NEBCCI आमसभा: कटिहार में आज व्यापारिक संगठन नॉर्थ ईस्टर्न बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज यानी NEBCCI की 48वीं वार्षिक आमसभा आयोजित होने जा रही है। आमसभा को लेकर चैंबर भवन में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही उद्घाटनकर्ता के नाम को लेकर व्यापारी संगठन के भीतर मतभेद सामने आ गया है। अब यह मामला सिर्फ एक कार्यक्रम के उद्घाटन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चैंबर की गैर-राजनीतिक पहचान और निष्पक्षता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
48वीं वार्षिक आमसभा का आयोजन रविवार, 13 सितंबर को शाम 4 बजकर 30 मिनट पर चैंबर भवन, चैंबर पथ, एमजी रोड में किया जाएगा। इस कार्यक्रम में शहर और जिले के बड़ी संख्या में व्यापारी, चैंबर के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा कई जनप्रतिनिधियों के भी कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना है।
चैंबर की ओर से जारी आमंत्रण पत्र के मुताबिक, बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी आमसभा का उद्घाटन करेंगे। वहीं, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा महापौर उषा देवी अग्रवाल, कदवा विधायक दुलाल चंद गोस्वामी, पूर्णिया विधायक विजय खेमका और प्राणपुर विधायक निशा सिंह समेत कई जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।

हालांकि, उद्घाटनकर्ता के रूप में संजय सरावगी के नाम को लेकर कुछ वरिष्ठ व्यापारियों ने आपत्ति जताई है। व्यापारियों के एक वर्ग का कहना है कि चैंबर ऑफ कॉमर्स मूल रूप से व्यापारियों और कारोबारी हितों से जुड़ी संस्था है और इसकी पहचान एक गैर-राजनीतिक संगठन के रूप में रही है। ऐसे में किसी राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष को आमसभा का उद्घाटनकर्ता बनाए जाने से संस्था की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
विरोध करने वाले व्यापारियों में सत्यनारायण शर्मा और गोरी सुल्तानिया समेत कुछ वरिष्ठ कारोबारी शामिल बताए जा रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर किसी राजनीतिक दल से जुड़े नेता को कार्यक्रम में प्रमुख भूमिका दी जा रही है, तो फिर सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी समान रूप से आमंत्रित किया जाना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि बेहतर होगा कि चैंबर के कार्यक्रमों को पूरी तरह व्यापारिक और गैर-राजनीतिक रखा जाए, ताकि संस्था की निष्पक्ष छवि बनी रहे।
व्यापारियों का कहना है कि चैंबर में अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोग भी सदस्य हो सकते हैं। इसलिए संस्था के मंच को किसी एक राजनीतिक दल के प्रभाव से अलग रखना जरूरी है। इसी वजह से उद्घाटनकर्ता के चयन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, चैंबर के मौजूदा पदाधिकारी इस विरोध से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि संजय सरावगी को सिर्फ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण आमंत्रित नहीं किया गया है। उनके मुताबिक, संजय सरावगी का व्यापारिक क्षेत्र से पुराना संबंध रहा है और वे लंबे समय तक चैंबर की गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं।
चैंबर पदाधिकारियों का तर्क है कि संजय सरावगी खुद एक बड़े व्यापारी परिवार से आते हैं। ऐसे में उन्हें चैंबर के पुराने सदस्य और व्यापारी के तौर पर कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। पदाधिकारियों का कहना है कि उनके राजनीतिक पद को इस आमंत्रण से अलग करके देखा जाना चाहिए।
यानी एक तरफ व्यापारी संगठन के कुछ वरिष्ठ सदस्य संस्था की गैर-राजनीतिक पहचान को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ मौजूदा पदाधिकारी इसे पुराने कारोबारी संबंध और चैंबर से जुड़ाव के आधार पर सही ठहरा रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रविवार को होने वाली आमसभा में यह मतभेद किस रूप में सामने आता है। क्या विरोध करने वाले व्यापारी अपनी आपत्ति दर्ज कराने के बाद कार्यक्रम में शामिल होंगे, या फिर उद्घाटनकर्ता को लेकर विवाद और आगे बढ़ेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब आमसभा के दौरान ही स्पष्ट होंगे।
NEBCCI की यह आमसभा व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वार्षिक आमसभा में संगठन की गतिविधियों, व्यापारियों से जुड़े मुद्दों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होना स्वाभाविक है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कार्यक्रम के दौरान व्यापार और उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी सामने आएंगे।
कटिहार के व्यापारी वर्ग के लिए चैंबर ऑफ कॉमर्स एक महत्वपूर्ण मंच है। स्थानीय व्यापारियों की समस्याओं को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाने में ऐसे संगठनों की भूमिका रहती है। इसलिए संगठन के भीतर होने वाली किसी भी तरह की राजनीतिक बहस का असर व्यापारिक मुद्दों पर भी पड़ सकता है।
विरोध कर रहे व्यापारियों की मुख्य चिंता यही है कि चैंबर को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाए। उनका मानना है कि संगठन का मंच सभी व्यापारियों के लिए समान होना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष की छवि नहीं बननी चाहिए।
वहीं, मौजूदा पदाधिकारियों की ओर से यह स्पष्ट किया जा रहा है कि संजय सरावगी के साथ चैंबर का पुराना संबंध है। इसलिए उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित करना किसी राजनीतिक दल को प्राथमिकता देना नहीं माना जाना चाहिए।
इस विवाद के बीच कार्यक्रम में शामिल होने वाले अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होगी। महापौर उषा देवी अग्रवाल, कदवा विधायक दुलाल चंद गोस्वामी, पूर्णिया विधायक विजय खेमका और प्राणपुर विधायक निशा सिंह समेत कई नेताओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में आमसभा का मंच व्यापारिक मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक चर्चाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन सकता है।
कार्यक्रम को लेकर चैंबर भवन में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रविवार शाम साढ़े चार बजे होने वाली इस आमसभा पर व्यापारी वर्ग की नजर बनी हुई है। सबसे ज्यादा चर्चा उद्घाटनकर्ता को लेकर सामने आए मतभेद की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आमसभा शुरू होने के बाद इस विवाद को किस तरह संभाला जाता है। क्या चैंबर के वरिष्ठ व्यापारी और मौजूदा पदाधिकारी आपसी मतभेद को खत्म कर एक मंच पर नजर आएंगे? क्या उद्घाटन कार्यक्रम बिना किसी विवाद के पूरा होगा? या फिर राजनीतिक भागीदारी को लेकर उठी आपत्ति आमसभा में भी चर्चा का विषय बनेगी?
फिलहाल इतना तय है कि NEBCCI की 48वीं वार्षिक आमसभा इस बार सिर्फ एक नियमित संगठनात्मक बैठक नहीं रहने वाली है। उद्घाटनकर्ता को लेकर सामने आए मतभेद ने इसे पहले ही चर्चा में ला दिया है।
व्यापारी संगठन के सामने अब चुनौती यही है कि इस विवाद के बावजूद चैंबर की एकजुटता और गैर-राजनीतिक पहचान को कैसे बनाए रखा जाए। आमसभा के दौरान व्यापारियों की समस्याओं और हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ-साथ संगठन के भीतर उठे मतभेद को लेकर भी सभी की निगाहें बनी रहेंगी।
कटिहार में रविवार शाम होने वाली इस 48वीं वार्षिक आमसभा के बाद ही साफ होगा कि व्यापारी संगठन इस विवाद को पीछे छोड़कर एकजुटता का संदेश देता है या उद्घाटनकर्ता को लेकर उठे सवाल आगे भी चर्चा का विषय बने रहते हैं।










