जियो और जीने दो’ जैसे संदेशों ने लोगों को गहराई से प्रभावित किया। शोभायात्रा को देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया।
जैन धर्म में महावीर जयंती को सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सत्य, अहिंसा और मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया। उनके बताए मार्ग आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक माने जाते हैं।

यह शोभायात्रा जैन मंदिर से शुरू होकर महावीर मार्ग, गांधी चौक, नेमचंद रोड, फल चौक, धर्मशाला रोड और कैल्टैक्स चौक होते हुए तेरापंथ भवन पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत किया।
इस अवसर पर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन त्रिलोक चंद जैन ने कहा कि भगवान महावीर का ‘जियो और जीने दो’ का संदेश आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। यह संदेश समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का कार्य करता है।

कार्यक्रम के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे शोभायात्रा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकी। इस आयोजन में जैन समाज के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और सभी ने भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस मौके पर आँची देवी जैन, संजय जैन, मनीष दफ्तरी, रोहित दफ्तरी, विनीत दफ्तरी, मनोज जैन, सुरेश जैन और पवन जैन सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश देने का माध्यम भी साबित हुआ।
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